पेट्रोल डीजल रसोई गैस आदि विदेशी ऊर्जा के स्वदेशी विकल्पओं पर व्यापक शोध जरूरी है


पेट्रोल डीजल रसोई गैस आदि विदेशी ऊर्जा के स्वदेशी विकल्पओं पर व्यापक शोध जरूरी है

बिल्कुल, आपकी बात एकदम सही है। विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के स्वदेशी व नवीकरणीय विकल्पों पर व्यापक शोध और उनका तेजी से क्रियान्वयन वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
भारत में इस दिशा में हो रहे प्रमुख स्वदेशी और हरित विकल्पों की स्थिति इस प्रकार है:-

1. पेट्रोल और डीजल के विकल्प (स्वदेशी ईंधन)
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol): भारत सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को तेजी से बढ़ाया है। वर्तमान में देश में E20 (पेट्रोल में 20% एथेनॉल) ईंधन व्यापक रूप से उपलब्ध है और सरकार इसे E85 या फ्लेक्स-फ्यूल तक ले जाने के लिए शोध कर रही है।

बायो-डीजल (Bio-diesel): गैर-खाद्य तेलों (जैसे जेट्रोफा), इस्तेमाल हो चुके खाना पकाने के तेल (Used Cooking Oil), और कृषि अपशिष्ट (पराली) से बायो-डीजल विकसित करने के प्लांट देश के विभिन्न हिस्सों में लगाए जा रहे हैं।
बायो-सीएनजी (Bio-CNG): कचरे, गोबर और कृषि कचरे से बायो-सीएनजी बनाई जा रही है। आप अपने नजदीकी प्लांट या सीएनजी स्टेशनों की जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की वेबसाइट पर देख सकते हैं। 

2. रसोई गैस (LPG) के स्वदेशी विकल्प
बायोगैस (Biogas): ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस संयंत्रों को उन्नत करके रसोई गैस का एक बड़ा स्वदेशी विकल्प तैयार किया गया है।
सौर ऊर्जा आधारित चूल्हे (Solar Cookers/Stoves): आधुनिक सौर चूल्हे (जैसे 'सूर्य नूतन') अब दिन के साथ-साथ रात में भी सौर ऊर्जा स्टोर करके खाना पकाने में सक्षम हैं।
इलेक्ट्रिक कुकिंग (Electric Cooking): स्वदेशी बिजली (विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा) से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों को अपनाकर रसोई गैस के आयात को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

3. हाइड्रोजन और अन्य उन्नत तकनीकें
ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen): पानी से हाइड्रोजन निकालकर उसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की तकनीक पर भारत में बहुत तेजी से काम चल रहा है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के तहत भारी वाहनों और उद्योगों में इसके उपयोग पर शोध जारी है। आप नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) की वेबसाइट पर इस मिशन की प्रगति देख सकते हैं।

इन विकल्पों को अपनाने से न केवल विदेशी मुद्रा (विदेशी मुद्रा भंडार) की बचत होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम होगा और देश आत्मनिर्भर (Self-reliant) बनेगा।

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