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विश्व व्यापी है हिन्दुओँ का वैदिक कालीन होली पर्व Holi festival of Vedic period is world wide

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Holi festival of Vedic period is world wide विश्व व्यापी  है हिन्दुओँ का वैदिक कालीन होली पर्व   होली महोत्सव ,होली विषय पर जानकारी परक लेख होली का त्यौहार है ,प्यार और मनुहार का,रंगों का साथ है ,अबीर और गुलाल का । होली हिन्दुओँ  का वैदिक कालीन पर्व है । इसका प्रारंभ कब हुआ , इसका कहीं उल्लेख  या कोई आधार नहीं मिलता है । परन्तु वेदों एवं पुराणों  में भी इस त्यौहार के प्रचलित होने का उल्लेख मिलता है । प्राचीन काल में होली की अग्नि में हवन  के समय वेद मंत्र  “ रक्षोहणं बल्गहणम “ के  उच्चारण का वर्णन आता है। होली पर्व को भारतीय तिथि पत्रक के अनुसार वर्ष का अन्तिम  त्यौहार कहा जाता है । यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को संपन्न होने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है ।  इस अवसर पर बड़े -बूढ़े ,युवा -बच्चे, स्त्री-पुरुष सबमे ही जो उल्लास व उत्साह होता है, वह वर्ष भर में होने वाले किसी भी उत्सव में दिखाई नहीं देता है ।  कहा जाता है कि  प्राचीन काल में इसी फाल्गुन पूर्णिमा से प्रथम चातुर्मास सम्बन्धी “वैश्वदेव “ नामक यज्ञ का प्रारंभ होता ...

होली आपसी सदभाव, प्रेम की प्रगाढ़ता का पर्व

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होली आपसी सदभाव, प्रेम और स्नेह की प्रगाढ़ता का पर्व Holi is the festival of mutual harmony, the intensity of love and affection.   - अरविन्द सिसोदिया 9414180151 भारत एक बहुत ही प्राचीन मानव सभ्यता का सनातन देश है । इस देश में रहने वाली मानव सभ्यता ने सदैव नूतनता को अंगीकृत किया है। अनादि काल से अनंत अनुसंधानों के द्वारा एक श्रेष्ठतम सुव्यवस्थित मानव सभ्यता की व्यवस्था की है। जिसे हम सनातन संस्कृति या हिन्दुत्व कहते हैं। इसे अंगीकृत करने वाले हिन्दू कहलाते हैं। India is the eternal country of a very ancient human civilization. The human civilization living in this country has always adopted innovation. From time immemorial, through infinite research, a best orderly human civilization has been arranged. Which we call Sanatan Sanskriti or Hindutva. Those who adopted it are called Hindus.    इस सभ्यता के विशाल कालखंड में विभिन्न प्रकार के इवेंट , आयोजन,  त्यौहार , पर्व , धार्मिक कर्मकांड आदि जुड़ते गए । इन पर्वों और त्योहारों की बड़ी संख्या हैं। Various types of events, f...

होली : नरसिंह अवतार, भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका.....

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होली की बहुत बहुत शुभ कामनाएं और बधाई ..! रंगों के इस त्यौहार का सन्देश स्पष्ट है  कि जिन्दगी बहुरंगी होनी चाहिए ..! एक रंग नीरसता को लाता है .. तो बहुरंगता विविधता के द्वारा नीरसता को तोड़ता है ..! जीवन को बहु रंगी बनायें .. जम कर होली मनाएं ..!  - अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान , भारत | 09414180151   Blog - arvindsisodiakota.blogspot.com Blog - arvindsisodiakota.blogspot.com ------ संझिप्त  में होली की कथा .....  होली के प्रचलन की अनेक कथाओं में प्रमुख है भक्त प्रहलाद , उसके पिता , बुआ और भगवान की कथा। कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक असुर था जिसका नाम था हिरण्यकश्यप। अपने बल और सामर्थ्य के अभिमान में वह स्वयं को ही भगवान मानने लगा था। उसका पुत्र प्रह्लाद बड़ा ईश्वर भक्त था।  हिरण्यकश्यप की  भारी व्यथा यह थी कि उसके घर में ही उसे विद्रोह के स्वर (धर्म-पालन और ईश्वर-भक्ति के वचन) सुनाई दे रहे थे। अर्थात प्रह्लाद की ईश्वर-भक्ति और धर्मपरायणता उसके ढोंग को नकार देते थे ..! जिससे  नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने ...

होली संपूर्ण holi festival

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*************** *  होली चिन्तन holi festival  ***************                   होली भारतीय संस्कृति की पहचान का एक पुनीत पर्व है, भेदभाव मिटाकर पारस्परिक प्रेम व सद्भाव प्रकट करने का एक अवसर है. अपने दुर्गुणों तथा कुसंस्कारों की आहुति देने का एक यज्ञ है तथा परस्पर छुपे हुए प्रभुत्व को, आनंद को, सहजता को, निरहंकारिता और सरल सहजता के सुख को उभारने का उत्सव है.                  यह रंगोत्सव हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता है जो अनेक विषमताओं के बीच भी समाज में एकत्व का संचार करता है. होली के रंग-बिरंगे रंगों की बौछार जहाँ मन में एक सुखद अनुभूति प्रकट कराती है वहीं यदि सावधानी, संयम तथा विवेक न रक्खा जाये तो ये ही रंग दु:खद भी हो जाते हैं. अतः इस पर्व पर कुछ सावधानियाँ रखना भी अत्यंत आवश्यक है.                   प्राचीन समय में लोग पलाश के फूलों से बने रंग अथवा अबीर-गुलाल, कुम -कुम- हल्दी से होली खेलते थे. किन्तु वर्त्तमान समय में रासायनिक तत्...

शमशान होली : खेले मसाने में होली शिव शंकर

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महाशमशान में शिव होली खेलते हैं। इसका आध्यात्मिक विवेचना   शमशान में होली खेलने का अर्थ समझते हैं? मनुष्य सबसे अधिक मृत्यु से भयभीत होता है। उसके हर भय का अंतिम कारण अपनी या अपनों की मृत्यु ही होती है। शमशान में होली खेलने का अर्थ है उस भय से मुक्ति पा लेना। शिव किसी शरीर मात्र का नाम नहीं है, शिव वैराग्य की उस चरम अवस्था का नाम है जब व्यक्ति मृत्यु की पीड़ा,भय या अवसाद से मुक्त हो जाता है। शिव होने का अर्थ है वैराग्य की उस ऊँचाई पर पहुँच जाना जब किसी की मृत्यु कष्ट न दे, बल्कि उसे भी जीवन का एक आवश्यक हिस्सा मान कर उसे पर्व की तरह खुशी खुशी मनाया जाय। शिव जब शरीर में भभूत लपेट कर नाच उठते हैं, तो समस्त भौतिक गुणों-अवगुणों से मुक्त दिखते हैं। यही शिवत्व है। मान्यता है कि काशी की मणिकर्णिका घाट पर भगवान शिव ने देवी सती के शव की दाहक्रिया की थी। तबसे वह महाशमशान है, जहाँ चिता की अग्नि कभी नहीं बुझती। एक चिता के बुझने से पूर्व ही दूसरी चिता में आग लगा दी जाती है। वह मृत्यु की लौ है जो कभी नहीं बुझती, जीवन की हर ज्योति अंततः उसी लौ में परम ज्योति में समाहित हो जाती है। शिव जब अपने कंधे ...