चुनाव आयोग के साहसी निर्णयों से,बंगाल चुनाव हिंसा और भय से मुक्त सम्पन्न, मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार सम्मान और शाबासी हकदार - अरविन्द सिसोदिया


चुनाव आयोग के साहसी निर्णयों से बंगाल चुनाव ' हिंसा और भय से मुक्त" सम्पन्न - अरविन्द सिसोदिया 

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की टीम सम्मान और शाबाशी की हकदार - अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 3 मई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि "कम्युनिस्ट विचार की हिंसा, भय और बदले की भावना से लिप्त बंगाल की रक्तरंजीत राजनीतिक चुनौती को परास्त कर, चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय सहित मोदी सरकार नें हिंसा और भयमुक्त चुनाव सम्पन्न करवाने का ऐतिहासिक कार्य सम्पन्न किया है, जिसके लिए वे सम्मान और शाबासी के पात्र है।"

उन्होंने कहा कि "विशेषकर विपक्षी दलों की राजनीतिक धमकियों,दुष्प्रचारों और बार बार न्यायालयींन चुनौतीयों का सामना करते हुए निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कुशलतापूर्वक पश्चिम बंगाल को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध करवाकर हिंसा मुक्त मतदान सम्पन्न करवाया। इसके लिए उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि "पश्चिम बंगाल लंबे समय से चुनावी हिंसा की चुनौतियों से जूझता रहा है। पहले वामपंथी सरकार में विचारधारा के आधार पर जो हिंसा होती थी, वही ममता बनर्जी की सरकार में उसकी ट्रू कॉपी बन गई। लगभग सभी असामाजिक तत्व सरकारी संरक्षण में सरकार का हिस्सा बन गए, जिनका मुख्य कार्य बंगाल की जनता का जनशोषण हो गया था । कानून व्यवस्था और संविधान सम्मत राज बंगाल में पूरी तरह समाप्त हो गया था ।"

सिसोदिया ने कहा कि "पश्चिम बंगाल के 2018 और 2023 के पंचायतीराज चुनाव हों, या 2021 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव, हर बार हत्या, बलात्कार, घरों पर हमले, आगजनी सहित हिंसक घटनाओं की सुर्खियां बनीं रहीं हैँ ।"

उन्होंने कहा कि "गत विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी सरकार ने भाजपा समर्थक वोटरों और उम्मीदवारों को चुनाव बाद भी कई कई महीनों तक भी निशाना बनाया। इस हिंसा के कारण विपक्षी मतदाता इतने भयभीत हुए कि लोकसभा 2024 में बड़ी संख्या में घर से निकले तक नहीं और इसका चुनावी लाभ टीएमसी नें लोकसभा सांसद संख्या बढ़ा कर लिया।"

सिसोदिया ने बताया कि "इन परिस्थितियों में इस बार चुनाव आयोग ने सुदृढ़ और योजनाबद्ध रणनीति अपनाई। केंद्रीय बलों की समयपूर्व तैनाती, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, तथा वेबकास्टिंग व रियल-टाइम मॉनिटरिंग से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनी। इससे मतदाताओं का मनोबल बढ़ा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ मतदान करते नजर आए। जिससे मतदान प्रतिशत में भी इजाफा हुआ।"

सिसोदिया ने कहा कि "2018 से 2024 तक की हिंसक पृष्ठभूमि के मुकाबले वर्तमान चुनाव, मतदान सम्पन्न होने तक, कुशल प्रबंधन और सुदृढ़ व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह लोकतंत्र में विश्वास की पुनर्स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके लिए चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की टीम सम्मान और शाबाशी की हकदार है।"

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
9414180151


पश्चिम बंगाल में हाल के वर्षों में हुए विधानसभा, पंचायतीराज और लोकसभा चुनावों में हिंसा का ब्यौरा नीचे दिया गया है। राज्य में चुनावी हिंसा की घटनाएं मतदान के दौरान और नतीजों के बाद, दोनों समय देखी गई हैं।

1. विधानसभा चुनाव (2021)2021 के विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल के इतिहास के सबसे हिंसक चुनावों में से एक माने जाते हैं। हिंसा की घटनाएं: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चुनाव के दौरान हिंसा की लगभग 1,300 घटनाएं हुईं।मृत्यु और हताहत: विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, चुनावी और चुनाव के बाद की हिंसा में 17 से 58 लोगों की मौत हुई।शीतलकुची घटना: चौथे चरण के दौरान कूचबिहार के शीतलकुची में सुरक्षा बलों की फायरिंग में 4 लोगों की मौत हो गई थी।चुनाव बाद की हिंसा (Post-Poll Violence): नतीजों के बाद व्यापक आगजनी, हत्या और मारपीट की घटनाएं हुईं, जिसकी जांच बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर CBI को सौंपी गई।

2. पंचायतीराज चुनाव (2018 और 2023)पंचायत चुनावों में हिंसा का स्तर अक्सर विधानसभा या लोकसभा से भी अधिक रहा है क्योंकि यह स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई होती है।2023 पंचायत चुनाव: इसे "हाल के इतिहास का सबसे हिंसक स्थानीय चुनाव" कहा गया।मृत्यु: चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुल 45 से 55 लोगों की मौत हुई। केवल मतदान के दिन ही 12 से 18 लोग मारे गए थे。अन्य घटनाएं: मतपेटियों में आग लगाना, उन्हें पानी में फेंकना और बमबारी जैसी घटनाएं बड़े पैमाने पर हुईं।

2018 पंचायत चुनाव: इस दौरान भी लगभग 23 से 30 लोगों की मौत की खबरें आई थीं और 34% सीटों पर सत्तारूढ़ दल ने निर्विरोध जीत हासिल की थी, जिसके पीछे विपक्षी उम्मीदवारों को डराने-धमकाने के आरोप लगे थे।

3. लोकसभा चुनाव (2019 और 2024)2024 लोकसभा चुनाव: भारी संख्या में केंद्रीय बलों (CAPF) की तैनाती (लगभग 900+ कंपनियां) के कारण 2023 के मुकाबले हिंसा में कमी आई, फिर भी कुछ घटनाएं दर्ज की गईं।घटनाएं: दक्षिण 24 परगना के कुलतली में भीड़ ने EVM मशीन को तालाब में फेंक दिया था। चुनाव के दौरान और बाद में 6 से 10 मौतों की सूचना मिली。

2019 लोकसभा चुनाव: सात चरणों में हुए इस चुनाव में गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 693 हिंसक घटनाएं और 11 से 15 मौतें दर्ज की गई थीं। चुनाव के बाद के छह महीनों में भी हिंसा जारी रही, जिसमें 60 से अधिक लोगों की जान गई。

निष्कर्ष तालिका:
चुनाव का प्रकार  /मुख्य हिंसक घटनाएं/अनुमानित मौतें/मुख्य कारण/स्थान
1- 2021 विधानसभा/1,300+ घटनाएं, शीतलकुची फायरिंग17 - 58/ चुनाव परिणाम के बाद की प्रतिशोधात्मक हिंसा

2- 2023 पंचायत / मतपेटियों की लूट, व्यापक बमबारी /45 - 55ग्रामीण इलाकों में वर्चस्व की जंग

3- 2024 लोकसभा EVM को तालाब में फेंकना, छिटपुट झड़पें / 6 - 10केंद्रीय बलों की तैनाती से बड़े पैमाने पर बचाव 




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