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दुष्टता का दमन और धर्म की सुरक्षा ही हिन्दुत्व का प्रथम कर्त्तव्य - अरविन्द सिसौदिया

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      दुष्टता का दमन और धर्म की सुरक्षा ही हिन्दुत्व का प्रथम कर्त्तव्य - अरविन्द सिसौदिया Suppression of wickedness and protection of Dharma / religion is the first duty of Hindutva - Arvind Sisodia भारत यानि कि हिन्दुस्तान अर्थात हिन्दुओं का स्थान। यहां हिन्दू संस्कृति जन्मी,पुष्पित - पल्लवित हुई जो कि अनादिकाल से यात्रारत सभ्यता सनातन संस्कृित भी कहलाती है। Bharat means Hindustan means the place of Hindus. Here Hindu culture was born, flourished and flourished, which is also called Sanatan Sanskriti, a civilization traveling since time immemorial. भारतीय संस्कृति का प्रथम कर्त्तव्य ही दुष्टता का दमन है। भारतीय संस्कृति स्पष्टता से पापियों के संहार की आज्ञा देती है। भारतीय संस्कृति मानवता के शुत्रुओं के विनाश का लक्ष्य निर्धारत करती है। The first duty of Indian culture is the suppression of evil. Indian culture clearly commands the extermination of sinners. Indian culture sets the goal of destroying the enemies of humanity. भारतीय संस्कृति के लगभग प्रत्येक देव ने अपने ज...

होली आपसी सदभाव, प्रेम की प्रगाढ़ता का पर्व

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होली आपसी सदभाव, प्रेम और स्नेह की प्रगाढ़ता का पर्व Holi is the festival of mutual harmony, the intensity of love and affection.   - अरविन्द सिसोदिया 9414180151 भारत एक बहुत ही प्राचीन मानव सभ्यता का सनातन देश है । इस देश में रहने वाली मानव सभ्यता ने सदैव नूतनता को अंगीकृत किया है। अनादि काल से अनंत अनुसंधानों के द्वारा एक श्रेष्ठतम सुव्यवस्थित मानव सभ्यता की व्यवस्था की है। जिसे हम सनातन संस्कृति या हिन्दुत्व कहते हैं। इसे अंगीकृत करने वाले हिन्दू कहलाते हैं। India is the eternal country of a very ancient human civilization. The human civilization living in this country has always adopted innovation. From time immemorial, through infinite research, a best orderly human civilization has been arranged. Which we call Sanatan Sanskriti or Hindutva. Those who adopted it are called Hindus.    इस सभ्यता के विशाल कालखंड में विभिन्न प्रकार के इवेंट , आयोजन,  त्यौहार , पर्व , धार्मिक कर्मकांड आदि जुड़ते गए । इन पर्वों और त्योहारों की बड़ी संख्या हैं। Various types of events, f...

होली : नरसिंह अवतार, भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका.....

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होली की बहुत बहुत शुभ कामनाएं और बधाई ..! रंगों के इस त्यौहार का सन्देश स्पष्ट है  कि जिन्दगी बहुरंगी होनी चाहिए ..! एक रंग नीरसता को लाता है .. तो बहुरंगता विविधता के द्वारा नीरसता को तोड़ता है ..! जीवन को बहु रंगी बनायें .. जम कर होली मनाएं ..!  - अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान , भारत | 09414180151   Blog - arvindsisodiakota.blogspot.com Blog - arvindsisodiakota.blogspot.com ------ संझिप्त  में होली की कथा .....  होली के प्रचलन की अनेक कथाओं में प्रमुख है भक्त प्रहलाद , उसके पिता , बुआ और भगवान की कथा। कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक असुर था जिसका नाम था हिरण्यकश्यप। अपने बल और सामर्थ्य के अभिमान में वह स्वयं को ही भगवान मानने लगा था। उसका पुत्र प्रह्लाद बड़ा ईश्वर भक्त था।  हिरण्यकश्यप की  भारी व्यथा यह थी कि उसके घर में ही उसे विद्रोह के स्वर (धर्म-पालन और ईश्वर-भक्ति के वचन) सुनाई दे रहे थे। अर्थात प्रह्लाद की ईश्वर-भक्ति और धर्मपरायणता उसके ढोंग को नकार देते थे ..! जिससे  नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने ...

होली संपूर्ण holi festival

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*************** *  होली चिन्तन holi festival  ***************                   होली भारतीय संस्कृति की पहचान का एक पुनीत पर्व है, भेदभाव मिटाकर पारस्परिक प्रेम व सद्भाव प्रकट करने का एक अवसर है. अपने दुर्गुणों तथा कुसंस्कारों की आहुति देने का एक यज्ञ है तथा परस्पर छुपे हुए प्रभुत्व को, आनंद को, सहजता को, निरहंकारिता और सरल सहजता के सुख को उभारने का उत्सव है.                  यह रंगोत्सव हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता है जो अनेक विषमताओं के बीच भी समाज में एकत्व का संचार करता है. होली के रंग-बिरंगे रंगों की बौछार जहाँ मन में एक सुखद अनुभूति प्रकट कराती है वहीं यदि सावधानी, संयम तथा विवेक न रक्खा जाये तो ये ही रंग दु:खद भी हो जाते हैं. अतः इस पर्व पर कुछ सावधानियाँ रखना भी अत्यंत आवश्यक है.                   प्राचीन समय में लोग पलाश के फूलों से बने रंग अथवा अबीर-गुलाल, कुम -कुम- हल्दी से होली खेलते थे. किन्तु वर्त्तमान समय में रासायनिक तत्...

भारतीय सँस्कृति को, समाप्त करने वालों के षड़यंत्र से बचाना होगा

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  कोई संस्कृति समाप्त करनी है तो उससे उनके त्योहार छीन लो और यदि कोई त्योहार समाप्त करना है तो उससे बच्चों का रोमांच गायब कर दो। कितना महीन षड्यंत्र है? कितना साफ और दीर्घकालिक जाल बुना जाता है? समझिए दीपावली पर पटाखे बैन के षड्यंत्र की कहानी- पंच मक्कार(मीडिया,मार्क्सवादी,मिचनरीज, मुलाना, मैकाले) किस तरह से सुनियोजित कार्य करते है आप इस लेख के माध्यम से जान पाएंगे।किस तरह इकोसिस्टम बड़ा लक्ष्य लेकर चलता है वो आप जान पाएंगे।वे किस तरह 10,20 साल की योजना बनाकर स्टेप बाई स्टेप नैरेटिव सेट कर शनैःशनैः वार कर किले को ढहा देते हैं ये आप जानेंगे। जिसमें वे आपको ही अपनी सेना बनाकर अपना कार्य करते हैं और आपको पता भी नहीं चलता। पटाखो पर बैन की कहानी 2001 से शुरू होती है। जब एक याचिका में SC ने सुझाव दिया कि पटाखे केवल शाम 6 से 10 बजे तक मात्र चार घण्टे के लिए फोड़े जाए। साथ ही इसको लेकर जागरूकता फैलाने के लिए स्कूलों में बच्चों को बताया जाए। ये केवल एक सुझाव वाला निर्णय था ना कि पटाखे फोड़ने पर आपराधिक निर्णय। ध्यान रहे सुझाव केवल दीपावली पर ही था क्रिसमस और हैप्पी न्यूएर पर फैसले से नदारद थे।...