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जनवरी 26, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आयी

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-------------- गाना / Title: जब ज़ीरो दिया ... है प्रीत जहाँ की रीत सदा - jab ziiro diyaa ... hai priit jahaa.N kii riit sadaa चित्रपट / Film: Poorab Aur Paschim संगीतकार / Music Director:  कल्याणजी - आनंदजी-(Kalyanji-Anandji) गीतकार / Lyricist:  इन्दीवर-(Indeevar) गायक / Singer(s):  Mahendra Kapoor -----------  जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने भारत ने मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आयी तारों की भाषा भारत ने दुनिया को पहले सिखलायी देता ना दशमलव भारत तो यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था धरती और चाँद की दूरी का अंदाज़ लगाना मुश्किल था सभ्यता जहाँ पहले आयी पहले जनमी है जहाँ पे कला अपना भारत जो भारत है जिसके पीछे संसार चला संसार चला और आगे बढ़ा ज्यूँ आगे बढ़ा, बढ़ता ही गया भगवान करे ये और बढ़े बढ़ता ही रहे और फूले\-फले मदनपुरी: चुप क्यों हो गये? और सुनाओ है प्रीत जहाँ की रीत सदा मैं गीत वहाँ के गाता हूँ भारत का रहने वाला हूँ भारत की बात सुनाता हूँ काले\-गोरे का भेद नहीं हर दिल से हमारा नाता है कुछ और न आता हो हमको हमें प्यार निभाना आता है जिसे मान चुकी सारी दुनि

मेरे देश की धरती,सोना उगले उगले हीरे मोती ......

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गाना / Title: मेरे देश की धरती, सोना उगले उगले हीरे मोती - mere desh kii dharatii, sonaa ugale ugale hiire motii चित्रपट / Film: Upkaarसंगीतकार / Music Director:  कल्याणजी - आनंदजी-(Kalyanji-Anandji) गीतकार / Lyricist:  इन्दीवर-(Indeevar) गायक / Singer(s):  Mahendra Kapoor  ,   chorus ---- मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती ... बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं सुनके रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे, मेरे देश ... जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अंगड़ाइयाँ लेती है क्यूँ ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जनम लिया, उसने ही पाया प्यार तेरा यहाँ अपना पराया कोई नहीं है सब पे है माँ उपकार तेरा, मेरे देश ... ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहाँ गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक, ऐसे हैं अमन के फूल यहाँ रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से,

वह ख़ून कहो किस मतलब का, जिसमें उबाल का नाम नहीं - विमल सोनी

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विमल सोनी वह ख़ून कहो किस मतलब का, जिसमें उबाल का नाम नहीं वह ख़ून कहो किस मतलब का, आ सके देश के काम नहीं वह ख़ून कहो किस मतलब का, जिसमें जीवन न रवानी है जो परवश में होकर बहता है, वह ख़ून नहीं है पानी है उस दिन लोगों ने सही सही, खूँ की कीमत पहचानी थी जिस दिन सुभाष ने बर्मा में, मांगी उनसे कुर्बानी थी बोले स्वतंत्रता की खातिर, बलिदान तुमहे करना होगा बहुत जी चुके हो जग में, लेकिन आगे मरना होगा आजादी के चरणों में जो, जयमाल चढाई जाएगी वह सुनो तुम्हारे शीशों के, फूलों से गूंथी जाएगी आज़ादी का संग्राम कहीं, पैसे पर खेला जाता है? ये शीश कटाने का सौदा, नंगे सर झेला जाता है आज़ादी का इतिहास कहीं, काली स्याही लिख पाती है? इसको पाने को वीरों ने, खून की नदी बहाई जाती है यह कहते कहते वक्ता की, आंखों में खून उतर आया मुख रक्त वर्ण हो दमक उठा, चमकी उनकी रक्तिम काया आजानु बाहु ऊंचा करके, वे बोले रक्त मुझे देना इसके बदले में भारत की, आज़ादी तुम मुझसे लेना हो गई सभा में उथल पुथल, सीने में दिल न समाते थे स्वर इंकलाब के नारों के, कोसों तक झाए जाते थे हम देंगे देंगे ख़ून, स्वर बस यही

