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बाबरी विध्वंस : अड़ंगेबाजी ही इसके जनशक्ति के द्वारा ढहाए जाने का कारण बना ....!

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- अरविन्द सिसोदिया  बाबरी ढांचा ढहाए जाने की घटना का  मूल कारण क्या था..., इस पर विचार होना बहुत जरुरी है .., जबरिया धर्मान्तरण और पवित्र स्थलों को  ढहा ना तथा उन पर विजेताओं के धर्म स्थल खड़े करना , विश्व व्यापी परवर्ती रही हे और जब भी उनसे वह समाज मुक्त हुआ तो उसने पुनः अपनी जबरिया छिनी गई अस्मिता को प्राप्त किया है..बाबरी विध्वंस भी इसी तरह की घटना है जो कई कारणों के साझा हो जाने से आक्रोशित जनसमूह के द्वारा ढहा दी गई ....बाबरी के बारे में तय तथ्य हैं की उसे रामलला के पवित्र स्थल को तोड़ कर बनी गई थी ..विजय के प्रतीक के रूप में , आजादी के पश्चात  जिस तरह से सोमनाथ का पुर्न निर्माण हुआ उसी तर्ज पर बाबरी के स्थान पर  रामलला के पवित्र स्थल   का भी पुर्न  निर्माण हो जाना चाहिए था...उसमें अनावश्यक अड़ंगेबाजी ही इसके जनशक्ति के द्वारा ढहाए जाने का कारण बना ....! मेरा  मानना है की सोमनाथ पेटर्न पर ही रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण अयोध्या में होना चाहिए इसमें कोर्ट की कोई जरुरत ही नहीं है ....   ============ बाबरी कांड महज एक घटना : सुप्रीम कोर्ट 16 Jan 2012,  http://navbh

हे प्रभु आनंद-दाता : एक महान प्रार्थना

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- रामनरेश त्रिपाठी' एक महान प्रार्थना  जिसे १०० वर्ष पूर्ण हुए...... हे प्रभु आनंद-दाता हे प्रभु आनंद-दाता ज्ञान हमको दीजिये, शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए, लीजिये हमको शरण में, हम सदाचारी बनें, ब्रह्मचारी धर्म-रक्षक वीर व्रत धारी बनें, हे प्रभु आनंद-दाता ज्ञान हमको दीजिये... निंदा किसी की हम किसी से भूल कर भी न करें, ईर्ष्या कभी भी हम किसी से भूल कर भी न करें, हे प्रभु आनंद-दाता ज्ञान हमको दीजिये... सत्य बोलें, झूठ त्यागें, मेल आपस में करें, दिव्या जीवन हो हमारा, यश तेरा गाया करें, हे प्रभु आनंद-दाता ज्ञान हमको दीजिये... जाये हमारी आयु हे प्रभु लोक के उपकार में, हाथ डालें हम कभी न भूल कर अपकार में, हे प्रभु आनंद-दाता ज्ञान हमको दीजिये... कीजिए हम पर कृपा ऐसी हे परमात्मा, मोह मद मत्सर रहित होवे हमारी आत्मा, हे प्रभु आनंद-दाता ज्ञान हमको दीजिये... प्रेम से हम गुरु जनों की नित्य ही सेवा करें, प्रेम से हम संस्कृति की नित्य ही सेवा करें, हे प्रभु आनंद-दाता ज्ञान हमको दीजिये... योग विद्या ब्रह्म विद्या हो अधिक प्यारी हमें, ब्रह्म निष्ठा