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इस्लामिक मैगजीन में भाजपा नेताओं के खिलाफ हमले का आव्हान,भारत सरकार को पूरी ताकत से लडना ही होगा

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  इस्लामिक मैगजीन में भाजपा नेताओं के खिलाफ हमले का आव्हान,भारत सरकार को पूरी ताकत से लडना ही होगा।   जिस समय अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो रहा था, उसी समय यह तय हो गया था कि भारत का इस्लामिक जिहाद से डायरेक्ट संघर्ष प्रारम्भ होनें जा रहा है। कश्मीर सहित पूरे देश में आतंकी घटनायें बढेगीं, टकराव बढेगा और भारत में निरंतर चलने वाली आंतरिक अस्थिरता का दौर प्रारम्भ होगा । इसके लिये भारत की सरकार कतई जिम्मेवार नहीं है बल्कि ईस्लाम का तयसुदा एजेण्डा जो दुनिया भर में इसी तरह के मंसूबों पर काम करता है,यह उसका लक्ष्य है। इसलिये बचाव के लिये भारत सरकार को पूरी ताकत से लडना ही होगा।  ---------  इस्लामिक मैगजीन के कवर पेज पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, निशाने पर भाजपा के नेता ; पुलिस अलर्ट इस्लामिक मैगजीन में भाजपा नेताओं के खिलाफ हमले का जिक्र किए जाने के बाद खुफिया विभाग ने बिहार पुलिस को अलर्ट जारी किया है। द खुरासन डायरी ने ट्वीट किया है कि इस्लामिक स्टेट खुरासन प्रांत (आइएसकेपी) के कवर पर भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी हैं। राज्य ब्यूरो, पटना :  इस्लामिक मैगजीन में भाजपा...

अमेरिका को भारत के महत्व को स्विकारना होगा - अरविन्द सिसौदिया

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   अमेरिका को भारत के महत्व को स्विकारना होगा - अरविन्द सिसौदिया America has to accept the importance of India - Arvind Sisodia भारत की तटस्थ नीति को लेकर अमेरीका को जरूर यह लग रहा होगा कि भारत ने उसे कमतर आंका है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाईडन ने अब जो भारत से बातचीत की उसमें उन्हे भारत के वास्तविक अस्तित्व का पूरा पूरा अहसास हो चुका होगा। इससे पहले वे भी हवा हवाई थे। विशेषकर तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के समय, संभवतः अब वे उस नेरेटिव से बाहर आ गये होंगें । With regard to India's neutral policy, America must have felt that India has underestimated it. In the conversation that US President Joe Biden has now talked to India, he must have got a full realization of the real existence of India. Before that they too were airborne. Especially at the time of Taliban's occupation of Afghanistan, they may have come out of that narrative now. अमेरिका की गलतनीति से पूरा विश्व अचानक असुरक्षित हो गया । मानवता , अनुशासन एवं विश्व व्यवस्था अचानक से भरभरा कर ढह गई । हिंसा, अमानवीयता और आ...

तालिबानी सरकार बनने से आतंकवादियों के हौंसले बढ़े,विश्व भर में चिन्ता

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तालिबानी सरकार बनने से आतंकवादियों के हौंसले बढ़े,विश्व भर में चिन्ता - अरविन्द सिसौदिया    9414180151 अमरीका ने जिस गैर जिम्मेवाराना तरीके से आफगानिस्तान से पलायन किया और आतंकी संगठनों को शस्त्र और शासन सौंप दिया। उसके खतरे अब सामने आने लगे है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में आतंकवाद फिर सिर उठाने लगा है। चीन में भी चिन्ता बढ़ी है, रूस नें खुल कर सभी को सावधान किया है। वहीं ब्रिटेन में एक सांसद की चर्च में घुस कर आतंकवादी ने हत्या कर दी है।       तालिवान शासन के बाद आतंकी घटनाओं में वृद्धि आठ अलग अलग रिपोर्टें पढ़ कर इसका अनुमान लगाया जा सकता है।  1- 18 Sep 2021, 9:25 AM Engagement: 0 चीन इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या अफगान तालिबान ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) पर नकेल कसने के अपने वादे को पूरा करेगा। अफगान तालिबान के प्रवक्ता ने ग्लोबल टाइम्स के साथ साक्षात्कार में कहा कि कई ईटीआईएम सदस्यों को अफगानिस्तान छोड़ने के लिए कहा गया था, उसके बाद सवाल बने रहे। चीनी सरकार ने आतंकवादी समूह पर अपनी चिंताओं को दोहराया है, क्योंकि यह चीन की राष्ट्रीय...

