पोस्ट

नवंबर 13, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कुछ तो है,सोनिया बनाम सुब्रमनियम

- अरविन्द सीसोदिया मुझे अच्छी तरह से याद है कि एक बार जब केंद्र में अटलजी की सरकार ने १ वोट से अपना बहुमत कहें दिया था तब ये ही सोनिया जी २७२ का नारा लगाते हुए देश की प्रधान मंत्री बनाने के लिए तडफ रहीं थीं....! उनका जूमला टू सेवन थू ( टू सेवन टू ) काफी लोकप्रिय हुआ था , उन्हें राष्ट्रपती ने अतिरिक्त समय भी दिया था , मगर मुलायम सिंह के इंकार  के कारण वे प्रधानमंत्री नहीं बन पाई थीं , जिसका बदला वे आज तक भी निकलती रहती हैं ...!! दूसरा घटना क्रम वाजपेयी सरकार के घटक दलों के कमजोर प्रदर्शन के कारण स्पष्ट बहेत नहीं मिला था ओर कम्युनिस्ट समर्थन से कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में थी , तब डॉ. सुब्रमनियम स्वामी , सोनिया जी को प्रधाम मंत्री बनाने से रोकने के लिए काफी प्रयत्न शील थे , उन्होंने तब राष्ट्रपती महोदय को भी गुहार की थी , हालांकी इस मामले में सब गोपनीय ही रहा कि सोनिया जी राष्ट्रपती भवन प्रधानमंत्री बनाने गईं और त्याग की मूर्ती बन कर क्यों लौटी ........! संभवतः यह वह बात है जो कभी बहार नहीं आयेगी...! मगर उस समय चर्चा यही थी कि डॉ. सुब्रमनियम स्वामी के कागजों में दम है ...! उनकी