10 मई, 1857 की क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर : जनक्रांति: 1857
यह वह धरती है जहाँ वीर उगाये जाते हैं , तलवारों की धारों पर शीश चढ़ाये जाते हैं । क्या कोई जीतेगा इसका,यहाँ बलिदानों से विजय बुलाई जाती है , शौर्य - तेज की हर सुबह हुंकार लगाई जाती है , जौहर और बलिदानों के सतत मंजर, युग युग से हमनें देखे है , यहां जीवन देकर,राष्ट्र जीवन को अमरता संभलाई जाती है ! - अरविन्द सिसोदिया 10 मई, 1857 की क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर history 1857 india freedom struggle velu जनक्रांति: 1857 - अरविंद सीसौदिया उस दिन देखा था तारों ने, हिन्दुस्तानी विश्वास नया, जिस दिन लिखा था रणवीरों ने, खूं से अपना इतिहास नया।। : गोपाल प्रसाद व्यास ईस्ट इंडिया कम्पनी की फौजी हुकूमत के विस्तारवादी मंसूबों के विरूद्ध 1857 की जनक्रां...