कविता - भाग जाएगा अन्याय का शैतान


कविता - भाग जाएगा अन्याय का शैतान!

सत्ता के सिंहासन पर बैठे,
लोभ के भूखे नामदार,
जनता की खुशहाली छीन-छीनकर
भरते जाते अपना कोष अपार।

क़ानून बना उनका खिलौना,
इंसाफ़ हुआ बाजारू माल,
सच की लाशों पर चलते हैं
ये नक़ाबपोश जनसेवक काल।

चुनाव बने अब मोल-भाव,
वोट की बोली लगती खुलकर,
लोकतंत्र की चादर ओढ़े
नाच रहे हैं लुटेरे  मिल मिल कर।

धर्म बांटा जाती बाँटी, बाँट रहे इंसान
मेरी सरकार बन जाये की खातिर,
आराजकता का बना रहे माहौल,
देश से गद्दारी करके गर्व से कहते,
“हम ही हैं राष्ट्र के रखवाले महान!”

पर सुन लो, इतिहास लिखेगा
हर छल, हर झूठ, हर अपमान,
जब फूटेगी जनता की गर्जना,
भाग जाएगा अन्याय का शैतान!

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, मास्को जेल में..?

‘‘भूरेटिया नी मानू रे’’: अंग्रेजों तुम्हारी नहीं मानूंगा - गोविन्द गुरू

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

हमारा देश “भारतवर्ष” : जम्बू दीपे भरत खण्डे

कविता - हिंदू एकता

Pandit Deendayal Upadhyaya : ' A Rashtra Dharmaa'

महात्मा गांधी का वंशवृक्ष Family tree of Mahatma Gandhi