राष्ट्रवाद के लिए; राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता करे

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राष्ट्रवाद के लिए; राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता करे अरविन्द सीसौदिया हमारी स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रपति पद का कितना महत्व है, यह समझने के लिए हमें 25 जून 1975 की रात्रि 11 बजकर 45 मिनिट पर, तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इन्दिरा गांधी के कहने पर, लगाये गये आपातकाल को समझना होगा। जिसमें राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत आंतरिक आपातकाल लगा दिया था। जेलों में डाले गये निर्दोषों को न्यायालय मुक्त न कर पाये, इसलिये कि ‘मीसा’ कानून को न्यायालय के क्षैत्राधिकार से बाहर कर दिया गया था। लोगों की जबरिया नसबंदी कर दी गई थी, जबरिया मकान तोड़ दिये गये थे। कोई भी अखबार सरकार के खिलाफ लिख नहीं सकता था, विपक्ष नाम की कोई चीज नहीं रहने दी गई थी। व्यक्तिगत स्वतंत्रता समाप्त हो गई थी। सोचने समझने वाली बात यह है कि ऐसा क्यों हुआ! राष्ट्रपति ने बिना जनता की परवाह किये आपातकाल क्यों लगा दिया! इसके दो कारण थे, पहला कारण तो राष्ट्रपति जनता के द्वारा चुना नहीं जाता जो वह जनता के प्रति जवाबदेह होता........, क्योंकि उसको चुनने वाला निर्वाचक मण्

हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के

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- अरविन्द सिसोदिया  देश ने जो आजादी पाई है, वह बहुत बड़ी कीमत शहादतों के रूप में अदा करके पाई है ..विभाजन के दर्द के बीच पाई है ...अब इसे फिरसे गुलाम बनाने की कोशिशें हो रहीं हैं ...हमें  अपनी आजादी हर हाल में बचा कर रखनी है..इसके लिए चाहे जितनी बड़ी कुर्बानी ही क्यों न देनी पड़े... ---- गाना / Title: हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के -  ham laaye hai.n tuufaan se kashtii nikaal ke चित्रपट / Film: Jaagriti/संगीतकार / Music Director:  हेमंत-(Hemant) गीतकार / Lyricist:  प्रदीप-(Pradeep) / गायक / Singer(s):  Rafi  ---- पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के  अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के  मंज़िल पे आया मुल्क हर बला को टाल के  सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के  -- हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के  इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के  तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के  इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के  --- १) देखो कहीं बरबाद ना होए ये बगीचा  इसको हृदय के खून से बापू ने है सींचा  रक्खा है ये चिराग़ शहीदों ने बाल के, इस देश को... -- २) दुनिया के दांव पेंच स

दो तस्वीरें है हिंदुस्तान की.: ये देश है वीर जवानों का : Top 5 Corruption Scams in India.

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दो तस्वीरें है हिंदुस्तान की...... ------ गाना / Title: ये देश है वीर जवानों का - ye desh hai viir javaano.n kaa चित्रपट / Film: Naya Daur संगीतकार / Music Director:  ओ. पी. नय्यर-(O P Nayyar)  गीतकार / Lyricist:  साहिर-(Sahir)  गायक / Singer(s):  Rafi  ---------- ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का ओ ... ओ ... अति वीरों की ये देश है वीर जवानों का  अलबेलों का मस्तानों का इस देश का यारों ... होय!!  इस देश का यारों क्या कहना  ये देश है दुनिया का गहना -- ओ... ओ... यहाँ चौड़ी छाती वीरों की यहाँ भोली शक्लें हीरों की यहाँ गाते हैं राँझे ... होय!! यहाँ गाते हैं राँझे मस्ती में मस्ती में झूमें बस्ती में -- ओ... ओ... पेड़ों में बहारें झूलों की राहों में कतारें फूलों की यहाँ हँसता है सावन ... होय!! यहाँ हँसता है सावन बालों में खिलती हैं कलियाँ गालों में -- ओ... ओ... कहीं दंगल शोख जवानों के कहीं कर्तब तीर कमानों के यहाँ नित नित मेले ... होय!! यहाँ नित नित मेले सजते हैं नित ढोल और ताशे बजते हैं -- ओ... ओ... दिलबर के लिये दिलदार हैं हम दुश्मन क