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कांग्रेस यानी, मेरे मुह से मेरी जय हो पार्टी

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- अरविन्द सीसोदिया  २ नवम्वर २०१० को हुए कांग्रेस के एक बटा दो  दिवसीय अधिवेशन, की रिपोर्टींग सुनते सुनते मेरी नींद लग गई.., नींद में मुझे दिख रहा था......मनमोहन सिंह सोनिया जी की और मुह करके संबोधित कर रहे थे कि ........  हमारा चुनावी नारा था.. जय हो..!  इसलिए हमने हर कम को जय हो तक के अंजाम तक पहुचाया ..!  जैसे --- भ्रष्टाचार की जय हो..!   सड़ते अनाज की जय हो..! संघ को  झूठा फंसाने की जय हो..! क्वात्रोची को बचाने की जय हो..! सी बी आई दुरूपयोग की जय हो..! सी बी आई से डरने वालों की जय हो..! डर कर समर्थन देने वालों की जय हो ...! विदेशी कंपनियों से  भारत लुटवाने  की जय हो..! इसाई मिशनरियों को खुश रखने की जय हो..! मुस्लिम वोट बैंक के लिए सभी घोषणाओं  की जय हो..! हिन्दुओं को हत्तोत्साहित करने की जय हो..!! महंगे  इलाज में लुटते आम आदमी की जय हो..! आम आदमी  के हाथ से दूर हो चुकी उच्च शिक्षा की जय हो ..! दो जून को सिसकते  ५० करोड़ भारतियों की जय हो..! अच्छे कपड़ों को तरसते ६० करोड़ भारतियों कि जय हो..!  बड़िया मकान को तरसते ९० करोड़ भारतियों की जय हो ..!  स्वाभिमान