पाकिस्तानी में हिन्दू का दोयम दर्जे का जीवन


- अरविन्द सिसोदिया 
पाकिस्तान में हिन्दू होना अभिशाप हो गया....! सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय की महिलाओं और लड़कियों का अपहरण और बलात धर्मान्तरण करा कर जबरदस्ती विवाह कराना एक आम बात हो चुकी है और विगत कई सालों से ये कुत्सित खेल चल रहा है। पाकिस्तानी कानून में हाउसिंग कॉलोनियों में हिन्दू न तो कोई प्लॉट खरीद सकता है न को मकान। प्रभुदेवा नामके एक हिन्दू ने सकूर में अपने एक मुस्लिम मित्र के नाम पर प्लाट खरीदना पड़ा क्योंकि वह वहाँ जमीन नहीं खरीद सकता था। आज़ादी के बाद हुए विभाजन के बाद भी पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में हर जगह हिन्दुओं का वर्चस्व था मगर आज सभी हिन्दू वहाँ दोयम दर्जे का जीवन जीने को मजबूर हैं। पाकिस्तान के स्कूलों हिन्दुओं के बच्चों को हिन्दू धर्म के बारे में नहीं पढ़ सकते न कोई हिन्दू अपने बच्चे को हिन्दू धर्म के बारे में पढ़ा सकता है, हर हिन्दू बच्चे को इस्लाम की शिक्षा लेना जरुरी है। पाकिस्तान में किसी भी हिन्दू की मौत होने पर उसके शव का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से नहीं किया जा सकता हर हिन्दू को अपने परिजनों के शव को क्रबिस्तान में दफन करना पड़ता है। अपने सेकुलर भाई कुछ कहना चाहेंगे हिन्दुओ की इस दुर्दशा पर ?? वैसे किसी को इस बात पर विश्वाश नहीं है तो वो मेरे से आकर मिल में , मै आमने सामने बात करा दूंगा पाक से आये हिन्दुओ से ........अब तो एक हो जाओ मेरे भाइयो !! जय श्री राम !! 

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