कविता - ये कैसा विपक्ष आया



कविता - “ ये कैसा विपक्ष आया ”

ये कैसा विपक्ष आया,
संसद को लंगूरी कूद बनाया,
जहाँ नीति पर चर्चा होनी,
वहाँ जन विरोधी हंगामा बरपाया ।
==1==
सरकार को घर में गाली, विदेश में गाली,
सीमाएँ सब लांघी, शब्दों में शालीनता खाली।
अपने आपको हुकूमत पर तानाशाह बनाया,
बचकानी हरकतों से देश का मान गिराया 
===2==
लोकतंत्र को लोफरतंत्र बनाया,
संविधान का मोल गंवाया।
जनता की आशा, सम्मान सब,
दल की चाहत में डुबाया।
===3===
देश के हित को छोड़ा पीछे,
कुर्सी के खेल में उलझे सींचे।
मर्यादा का मखौल उड़ाया,
स्वार्थ का झंडा ऊँचा खींचे।
===4===
ये कैसा विपक्ष आया रे,
जो आग लगाकर ताली बजाया रे।
जनता बोले — शर्म करो अब,
भारत माँ ने तुमको बुलाया रे।
=== समाप्त ====

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

God is within us and also beyond us — Arvind Sisodia

Sangh Work is a Sacred Divine Mission; Whoever Obstructed It Was Reduced to Naught – Arvind Sisodia

क्रांतिपुत्र अमर शहीद मंगल पाण्डे : मे सौ जन्मों तक भारतमाता के लिये अपना बलिदान करता रहूं

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, मास्को जेल में..?

कविता - पूरे ब्रह्माण्ड में एक अकेली, अपनी धरती माता है

मेवाड़ सिसोदिया राजवंश का संक्षिप्त इतिहास