“ताइवान " पर अफगान वाली गलती न हो - अरविन्द सिसौदिया

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    अमेरिका एवं संयुक्त राष्ट्र संघ से “ताइवानः पर अफगान वाली गलती न हो - अरविन्द सिसौदिया      जब से अफगान में तालिबान का जबरिया कब्जा एवं जबरिया सरकार बनी है। तब से ही चीन के विस्तारवादी मंसूबे उफान मार रहे है। अफगान की जबरिया सरकार को अभी विश्व मान्यता नहीं मिली है। लेकिन चीन ने किसी की भी परवाह किये बिना ही बहुत बडी राशी उस सरकार को देने ंकी घोषणा कर दी है। उसी के साथ वह अब लगातार ताईबान की हवाई सीमा का जानबूझ कर उल्ल्ंघन कर रहा है। उसके लडाकू विमान जबरिया घुस रहे हैं। चीन अपनी विस्तारवादी हवस को प्रदर्शित कर रहा है। अमेरिका एवं संयुक्त राष्ट्र संघ को चीन की विस्तारवादी नियत पर अंकुश लगाना होगा । उसने मंसूबो को लगाम देनी होगी। अफगान वाली लचर भूमिका से पूरी तरह बाहर आकर अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य का सर्वोच्च प्रदर्शन भी करना होगा । चीन महासागर में भी अपनी शक्ति दिखानी होगी। अब समय आ गया है कि अमेरिका और यूएनओ अपनी सर्वोच्चता को प्रदर्शित करें।      अमेरिका के अफगान से बोरिया बिस्तर समेटते ही, चीन अपने आप को स्वछंद मान रहा है। उसका व्यवह...

तालिबान की केयरटेकर सरकार “ ठगों और कसाइयों का झुंड ” - अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम

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    तालिबान की अंतरिम सरकार बनने के बाद विश्व के अन्य देशों की प्रतिक्रियायें आना प्रारम्भ हो गईं हे। तालिबानी सरकार मूल रूप से अमेरिका और संयुक्त राष्ट्रसंघ की बडी तौहीन है। जो उनके यहां आतंकवादी एवं मोस्ट वान्टेड के रूप में दर्ज है,उन्हे तालिबान सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री बनाया है। अमेरिका की चिंता अमेरिका ने कहा है कि तालिबान ने जिस सरकार की घोषणा की है , उसमें सभी पुरुष हैं और यह चिंता की बात है। सरकार में शामिल सारे वे लोग हैं , जिनका संबंध अमेरिकी बलों पर हमले से है। मंगलावर को अफ़ग़ानिस्तान के हेरात में तालिबान ने खुली गोलीबारी में तीन प्रदर्शनकारियों को मार दिया था। काबुल में भी मंगलवार को महिला प्रदर्शनकारियों के ख़लिफ़ हवा में गोलीबारी की गई थी। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तालिबान की केयरटेकर सरकार को ठगों और कसाइयों का झुंड कहा है। रिपब्लिकन पार्टी के सीनियर सांसदों में लिंडसे उन कइयों में से एक है , जो अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के फ़ैसले के लिए राष्ट्रपति बाइडन की खुलकर आलोचना कर रहे हैं। नई तालिबान सरकार से अमेरिका की बढ़ी चिंता तालिबान अफगानिस्तान पर क...

तालिबान ने की पाकिस्तान परस्त अंतरिम सरकार की घोषणा,

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     अफ़ग़ानिस्तानः तालिबान ने की पाकिस्तान परस्त अंतरिम सरकार की घोषणा,  अखुंद होंगे मुखिया,  अफगान जनता पाकिस्तान के विरोध में सडकों पर उतर आई है  7 सितंबर 2021,मंगलवार पाकिस्तान - चीन लगातार इस कोशिश में थे कि अफगानिस्तान में विश्व राजनीति की समझ वाला मजबूत व्यक्ति सरकार का मुखिया न बनें और इसमें वे सफल भी हो गये है। क्यों कि सरकार में विश्व राजनीति की समझ वाले बरादर को मात्र उप प्रधानमंत्री ही रखा गया है। वहीं पाकिस्तानी फेबर के हक्कानी को गृह मंत्री बनवा कर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सरकार को लगभग अपनी मुट्ठि में कर लिया है। हलांकी इसका वहां विरोध भी हो भी रहा है। अफगान जनता पाकिस्तान के विरोध में सडकों पर उतर आई है। किन्तु अभी तालिबान पाकिस्तान के कब्ज में जकडा हुआ नजर आ रहा है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबान ने  अफ़ग़ानिस्तान में अंतरिम सरकार गठन का एलान किया और बताया कि अफ़ग़ानिस्तान अब ’इस्लामिक अमीरात’ है. अंतरिम सरकार मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को अफगानिस्तान का नया प्रधानमंत्री मुल्ला  अब्दुल गनी बरादर क...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,जियो और जीने दो में विश्वास करने वाला एक अहिंसक, मानवतावादी, लोक कल्याणकारी और चरित्र निर्माण वाला महान संगठन है । - अरविंद सिसोदिया

