संसद पर हमले की आज दसवीं बरसी




वाह कांग्रेस: फांसी की भी राजनीति....
संसद पर हमला करवाने के मास्टर माइंड को,
सभी भारतीय न्यायालय फांसी की सजा दे चुकीं है।
सरकार वोट की राजनीति के गंदे खेल में इसको लगातार टाल रही है।
काश उस हमले में ,
कुछ सांसद मारे जाते तो अभी तक हमलावरों को फांसी हो चुकी होती।



सिर्फ  श्रधान्जली   ...सजा  नहीं ....
संसद पर हमले की आज दसवीं बरसी है। 10 साल पहले 13 दिसंबर 2001 को जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकियों ने संसद पर हमला किया था। इस हमले का संसद परिसर में तैनात सुरक्षा बलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था और सभी पांच आतंकियों को मार गिराया था। देश के लोकतंत्र पर हुए इस सबसे बड़े हमले में दिल्ली पुलिस के पांच जवान, सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल, संसद के दो गार्ड, संसद में काम कर रहा एक माली और एक पत्रकार शहीद हो गए थे।

----
नई दिल्ली. आज से दस साल पहले यानी 13 दिसंबर, 2001 को संसद पर हुए हमले में शहीद हुए जवानों के घरवाले जहां एक ओर अफजल गुरु को तुरंत फांसी दिए जाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर इस हमले के मास्टरमाइंड होने का आरोप झेल चुके सैयद अब्दुल रहमान गिलानी ने कहा है, 'अगर अफजल को फांसी हुई तो पूरे कश्मीर में आग लग जाएगी। वहां की शांति खत्म हो जाएगी। कश्मीर के लोग जानते हैं कि उनके (अफजल गुरु) साथ नाइंसाफी हुई है। उन्हें फांसी देना बड़ी परेशानी का सबब बनेगा।'
संसद पर हमले के सिलसिले में 20 महीने की जेल काटने के बाद रिहा हुए गिलानी ने एक इंटरव्यू में अफजल गुरु को बेकसूर बताया है। अफजल गुरु को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। लेकिन अफजल ने फांसी से बचने के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी है, जिस पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।
कड़े कानून की कमी के चलते आतंकी घटनाएं बढ़ने से इनकार करते हुए इंटरव्यू में गिलानी ने कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक ढांचे में कड़े कानूनों के लिए कोई जगह नहीं है। गिलानी के मुताबिक हम कभी भी समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचे और जांच एजेंसियों ने कभी भी जांच को गंभीरता से नहीं लिया।
संसद हमले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रिहा हुए गिलानी ने कहा, 'हमले के बाद पुलिस अंधेरे में हाथ-पांव मार रही थी। उन्हें नतीजे दिखाने थे, लेकिन असली हमलावर के बारे में उसे कुछ पता नहीं था। उन्हें किसी का नाम इस हमले से जोड़ने की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने मुझे मास्टरमाइंड बना दिया। मैं दिल्ली में जाना पहचाना चेहरा था। मैं मानवाधिकार के लिए संघर्ष करता रहा हूं। मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाता भी था। उन्होंने मुझे आरोपी बनाना आसान समझा।'
गिलानी ने कहा, 'इस घटना के बाद जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। मैं इससे पहले एक आम आदमी था। मैं कहीं भी आ जा सकता था। लेकिन अब लगता है कि मैं बंध गया हूं। लोगों के मन में मेरी एक छवि बन गई है और मुझे इसी के साथ जीना है।'
मुंबई पर हुए 26/11 के हमलों के बाबत गिलानी ने कहा, 'मैंने इन हमलों की निंदा की थी। जिन लोगों ने ये हमले किए थे, उनके लिए समाज में कोई जगह नहीं है। लेकिन इसकी आड़ में पुलिस बेकसूर लोगों को नहीं पकड़ सकती।'
कश्मीर समस्या के हल के बारे में गिलानी ने कहा, 'कश्मीर के लिए हल खोजना होगा। अगर वे वहां यथास्थिति बरकरार रखेंगे तो वहां के लोगों की कठिनाई कायम रहेगी। दुर्भाग्य से सरकार ने लोगों से झूठ बोला और उन्हें अंधेरे में रखा।'
यूपीए और एनडीए सरकार की तुलना करते हुए गिलानी ने कहा, 'मेरे हिसाब से दोनों सरकारें समस्याएं सुलझाने में नाकाम रही हैं। केंद्र में सत्ता बदलने से कुछ नहीं होगा। नीतियों में बदलाव की जरूरत है। इन दोनों सरकारों में नीतियां कमोबेश एक जैसी रहीं। आप खुफिया एजेंसियों के कामकाज के तरीके को देखिए। मैंने आईबी के ऐसे अफसरों का सामना किया है जो सांप्रदायिक
हैं।'

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

आन बान और शान का पर्व भुजरिया

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

कविता - रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

ईश्वर में भी मातृशक्ति को बराबरी का दर्जा देता है हिंदुत्व — अरविन्द सिसोदिया

माँ बाण माता : सिसोदिया वंश की कुलदेवी

हिंदुत्व ही सबसे ज्यादा महिला सम्मान देता है - अरविन्द सिसोदिया

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

खींची राजवंश : गागरोण दुर्ग