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राम को राम रहने दो...उन्हे अविराम रहनें दो God Shri Ram

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  मुझे नहीं पता कि ये पंक्तियां क्या हैं, आज दीपावली के अवसर पर में सुबह कम्प्युटर पर था, भाव आते गये में लिखता गया जो मन में आया वह लिख दिया....किसी को इन पंक्तियों से नाराजगी होतो वह मुझे क्षमा करें, में नहीं जानता कि यह पंक्तियां मेरे मन में क्यों आईं...शायद यही भी श्रीराम जी की ही प्रेरणा हो... राम को राम रहने दो, मत उन्हे भव्यता और दिव्यता में कैद करो उन्हे अपने जन जन में अविराम रहने दो राम को राम रहने दो,..1... हदयों में विश्राम रहते हैं वे, उन्हे हदयों का आयाम रहनें दो... सुबह की राम राम तो  अंतिम यात्रा के हे राम रहनें दो राम को राम रहने दो,....2.. भरतवंश का स्वाभिमान रहनें दो...  समाज व्यवस्था का संस्थान रहनें दो उन्हे निषाद का रहने दो केवट का रहने दो शबरी का रहनें दो राम को राम रहने दो,....3... वे तो आम जन के हें, आम जन में रहनें दो! उन्हे खेत में रहने दो खलिहान में रहनें दो.... करूणा दया और क्षमा में रहनें दो....  जो दुखों को सहनें की शक्ति है उसे दुखिया के आंगन में रहनें दो.. राम को राम रहने दो,....4.. कहां जरूरत उन्हे महलों की ... कहां उनने कहा मुझे भगवा...