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चरित्र निर्माण  की सबसे बड़ी पाठशाला है  - अरविंद सिसोदिया हाल ही में एक न्यूज पोर्टल को दिए इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने कहा था कि तालिबान बर्बर हैं, उनकी हरकतें निंदनीय हैं, मगर आरएसएस, विहिप और बजरंग दल का समर्थन करने वाले सभी एक जैसे हैं। जावेद अख्तर की ये टिप्पणि उनकी कुंठित मानसिंकता का परिचायक है। उससे पहले भी उन्होने कई कुठित बयान दिये है। जिनकी निंदा हुई है। जिन्हे विवादित माना गया।    “ जावेद अख्तर की तालिबान वाले बयान से प्रत्येक राष्ट्रभक्त की भावनाओं को चोट पहुंची है। उनकी टिप्पणी मनोविकार से पीड़ित है। भारत एक शांति एवं सद्भाव पूर्ण देश है जिसने हमेशा ही दूसरे देशों के पीड़ितों को अपने यहां शरण दी और कभी पंथ परिवर्तन को नहीं कहा हे उसमें वे तालिबान खोज रहे हे। जावेद अख्तर की ये टिप्पणी उनकी कुंठित मानसिकता का परिचायक है।      “एक देशभक्त, राष्ट्रवादी, देश के लिए व्यक्ति निर्माण में लगे ,  त्याग, तपस्या और बलिदान की प्रतिमूर्ति वाले स्वयंसेवकों के महान संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ,जो इस देश के अंद...

तालिबानों के संकेतों पर फूंक - फूंक कर ही कदम रखना होगा - अरविन्द सिसौदिया

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  तालिबान लगातार भारत से सकारात्मकता का संकेत दे रहा है। माना जाता है कि उसने भारत को संदेश भेजा था कि अफगानिस्तान में दूतावास बनाये रखें यानि कि कर्मचारी अधिकारी नहीं हटायें। अभी उनके एक प्रतिनिधि ने दोहा मे भारतीय राजदूत से मुलाकात की है। उनके प्रवक्ता ने कश्मीर मसले से अपने को दूर रखने की बात भी कही है। तीनों संकेतों में हमें संदेश दिया गया है कि फिलहाल नई तालिबान सरकार भारत से टकराना नहीं चाहती है। हो सकता है कि भारत के कुछ स्पष्ट और कठोर संकेतों के क्रम में यह हो । यह भी हो कि तालिबान की यह अस्थायी रणनीति हो । किन्तु हमारे पूर्व अनुभव भी ठीक नहीं है। इसलिये आंखमूंद कर विश्वास भी नहीं और आंख मूंद कर परित्याग भी नहीं की नीती अपनानी होगी । वहीं दूसरी बात यह भी है कि तालिबान के जन्म से लेकर आज तक बहुत पानी बह गया । जो सत्ता की मलाई चख लेते हैं वे आक्रमकता पर कायम नहीं रह पाते । संभवतः तालिबान अब अफगानिस्तान में सत्ता सुख भोगना चाहता है। वहां की जनता भी क्रूर शासन नहीं चाहती, वे अभी भाग रहे है। मगर जब भाग नहीं पायेंगे तो वे अपनी बात के लिये लडेंगे भी, मरेंगे भी और मारेंगें भी । यान...

भारत को अफगानिस्तान में दखल रखना होगा - अरविन्द सिसौदिया

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          भारत को एक देश के रूप में अफगानिस्तान में अपना दखल रखना होगा । दखल रखे बिना हम वहां की जमीनी हकीकतों को कैसे जानेंगे ? हमारे फायदों और नुकसानात की सही समीक्षा तभी संभव है जब वहां की सही हकीकत से हम रूबरू हों। इसलिये मेरा व्यक्तिगत मानना यह है कि कतर की राजधानी दोहा में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल का तालिबान प्रतिनिधि  शेर मोहम्मद अब्बास स्टानेकजई  से मिलना सही निर्णय था ।         सकारात्मकता के तकाजे पर हमने सही निर्णय लिया और भारतीयों की हिफाजत एवं उन्हे सुरक्षित वहां से निकालने की प्राथमिकता तालिबान को बताना भी सही है। बातचीत के बिना, न तो कोई संशय समाप्त होता, न अनुमानों की स्पष्टता आती है और न ही कोई हल कभी निकलता हे।  बिना बात हम अफगानिस्तान को अपना दुश्मन क्यों बनायें। उससे या उसकी नई सरकार से जब भी गलती होगी, तो हम भी तो निर्णय लेने के लिये स्वत्रंत है।           क्रिया - प्रतिक्रिया इस गतिमान विश्व का सतत सत्य है। इसलिये बातचीत को जारी रखना चाहिये, अपना दखल, अपना...