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दिसंबर 29, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नेताओं पर जूते-चप्पल या थप्पड़

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- अरविन्द सिसोदिया  २०११ का हीरो  कभी जूता तो कभी चप्पल तो कभी थप्पड़ भी रहा  मुद्दा कोई भी हो, तकरार हुई नहीं कि मारपीट शुरू हो जाती है। नाराज नागरिक नेताओं पर जूते-चप्पल फेंकने या थप्पड़ मारने पर उतारू दिखते हैं तो सड़कों पर हर कहीं से ‘रोड रेज’ की खबरें मिल रही हैं। खबरें ही नहीं, सरकारी आंकड़े भी बयां रहे हैं कि हर कहीं ‘कोलावेरी हिंसा’ का चढ़ता ग्राफ लोगों को हल्ला बोल मुद्रा में ला रहा है। निरीह औरतों, बच्चों तथा बूढ़ों के खिलाफ तो विशेष तौर से, जो पलटवार करने में असमर्थ हैं। नागरिकों के गुस्से पर ठंडे छींटे डालने और तटस्थता और शांति की अपील करने की उम्मीद हम किससे करें? पहले सहज जवाब होता था, गांधीवादियों या घट-घटव्यापी मीडिया से, पर इन दिनों गांधीवाद के उपासक भी नापसंद व्यवस्था के प्रतिनिधियों के खिलाफ गुस्से और मारपीट को सही ठहराने लगे हैं और मीडिया इन हिंसक छवियों और बयानों को दिनभर भुनाता हुआ हिंसा करने वालों को राज-समाज में एक तरह की सांस्कृतिक स्वीकृति और शोहरत दिला रहा है। लगता है यह लगभग मान लिया गया है कि आज जो कुछ व्यवस्था सम्मत है, वह कुचलने लायक है और उसक

मुलायम , मायावती , लालू और कांग्रेस की सांठगांठ

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- अरविन्द सिसोदिया मुलायम , मायावती , लालू और कांग्रेस  की सांठगांठ से, राज्य सभा में भी नकली लोकपाल पास हो जायेगा । जनता को इस सांठगांठ को समझना चाहिये। --------- राज्यसभा में लोकपाल पर सरकार की अग्निपरीक्षा आज! Dec 29, 2011 नई दिल्ली। लोकसभा में पास हो चुके लोकपाल बिल की आज राज्यसभा में अग्निपरीक्षा है। लोकपाल बिल को आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। लेकिन इसके पास होने को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। एक तो सदन में सरकार का बहुमत नहीं है, ऊपर से सहयोगी टीएमसी ने बिल में संशोधन पेश कर दिया है। उधर, विपक्ष भी बिल को लेकर अपना कड़ा रुख छोड़ने को तैयार नहीं है। गौरतलब हैकि कुल 243 सांसदों की राज्यसभा में यूपीए के 99 सांसद हैं। अगर बीएसपी (18) और समाजवादी पार्टी (5) के 23 सांसद लोकसभा की ही तरह वॉकआउट करते हैं तो संसद में मौजूदगी रहेगी 220 सांसदों की। ऐसी सूरत में उसे बहुमत के लिए 111 सांसदों की दरकार होगी। अगर 8 मनोनीत सांसदों और 6 निर्दलियों को सरकार साध ले तो उसकी तादाद 113 हो जाएगी यानी बहुमत से 2 ज्यादा| दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सभा में लोकपाल बिल के पास होन

भाजपा और संसद सोनिया की बंधुआ मजदूर नहीं.........

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भाजपा और संसद  सोनिया की बंधुआ मजदूर नहीं.........  सरकारी लोकपाल बिल को वोट नहीं मिलने से, संवैधानिक दर्जा नहीं मिल पाया, लोकसभा में करारी हार से तिलमिलाये  सोनिया - राहुल इस तरह आग उगल रहे हैं जैसेः-  भारतीय जनता पार्टी या संसद उनकी बंधुआ मजदूर हो। अपने ही गिरेवान में झांके कांग्रेस उनके सहयोगी दल और उनके ही सांसदों ने धोका दिया।  --------------------- क्या सांसद सोनिया के बंधुआ मजदूर हैं? केजरीवाल और किरण बेदी ने कांग्रेस अध्यक्ष पर हमला नई दिल्ली, बुधवार, 28 दिसंबर 2011 अन्ना हजारे की मजबूत लोकपाल की जंग में कांग्रेस को निशाना बनाने की घोषणा के बाद हजारे पक्ष के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी ने बुधवार को सोनिया गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि क्या सांसद पार्टी आलाकमान के बंधुआ मजदूर हैं? बेदी ने ट्वीट किया कि जनलोकपाल शासन में बदलाव के बगैर नहीं मिलेगा, केवल समय बताएगा कि ऐसा कब होगा। सोनिया पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने ट्विटर पर लिखा कि सांसदों को पार्टी आलाकमान की इच्छाओं के खिलाफ मतदान करने या बोलने की आजादी नहीं है। क्या सांसद पार्टी आलाकमान के बंधुआ मजदूर है

कांग्रेस : अपने ही गिरेवान में झांके

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अपने ही गिरेवान में झांके कांग्रेस उनके सहयोगी दल और उनके ही सांसदों ने धोका दिया। -----------------  लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने को लेकर संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी बहुत नाराज हैं। कांग्रेस सरकार अब उन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई का मन बना रही है, जो वोटिंग के दौरान गायब थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी ने वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहे पार्टी के 16 सांसदों की सूची भी मंगवाई है। जबकि इनमें से 6 सांसद तो सिर्फ गुजरात के ही हैं। गुजरात के इन सांसदों के नाम हैं... 1. दिनशा पटेल 2. बिठ्ठल रादडिया 3. जगदीश ठाकोर 4. विक्रम माडम 5. किशन पटेल 6. कुंवरजी बावडिया लोकसभा में बिल पेश करने वाले नारायण सामी ने बताया कि एसएमएस और फोन द्वारा इस संबंध में सभी सांसदांे को जानकारी दे दी गई थी। लेकिन फिर भी ये लोग अनुपस्थित रहे। सामी के अनुसार अनुपस्थित सांसदों को जल्द ही शो कॉज नोटिस भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को लोकपाल और लोकायुक्त को संवैधानिक दर्जा दिए जाने वाला संविधान संशोधन विधेयक दो तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया, जिससे