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एलियन्स : हिन्दू धर्म में कई लोकों के बारे में उल्लेख Aliens UFOs and Hindutv

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कृष्णयुग की रेवती वाली कथा कई प्रश्नों का उत्तर है :- महाराज रैवत की पुत्री रेवती से बलराम जी का विवाह हुआ था।रेवती के गर्भ से बलराम जी ने दो पुत्र उत्पन्न किये थे जिनके नाम निशठ और उल्मुक थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा रेवत द्वापरयुग के प्रारंभ मे अपनी पुत्री रेवती के लिए उचित वर जानने के लिए ब्रह्म लोक गये थे। वे और उनकी पुत्री बहुत बड़े शरीर वाले मनुष्य थे। ब्रह्म लोक मे ब्रह्मा जी एक कार्यक्रम में व्यस्त थे, जब वे उससे निवृत होकर राजा रेवंत से मिले और रेवंत ने डनहे अपनी समस्या बताई कि पुत्री रेवती के लिये योग्य वर नहीं मिल पा रहा है। तब ब्रह्मा जी ने बताया कि पृथ्वी पर तो बहुत समय बीत गया , आप जिन लोगों को ठोड कर आये थे वे मर खप गये है। तब ब्रह्मा जी ने उपाय बताया कि अब भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी पुत्री रेवती के लिए श्रेष्ठ वर हैं।उनका शरीर भी सामान्य से अधिक है। परन्तु सहस्त्रों वर्ष बीतने के कारण पृथ्वी पर मनुष्यों के कद छोटे हो चुके हैं। परंतु बलराम जी समर्थ हैं, वहाँ जाकर उनसे अपनी पुत्री का विवाह कर दें। पिता पुत्री दोनों पृथ्वी पर आकर बलराम जी से मिल...

दुनिया भर की धार्मिक संस्कृति में हिन्दू धर्म की झलक World Sanatan Dharma

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  Glimpses of Hinduism in religious culture around the world दुनिया भर की धार्मिक संस्कृति में हिन्दू धर्म की झलक duniya bhar kee dhaarmik sanskrti mein hindoo dharm kee jhalak सनातन धर्म के 90 हजार से भी ज्यादा वर्षों के लिखित इतिहास में लगभग 20 हजार वर्ष पूर्व नए सिरे से वैदिक धर्म की स्थापना हुई और नए सिरे से सभ्यता का विकास हुआ । विकास के इस प्रारंभिक क्रम में हिमयुग की समाप्ति के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला । वेद और महाभारत पढ़ने पर हमें पता चलता है कि आदिकाल में प्रमुख रूप से ये जातियां थीं - देव, दैत्य, दानव, राक्षस, यक्ष, गंधर्व, भल्ल, वसु, अप्सराएं, रुद्र, मरुदगण, किन्नर, नाग आदि ।    In the written history of more than 90 thousand years of Sanatan Dharma, about 20 thousand years ago, a new Vedic religion was established and a new civilization developed. In this early course of development, events changed rapidly after the end of the Ice Age. On reading the Vedas and Mahabharata, we come to know that in the early times there were mainly these cast...

