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मोदीजी के ध्यान योग का विपक्षी विरोध, वोट बैंक साधनें की नौटंकी - अरविन्द सिसोदिया

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  मोदीजी  के  ध्यान योग का विपक्षी विरोध,  वोट बैंक साधनें की नौटंकी - अरविन्द सिसोदिया भारत के प्रधानमंत्री लगभग प्रत्येक आम चुनाव के बाद किसी पवित्र स्थल पर बैठ कर ध्यान लगाते हैं, जिसे मौन भी कहा जाता है। गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है चिन्तन में वह मौन है। अर्थात मौन रह कर ध्यान लगानें से व्यक्ति किसी विषय विशेष पर गहराई से सोच सकता है। यह साधना सनातन हिन्दू धर्म की महान खोज है, जिसे पूरे विश्व नें कम ज्यादा अपनाया है। मोदी जी ने 2019 में आखिरी फेज की वोटिंग से पहले केदारनाथ की रुद्र गुफा में 17 घंटे ध्यान लगाया था। हलांकि विपक्ष की यह सब चुनावी नौटंकी है, मतदान के दिन भी मीडिया राजनेताओं के साथ रहता उसका सीधा प्रसारण भी होता है। मतदान के दिन लगभग सभी प्रत्याशी पहले किसी मंदिर या पवित्र स्थल पर जाते है। फिर वोट डालते है। जब वोटिंग वाले दिन तक मीडिया को अनुमती है तो ध्यान योग में मीडिया पर रोक कैसे हो सकती है।  कुल मिला कर भाजपा के नेतृत्व में हिन्दुत्व के उत्थान चाहनें वाले लोगों का समूह है तो कांग्रेस के नेतृत्व में हिन्दुत्व को समाप्त करनें की आकांक्षा रखन...

जोशीमठ : पर्याप्त मुआबजा,जलरिवास रोकें एवं एक नया शहर भी बसायें joshimath

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निश्चित रूप से हिमालय में कुछ चल रहा है। निरंतर चलता रहता भी है। यूं भी हिमालय के बारे में कहा जाता है कि वह प्रतिवर्ष कुछ ऊंचा होता जा रहा है। कोई कहता है कि यह नीचा होता जा रहा है। कहीं कही यह बात आती है कि इसके पहाड़ बहुत ही कच्चे हैं। हाल ही में केदारनाथ दुखान्तकी और धारादेवी प्रकरण हमनें देखा भी है। इससे पहले महानदी सरस्वती के भूगर्भ में समा जाने का वृतांत भी हमारे सामने है। पृथ्वी के आंतरिक क्रियाकलापों के बारे में अब विज्ञान ने बहुत कुछ उजागर किया भी है। पृथ्वी की सतह की ही तरह अन्दर भी एक अलग दुनिया हैं, बड़ी बड़ी प्लेटों पर बाहरी पृथ्वी टिकी हुई है। जरा सी आंतरिक खिसका खिसकी या स्थान परिवर्तन पर बडे बडे भूकंप आ जाते हैं, तबाही हो जाती है। इसलिए हिमालय एक संवेदनशील क्षेत्र तो है ही किन्तु वह भारतीय संस्कृति का उद्गम और भारत का सुरक्षा कवच भी है। जोशीमठ और उसके आसपास के जगहों में आंतरिक भूस्खलन या भूगर्भीय जल रिसाव के किन्हीं कारणों से मकानों का धंसना और असुरक्षित होना लगातार पाया जा रहा है। लोगों के जीवन को खतरा उत्पन्न हो गया है। पुराणों अनुसार भूकंप, जल प्रलय और सूखे के ...