चूहे की लड़ाई हाथी से ,खुदरा व्यापर क्षैत्र में बहुराष्ट्रीय व्यापार कंपनियों को प्रवेश
- अरविन्द सिसोदिया कई दशकों पहले एक गीत बजता था..दिए की लड़ाई हे तूफान से .., मगर सच यही हे की दिए की लड़ाई कभी तूफान से हुई ही नहीं ..,क्यों की मात्र एक छोंके ने ही दिए को बुछा दिया..., कोंगेस की वर्तमान केंद्र सरकार तो अब लगनें लगी हे की वह भारत की नहीं अमरीका की सरकार हे...! पहले भी यु पी ए १ में यही सरकार अमरीकी हितों के परमाणु बिल को पास करानें के लिए अपने ही गठबंधन से धोका करती हे..नोटों से सरकार बचाती हे...! इस बार इस सरकार ने अमरीकी और यूरोपीय हितों के लिए एकल ब्रांड में १०० प्रतिशत तक और मल्टी ब्रांड में ५१ प्रतिशत तक निवेश की अनुमति देकर देश को नए तरीके से गुलामी में फंसा दिया हे...यही कर्ण हे की पुरे भारत में एक सुर में खुदरा व्यापर क्षैत्र में बहुराष्ट्रीय व्यापार कंपनियों को प्रवेश दिए जाने का विरोध हो रहा हे..., वहीं अमरीका में भारत के इस कदम का स्वागत हो रहा हे ...यानीं की वे प्रशन्ना हें की भारतीय छोटे व्यापारियों के हितों को छिनने का अवसर मिलेगा. इन बहु राष्ट्रिय कंपनियों का आकर प्रकार और क्षमताएं इस तरह की हें की छोटा व्यापारी या दुक...