कविता - भगवान तुम्हारे साथ लड़ेगा



कविता - भगवान तुम्हारे साथ लड़ेगा 

अपनो से लड़ने की मुश्किल,
महाभारत से चली आई है।
अन्यायी अत्याचारियों ने,
इस कमजोरी को अपनी ताकत बनाई है।
इसलिए लड़ना भिड़ना और जितना होगा।

चुप्पियों को ढाल बनाकर
हम बहुत दूर तक चले थे,
पर इतिहास याद दिलाता है,
कि अन्याय से बचा नहीं जा पाता है,,
उसके विरुद्ध खड़े होकर ही
मनुष्य अपना धर्म निभाता है।

उनकी ताकत, हमारी झिझक में है,
उनकी जीत, हमारे डर में है,
और हमारा हर छोटा साहस
उनके साम्राज्य की दीवार में
पहली दरार बन जाता है।

भय की बेड़ियाँ तोड़ो अब,
संकल्प हथियार बन जाओ,
झूठ की परछाइयों पर
सत्य का प्रकाश चढ़ओ ।
हार से मत डरो, तभी जीत पाओगे।

 बुझे हुये साहस की 
फिर से जगाना होगा,
हार मान लेने से पहले
लड़ना ही होगा...
कदम जब जुनून से भरेंगे,
तो रास्ते खुद बन जाएँगे।

अन्यायी के हर छल के आगे
हम सत्य की लौ बन जाएँगे,
और यही विरासत गीता से मिली है
अन्याय के विरुद्ध उठ खड़े होने की,
उठो उठो और उठो 
भगवान तुम्हारे साथ लड़ेगें
यह विश्वास मन रखना।
जय भी होगी विजय भी होगी।

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