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प्रथम गुरू मां ही होती हैं

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      महर्षि दयानंद ने कहा था- जिस तरह माता संतानों को प्रेम देती है और उनका हित करना चाहती है, उस तरह और कोई नहीं करता।  बच्चे के प्रति माता का यह स्नेह परमात्मा का प्रकाश है। मातृत्व को इस धरती पर देवत्व का रूप हासिल है। माता त्याग की प्रतिमूर्ति है। अपनी आवश्यकताओं, इच्छाओं, सुख-सुविधाओं तथा आकांक्षाओं का त्याग कर वह अपने परिवार को प्रधानता देती है। हमारी जन्मभूमि भी हमारी माँ है, जो सब कुछ देकर भी हमारी प्रगति से प्रसन्न होती है।    प्रथम गुरू मां "अथ शिक्षा प्रवक्ष्यामः मातृमान् पितृमानाचार्यवान पुरूषो वेदः।" अर्थात्, जब तीन उत्तम शिक्षक, एक माता, दूसरा पिता और तीसरा आचार्य हो तभी मनुष्य ज्ञानवान होगा।       बच्चा जन्म लेने के बाद जब बोलना सीखता है तब वह सबसे पहले जो शब्द बोलता है वो शब्द होता है "मां"। एक मां ही बच्चे को बोलना, खाना-पीना, चलना-फिरना आदि सिखाती है इसलिए एक मां ही हर मनुष्य की प्रथम गुरु होती है।       माता से ही बच्चा संस्कार ग्रहण करता है। माता के उच्चारण व उसकी भाषा से ही वह भाषा-ज्ञान प्राप्त करता है। यही भाषा-ज्ञान उसके संपूर्ण जीवन का आधार

भारतीय क्रांति के जनक : बाल गंगाधर तिलक

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   भारतीय क्रांति के जनक : बाल गंगाधर तिलक   'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा' - बाल गंगाधर तिलक    बाल गंगाधर तिलक विवरण जानकारीबाल गंगाधर तिलक, एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। ये भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता हुए; ब्रिटिश औपनिवेशिक प्राधिकारी उन्हें "भारतीय अशान्ति के पिता" कहते थे। उन्हें, "लोकमान्य" का आदरणीय शीर्षक भी प्राप्त हुआ, जिसका अर्थ हैं लोगों द्वारा स्वीकृत । । विकिपीडिया जन्म की तारीख और समय: 23 जुलाई 1856, चिखाली मृत्यु की जगह और तारीख: 1 अगस्त 1920, मुम्बई पत्नी: सत्यभामा (विवा. 1871–1920) माता-पिता: पार्वती बाई गंगाधर, श्री गंगाधर तिलक शिक्षा: गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई (1878–1879), डेक्कन कॉलेज (1873–1877)  अन्याय विरोधी थे बाल गंगाधर तिलक, पत्रकारिता के माध्यम से किया था लोगों को जागृत महान क्रांतिकारियों में से एक बाल गंगाधर तिलक का जन्म इसी दिन हुआ था। बाल गंगाधर तिलक ने भारत को आजाद कराने में अपना पूरा जीवन लगा दिया। वास्तव में, बाल गंगाधर तिलक ने