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कविता - जौहर की ज्वालायें कहतीं,शत्रु को शत्रु मानों भारत - अरविन्द सिसौदिया

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   जौहर की ज्वालायें कहतीं,शत्रु को शत्रु मानों भारत - अरविन्द सिसौदिया जौहर की ज्वालायें कहतीं,उठो भारत, जागों भारत,राष्ट्रधर्म संभालों भारत। अटल सत्य को पहचानों,शत्रु को शत्रु मानों भारत। -1- करूणा,दया और अहिंसा की बातें हैं बेमानी, शौर्य,शक्ति और बलिदानों से लिखी जाती विजयी कहानी, जीवन क्षण भंगुर है,मौत तो है आनी जानी, राष्ट्र और धर्म की अक्क्षुण्यता पर बलिदान हो जवानी । शत्रु को शत्रु मानों, मत धोका खाओ प्राणी । वीर बनों, वीरों की तरह अडो - लडो, यह देश हमारी शानी । .. जौहर की ज्वालायें कहतीं,उठो भारत, जागों भारत,राष्ट्रधर्म संभालों भारत। अटल सत्य को पहचानों,शत्रु को शत्रु मानों भारत। ... फूट,लालच और भय में गुलामी को ढोया, अपनों के सिर काटे और अपनों को ही खोया, अब भी समय है सच को पहचानों, देश बचाओ, धर्म बचाओं,शत्रु को है भगाना, झूठी बातों के चक्रब्यूह से बाहर निकलों , मत बनों चारा,सगे भाई से होता है, भाई चारा, .. जौहर की ज्वालायें कहतीं,उठो भारत, जागों भारत,राष्ट्रधर्म संभालों भारत। अटल सत्य को पहचानों,शत्रु को शत्रु मानों भारत। .. सिखों के गुरूओं से पूछो क्या क्या जुल्म हु...

ग्वालियर के प्रतिहार क्षत्रिय : जौहर की ज्वालायें सुनाती वीर गाथायें

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-----> ग्वालियर का प्रतिहार क्षत्रिय वंश < -----  आज हम आप लोगो को ग्वालियर के प्रतिहार वंश एवं उनके संघर्ष की कहानी बतायेंगे। जब तुर्कों के आक्रमण से परिहार रानी तोंवरी देवी को जौहर करना पडा था। जिसमे उनके साथ 1500 से ऊपर राजपूत महिलाएं भी थी।। ग्वालियर पर प्रतिहार क्षत्रियों ने लगभग 150 वर्ष शासन किया है। यहां के प्रतिहार कन्नौज के प्रतिहारो के सामंत के रुप मे कार्य करते थे और इन्ही के भाई परिवार थे। ग्वालियर पर नागभट्ट द्वितीय ने सन 795 ईस्वी मे ग्वालियर दुर्ग का निर्माण करवाया था। कुछ दिनो के बाद दुर्ग की हालत खराब हो रही थी तब सन 850 ईस्वी मे मिहिरभोज प्रतिहार ने ग्वालियर को अपने साम्राज्य कन्नौज की उपराजधानी बनाया और ग्वालियर दुर्ग को सजाया और संवारा। इस विशाल राजप्रसाद को बागों झरनों से सुसज्जित किया एवं रानियों के लिए अनेक बिहार स्थल भी बनवाये। मिहिरभोज के शासनकाल में उसका नाती किट्टपाल परिहार किले का रक्षक था। सन 1036 ईस्वी में कन्नौज का सम्राट यशपाल था तभी महमूद गजनवी ने कन्नौज पर आक्रमण करके उसे नष्ट कर दिया। प्रतिहार लोग कन्नौज छोडकर " बारी " चले गये थे। इस...