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सबल समाज से अच्छे-अच्छे उद्दण्ड कांपते हैं - वीर सावरकर

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विनायक दामोदर सावरकर  (जन्म: 28 मई 1883 - मृत्यु: 26 फ़रवरी 1966) २६ फरवरी, वीर सावरकर की पुण्यतिथि / जयंती पर विशेष सबल समाज से अच्छे-अच्छे उद्दण्ड कांपते हैं Strong society - अरविन्द सीसौदिया नामर्दी के बुतों को चौराहों से उतार फैंकना होगा, देश को दिशा दे सकें, वें तस्वीरें लगानी होगी। उन विचारों को खाक पढ़े, जो कायरता में डूबे हों, पढें वह,जो ज्वालामुखी सा तेज हर ललाट पर लाये। स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों की भूमिका न केवल महत्वपूर्ण थी, अपितु अंग्रेजों की असल नींद हराम  इसी रास्ते पर चले महान योद्धाओं ने की थी। स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर इस यशस्वी श्रृंखला की एक प्रमुख कडी थे। उनके ओजस्वी लेखन से ब्रिटिश सरकार कांपती थी। उन्हंे राजद्रोह के अपराध में, दो जन्मों की कैद की सजा सुनाई गई थी, अर्थात कम से कम 50 वर्ष उन्हें काले पानी की जेल में कोल्हू फेरते-फेरते और नारियल की रस्सी बनाते-बनाते बिताने थे।  महाराष्ट्र के नासिक जनपद में एक छोटा सा स्थान भगूर है। इसी में दामोदर पंत सावरकर एवं उनकी  धर्मपत्नि राधादेवी के चार संताने थीं। बडे पुत्र का न...