बंगाल में भाजपा को जमाने में कैलाश विजयवर्गीय और दिलीप घोष का महत्वपूर्ण योगदान रहा....

गत दस वर्षों (2014-2026) के दौरान पश्चिम बंगाल में भाजपा के मतप्रतिशत में ऐतिहासिक वृद्धि के पीछे संगठन का कुशल नेतृत्व रहा है। इस अवधि में पार्टी के अध्यक्षों और प्रभारियों की सूची निम्नलिखित है:-

## पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष (State Presidents) 

पार्टी के राज्य अध्यक्षों ने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

* राहुल सिन्हा (2009 – 2015): इनके कार्यकाल के दौरान 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का मतप्रतिशत पहली बार दो अंकों (17%) तक पहुँचा।
* दिलीप घोष (2015 – 2021): इन्हें बंगाल में भाजपा के उत्थान का सबसे सफल अध्यक्ष माना जाता है। इनके नेतृत्व में पार्टी ने 2019 लोकसभा चुनाव में 18 सीटें और 2021 विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल का स्थान प्राप्त किया।
* डॉ. सुकांत मजूमदार (2021 – 2025): दिलीप घोष के बाद इन्होंने कमान संभाली और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को और अधिक विस्तार दिया।
* सामिक भट्टाचार्य (जुलाई 2025 – वर्तमान): राज्यसभा सांसद सामिक भट्टाचार्य ने 2025 में कार्यभार संभाला और उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया।
## पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रभारी (State In-charges/Prabhari)
प्रभारियों ने केंद्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच सेतु का कार्य किया और चुनावी रणनीतियाँ बनाईं:

* सिद्धार्थ नाथ सिंह: 2014-15 के दौरान इन्होंने बंगाल में पार्टी की सक्रियता बढ़ाई।

* कैलाश विजयवर्गीय: 2015 से 2021 तक ये बंगाल के मुख्य प्रभारी रहे। 2019 और 2021 के चुनावों में भाजपा की आक्रामक रणनीति के पीछे इनका बड़ा हाथ था।

* सुनील बंसल: 2022 के बाद इन्हें संगठन को 'माइक्रो मैनेजमेंट' स्तर पर मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई।

* मंगल पांडेय (वर्तमान): वर्तमान में बिहार के पूर्व मंत्री मंगल पांडेय पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। [6] 

विशेष उल्लेख:-

* शुभेंदु अधिकारी: 2021 के बाद से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में और अब 2026 में मुख्यमंत्री के रूप में इन्होंने बंगाल भाजपा के चेहरे के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है।

* अमित शाह और जे.पी. नड्डा: केंद्रीय नेतृत्व के रूप में इन दोनों नेताओं ने बंगाल पर विशेष ध्यान दिया, जिससे मतप्रतिशत में लगातार वृद्धि हुई। 



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