संदेश

dinkar लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक राष्ट्रीयता के पितामह - रामधारी सिंह 'दिनकर'

चित्र
स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक राष्ट्रीयता के पितामह  -रामधारी सिंह 'दिनकर' Arvind Sisodia Kota - 9414180151 उन्नीसवीं सदी के अंग्रेजी पढ़े-लिखे हिन्दू अपने धर्म के कुपरिणामों को समझने लगे थे। इसका एक यह भी कारण था कि धर्म पर से उनकी श्रद्धा हटने लगी थी। अतएव, जब स्वामी विवेकानंद का आविर्भाव हुआ, उन्हें अपने सामने कई प्रकार के उद्देश्य दिखाई पड़े। सब से बड़ा कार्य धर्म की पुन:स्थापना का कार्य था। बुद्धिवादी मनुष्यों की श्रद्धा धर्म पर से केवल भारत में ही नहीं, सभी देशों में हिलती जा रही थी। अतएव, यह आवश्यक था कि धर्म की ऐसी व्याख्या की जाए जो अभिनव मनुष्य को ग्राह्य हो, जो उसकी इहलौकिक विजय के मार्ग में बाधा नहीं डाले। दूसरा काम हिन्दू धर्म पर, कम से कम, हिन्दुओं की श्रद्धा जमाये रखना था। किंतु, हिन्दू यूरोप के प्रभाव में आ चुके थे तथा अपने धर्म और इतिहास पर भी वे तब तक विश्वास करने को तैयार न थे, जब तक कि यूरोप के लोग उनकी प्रशंसा नहीं करें। और तीसरा काम भारतवासियों में आत्म गौरव की भावना को प्रेरित करना था, उन्हें अपनी संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं के योग्य उत्तराधि...