कविता - हार को भी सीख बनाए जा
कदम–कदम साहस बढ़ाए जा, हर बाधा से आँख मिलाए जा। तूफ़ानों से मत घबरा तू, अपने भीतर आग जगाए जा। विजयी मन बनाए जा, हार को भी सीख बनाए जा। ===1== जीत का जो जुनून जले, उसमें धैर्य भी मिलाए जा। रास्ते कठिन, अँधेर घने, पर सूर्य तुझमें ही बसता है। जो रुक गया, वो खो गया, जो चला, वही इतिहास रचता है। जीता तो यश तुझे गले लगाए, हारा तो भी तू अमर कहलाए। क्योंकि जिसने भरपूर जिया, वही हर दिल में याद रह जाए। मत पूछ मंज़िल कितनी दूर, बस आज से कल को बेहतर कर। हर दिन खुद से जीत हासिल कर, और खुद पर पूरा भरोसा कर। बढ़ता जा, बढ़ता जा, अपने स्वप्नों को सच बनाए जा। विजयी मन बनाए जा, विजयी मन बनाए जा।