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वाराणसी के “सचल विश्वनाथ” त्रैलंग स्वामी की अनूठी बातें

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        जानिये ‘वाराणसी के विश्वनाथ’ त्रैलंग स्वामी के बारे में अनूठी बातें By shyamala - December 6, 2020 त्रिलंगा स्वामी, जिन्हें तैलंग स्वामी या तेलंग स्वामी या त्रैलंग स्वामी के नाम से भी जाना जाता है। (जन्म – 1607 – मृत्यु 1887) , इनका मठवासी नाम स्वामी गणपति सरस्वती था। वह एक हिंदू योगी थे और अपनी रहस्यवादी आध्यात्मिक शक्तियों के लिए प्रसिद्ध थे। जीवन के उत्तरार्ध में इन्होंने वाराणसी में निवास किया। इनकी पश्चिम बंगाल में भी बड़ी मान्यता है, जहां यह अपनी यौगिक एवं आध्यात्मिक शक्तियों तथा लंबी आयु के लिए प्रसिद्ध रहे। कुछ लेखों के अनुसार त्रिलंगा स्वामी की आयु लगभग 300 वर्ष रही। जिसमें इन्होंने वाराणसी में लगभग (1737 – 1887), 150 वर्ष का समय व्यतीत किया। कुछ लोग इन्हें भगवान शिव का अवतार भी मानते थे। श्री रामकृष्ण ने इन्हें वाराणसी के “सचल विश्वनाथ” (चलते फिरते शिव) की उपाधि भी दी थी। त्रैलंग स्वामी का जन्म तैलंग स्वामी का जन्म आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में कुंभिलपुरम (जिसे अब पुसतिरेगा तहसील की कुमिली के नाम से जाना जाता है) नामक स्थान में हुआ था। इनके माता-पिता दोनों बहुत बड

मोदी सरकार ने देश के अंदर आतंकवाद पर लगाई लगाम

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     कांग्रेस के भी किसी नेता पर पाकिस्तानी आतंकवादियों के हमले नहीं हुये है। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुये आतंकी हमले नरेंद्र मोदी vs मनमोहन सिंह: किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में हुए सबसे ज्यादा आतंकी हमले बात अगर मोदी बनाम मनमोहन सरकार की करें, तो गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 2014-18 के बीच कश्मीर में आतंकी हमले काफी हद तक कम हुए हैं। पुलवामा में 14 फरवरी को आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। कश्मीर में इस तरह की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं, हालांकि भारत के तेवर देख पड़ोसी मुल्क की हिम्मत जरूर कम हुई है। साल 2016 में मोदी सरकार में सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। इस दौरान उरी हमले में शहीद 19 सैनिकों का बदला लेते हुए भारत ने पाकिस्तान में घुसकर 40 आतंकियों सहित 9 जवानों को भी मौत के घाट उतार दिया। 2004-13 बनाम 2014-18:साल 2004 से 2018 के बीच कश्मीर में कुल 11,447 आतंकी हमले हुए, जिसमें 1,394 जवानों ने देश के नाम अपनी कुर्बानी दे दी। बात अगर 2004-2013 की करें, तो इस दौरान 9,739 आतंकी हमलों में 1,055 सैनिक शहीद हुए। यूपीए-1 बनाम यूपीए-2:साल 200