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शारदीय नवरात्री-नवदुर्गा : नौ रूपों का पूजन Maa Durga

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शारदीय नवरात्रा का प्रारम्भ आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापन के साथ होता है. कलश को हिन्दु विधानों में मंगलमूर्ति गणेश का स्वरूप माना जाता है अत: सबसे पहले कलश की स्थान की जाती है. कलश स्थापन के लिए भूमि को सिक्त यानी शुद्ध किया जाता है. भूमि की सुद्धि के लिए गाय के गोबर और गंगाजल से भूमि को लिपा जाता है. विधान के अनुसार इस स्थान पर सात प्रकार की मिट्टी को मिलाकर एक पीठ तैयार किया जाता है, अगर सात स्थान की मिट्टी नहीं उपलब्ध हो तो नदी से लायी गयी मिट्टी में गंगोट यानी नदी की मिट्टी मिलाकर इस पर कलश स्थापित किया जा सकता है | नवरात्री-नवदुर्गा : नौ रूपों का पूजन नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों (कुमार, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते हैं। वासन्तिक नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है। माता के इन नौ रूपो...