कविता - क्यों न कहें मोदी है ईश्वर के समान

मोदी हैं ईश्वर के समान 


राज सिंहासन पर बैठा था वो,
सोच रहा था बहन-बेटीयों की वेदना का समाधान ,
घर घर शौचालय बनवा डालूँ , दूँ उनको सम्मान।

यह मोदी ही था, जिसने पीड़ा हरी, किया समाधान !
क्यों न कहें मोदी है ईश्वर के समान...।

नारी के आँसू देखे उसने, बदली उनकी तकदीर,
घूंघट के पीछे दबी आवाज़ों को मिली जैसे जागीर,
नारी सशक्तिकरण की लौ उसने जलाई, 
बहुत सारी योजनाएं बनवाई, तीन तलाक हटाया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ लाया, 
कदम-कदम पर मातृशक्ति का साथ निभाया, जैसे कोई रखवाला प्यारा।

गाँव-गाँव तक पहुँची उसकी योजनाओं की उड़ान,
भूखे को भोजन, बेघर को घर का नया सम्मान,
देशहित को पूजा समझ, दिन-रात वो करता काम  ,
वह अपने कर्मों से गढ़ रहा भारत स्वाभिमान।

यही वजह है, वह जन -जन की आवाज बना 
नेता नहीं, देशभक्त है, जनता का सच्चा रक्षक है ,
इतना किया काम कि अमर हो गया नाम ,
सच ही तो है, मोदी हैं ईश्वर के समान ।


टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

आन बान और शान का पर्व भुजरिया

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

Instead of Opposing the RSS, Intolerant Americans Should Look Within — Arvind Sisodia

अर्द्धनारिश्वर स्त्री, समान अस्तित्व का सम्मान

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

दुनिया भर की धार्मिक संस्कृति में हिन्दू धर्म की झलक World Sanatan Dharma

असहिष्णु अमेरिकियों को अपने भीतर झांकना चाहिए - अरविंद सिसोदिया

RTI द्वितीय अपील

मोदी क्यों जरूरी है