भारतवासी भूल गए अपना खुद का हिन्दू नववर्ष Hindu New Year

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    Indians forgot their own New Year भारतवासी भूल गए अपना खुद का नववर्ष bhaaratavaasee bhool gae apana khud ka navavarsh *🚩भारतवासी भूल गए खुद का नववर्ष, आ रहा है 2 अप्रैल को, ऐसे करें तैयारी* *🚩हिन्दू धर्म पृथ्वी के उद्गम से ही है और सबसे सर्वश्रेष्ठ धर्म है; परंतु दुर्भाग्य की बात है कि हिन्दू ही इसे समझ नहीं पाते। पाश्चात्य कल्चर को योग्य और अधर्मी कृत्यों का अंधानुकरण करने में ही अपने आप को धन्य समझते हैं । 31 दिसंबर की रात में नववर्ष का स्वागत और 1 जनवरी को नववर्षारंभ दिन मनाने लगे हैं।* *🚩 अंग्रेजी कालगणना ने इस वर्ष अपने 2022 वें वर्ष में पदार्पण किया है, जबकि हिन्दू कालगणना के अनुसार इस चैत्र शुक्ल 1 खर्व 15 निखर्व, 55 खर्व, 21 पद्म (अरब) 93 करोड़ 8 लाख 53 सहस्र 124 वां वर्ष आरंभ हो रहा है।* (टिप्पणी : 1 खर्व अर्थात 10,00,00,00,000 वर्ष (हजार करोड़ या वर्ष) और 1 निखर्व अर्थात 1,00,00,00,00,000 वर्ष (दस हजार करोड़ वर्ष) 🚩 *नव संवत्सर 2079 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 2 अप्रैल 2022 से प्रारंभ हो रहा है यही हिन्दुओं का नया वर्ष है, इसे धूमधाम से जरूर मनाएं।*   *🚩चैत्र शु...

हिन्दू जीवन - अलौकिक आनन्द की सिद्धी Hindu way of life

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 हिन्दू जीवन पद्यती अलौकिक आनन्द की सिद्धी Hindu way of life Siddhi of supernatural bliss  हिंदू जीवन पद्धति नें आनंद को, सुख को, उत्साह को, संतोष को, सुरक्षा को, सिद्ध किया है और इसी कारण से यह जीवन पद्धति लाखों - करोड़ों वर्षों से प्रकृति के हर तरह के संकटों से,झंझावतों से,समस्याओं से , संकटों से संघर्ष करते हुए, जूझते हुए गतिमान है । The Hindu way of life has proved to be bliss, happiness, enthusiasm, contentment, security, and for this reason this way of life has been proved for millions - crores of years from all kinds of troubles, storms, problems, crises of nature. Fighting, battling, moving. जीवन के वे सभी तत्व जिनसे जीवन की आधारभूत सुख सुविधाओं में स्थिरता , निरन्तरता और अभिवर्धन होता है । वह सभी अपनाया जीवन का अंग बनाया अर्थात जीवन को दिशा देते हुये उसमें गुणवत्ता एवं व्यवस्था के आदर्शों की स्थापना एवं संकलन ही हिन्दू की विशेषता है। उसे जीवन का बंधन बना कर अक्क्ष्णुय रखना ही धर्म है । धर्म की परिभाषा यही है कि हमने अपनी अपनी भूमिका में जो अपने अपने कर्तव्य धारण कर रखे...

विश्वभर में फैला हुआ था हिन्दू धर्म

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ये 10 सबूत बताते हैं कि विश्वभर में फैला हुआ था हिन्दू धर्म http://www.interest2life.com हिन्दू धर्म के 90 हजार से भी ज्यादा वर्षों के लिखित इतिहास में लगभग 20 हजार वर्ष पूर्व नए सिरे से वैदिक धर्म की स्थापना हुई और नए सिरे से सभ्यता का विकास हुआ। विकास के इस प्रारंभिक क्रम में हिमयुग की समाप्ति के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। वेद और महाभारत पढ़ने पर हमें पता चलता है कि आदिकाल में प्रमुख रूप से ये जातियां थीं- देव, दैत्य, दानव, राक्षस, यक्ष, गंधर्व, भल्ल, वसु, अप्सराएं, रुद्र, मरुदगण, किन्नर, नाग आदि। प्रारंभ में ब्रह्मा और उनके पुत्रों ने धरती पर विज्ञान, धर्म, संस्कृति और सभ्यता का विस्तार किया। इस दौर में शिव और विष्णु सत्ता, धर्म और इतिहास के केंद्र में होते थे। देवता और असुरों का काल अनुमानित 20 हजार ईसा पूर्व से लगभग 7 हजार ईसा पूर्व तक चला। फिर धरती के जल में डूब जाने के बाद ययाति और वैवस्वत मनु के काल और कुल की शुरुआत हुई। दुनियाभर की प्राचीन सभ्यताओं से हिन्दू धर्म का कनेक्शन था। संपूर्ण धरती पर हिन्दू वैदिक धर्म ने ही लोगों को सभ्य बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्र...