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४ कविताऐ : - अरविंद सिसोदिया

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राम कृष्ण जैसे वीरों से इस धरती ने जीना सीखा है। राणा और शिवा ने इसे अपनी वीरता से सींचा है, युग युग से हमारे पुरखों की गौरव गाथायें ,  मार्ग हमारा  प्रशस्थ करती आईं हैं । लक्ष्मीबाई और दुर्गावति की इस धरा ने जीत हमेशा ही पाई है। बलिदानी संतानों की मातृभूमि भारत ने अमर नित्य होने की वर पाई हे। जय हिन्द !! जय गणतंत्र दिवस !!  ४ कविताऐ : - अरविंद सिसोदिया  मझधार जीवन है .., -  http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2011/04/blog-post_19.html निः शब्द के शब्द - http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2011/04/blog-post_01.html देख न लेना नीचे झुक कर; गांधी हिन्दुस्तान को -  http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2010/10/blog-post_04.html करूण कहानी विभाजन बनाओ अखंड  भारती .....! -  http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2010/08/blog-post_18.html

Double Citizenship...? : Is it allowable under Indian constitution....? : Cardinal Alencherry

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- अरविन्द सिसोदिया             केरल के मूल निवासी 66 वर्षीय आर्चबिशप जॉर्ज एलेंचेरी को गत सप्ताह “वेटिकन” के राष्ट्र प्रमुख और ईसाईयों के पोप ने कार्डिनल की पदवी प्रदान की। वेटिकन में की गई घोषणा के अनुसार सोलहवें पोप बेनेडिक्ट ने 22 नए कार्डिनलों की नियुक्ति की है। रोम (इटली) में 18 फ़रवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में एलेंचेरी को कार्डिनल के रूप में आधिकारिक शपथ दिलाई जाएगी।          जॉर्ज एलेंचेरी, कार्डिनल नियुक्त होने वाले ग्यारहवें भारतीय हैं। वर्तमान में भारत में पहले से ही दो और कार्डिनल कार्यरत हैं, जिनका नाम है रांची के आर्चबिशप टेलीस्पोर टोप्पो एवं मुम्बई के आर्चबिशप ओसवाल्ड ग्रेसियस। हालांकि भारत के ईसाईयों के लिये यह एक गौरव का क्षण हो सकता है, परन्तु इस नियुक्ति (और इससे पहले भी) ने कुछ तकनीकी सवाल भी खड़े होते रहे हैं।             जैसा कि सभी जानते हैं, “वेटिकन” अपने आप में एक स्वतन्त्र राष्ट्र है, जिसके राष्ट्र प्रमुख पोप होते हैं। इस दृष्टि से पोप सिर्फ़ एक धर्मगुरु नहीं हैं, बल्कि उनका दर्जा एक राष्ट्र प्रमुख के बराबर है, जैसे अमेरिका या भारत के राष्ट्रपति। अब सवा

मैथिलीशरण गुप्त : नर हो, न निराश करो मन को

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राष्ट्रकवी  मैथिलीशरण गुप्त   नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो कुछ तो उपयुक्त करो तन को नर हो, न निराश करो मन को संभलों कि सुयोग न जाय चला कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपना पथ आप प्रशस्त करो अपना अखिलेश्वर है अवलंबन को नर हो, न निराश करो मन को जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो उठके अमरत्व विधान करो दवरूप रहो भव कानन को नर हो न निराश करो मन को निज़ गौरव का नित ज्ञान रहे हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे मरणोंत्‍तर गुंजित गान रहे सब जाय अभी पर मान रहे कुछ हो न तज़ो निज साधन को नर हो, न निराश करो मन को प्रभु ने तुमको दान किए सब वांछित वस्तु विधान किए तुम प्राप्‍त करो उनको न अहो फिर है यह किसका दोष कहो समझो न अलभ्य किसी धन को नर हो, न निराश करो मन को किस गौरव के तुम योग्य नहीं कब कौन तुम्हें सुख भोग्य नहीं जान हो तुम भी जगदीश्वर के सब है जिसके अपने घर के फिर दुर्लभ क्या उसके जन को नर हो, न

जवाहर लाल नेहरू : बिशनचंद्र सेठ

= सौजन्य: युधवीर सिंह लाम्बा बहुत से लोगों का विचार है कि जवाहर लाल नेहरू ने अन्य नेताओं की तुलना में भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत कम योगदान दिया था। फिर भी गांधीजी ने उन्हे भारत का प्रथम प्रधानमंत्री बना दिया। स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक भारतीय लोकतंत्र में सत्ता के सूत्रधारों ने प्रकारांतर से देश में राजतंत्र चलाया, विचारधारा के स्थान पर व्यक्ति पूजा को प्रतिष्ठित किया और तथाकथित लोकप्रियता के प्रभामंडल से आवेष्टित रह लोकहित की पूर्णत: उपेक्षा की। अपनी अहम्मन्यता को बाह्य शिष्टता के आवरण में छिपाकर हितकर परामर्श देने वालों की बात अनसुनी कर दी तथा अपने आसपास चाटुकारों की सभाएं जोड़कर स्वयं को देवदूत घोषित करवाते रहे और स्वयं अपनी छवि पर मुग्ध होते रहे। भारत की बहुत सी समस्याओं के लिये नेहरू को जिम्मेदार माना जाता है। इन समस्याओं में से कुछ हैं: • लेडी माउंटबेटन के साथ नजदीकी सम्बन्ध • भारत का विभाजन • कश्मीर की समस्या • चीन द्वारा भारत पर हमला • मुस्लिम तुष्टीकरण • भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिये चीन का समर्थन • भा