संदेश

श्रृंगार लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

करवा चौथ Karva Chauth पर श्रृंगार विशेष महत्व है

चित्र
   करवा चौथ पर श्रृंगार विशेष महत्व है विवाह के सात फैरों की रश्म के बाद एक स्त्री के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण पर्व करवा चौथ का ही होता है। सोलह श्रंगार सुहागिन स्त्री का मान होता है। इसलिये सामान्यतः सभी स्त्रीयां अपनी क्षमता के अनुसार श्रंगार कर ही चन्द्रमा को अर्क देती है। किसी भी स्त्री का सात्विक पवित्र जीवन ही सबसे बडा श्रंगार होता है।चांद के पूजन और दर्शन के बाद पति के हाथों से जल पीकर अपना व्रत तोड़ती है। इसके बाद घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेती हैं। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, सजना की सजनी को सजाने के लिए नगरों के बाजार सज गए हैं। बाजारों में महिलाओं ने खरीदारी शुरू कर दी है। विशेष कर श्रृंगार की सामग्री की अधिकांश बिक्री  होती है। नेल पालिश बिंदी से लेकर साज-सज्जा के सभी सामानों की बिक्री में बढोत्री हो गई है।  करवा चौथ के कारण बाजारों में रौनक नजर आ रही है। बाजारों में हर वैराइटी के सामान उपलब्ध हैं।  ...