कविता - भगवान ही राह दिखाएगा

वक़्त-ए-ज़रूरत कोई काम न आएगा,
उस ईश्वर का ध्यान करो,
जिसने तुम्हें बनाया,
वही पार लगाएगा।

संसार की इस भीड़ में,
राहें भटकती जाती हैं,
मन की उलझी डोरें फिर
केवल वही सुलझाएगा।

जब अंधेरा चारों ओर हो,
और उम्मीदें धुंधलाने लगें,
एक दीपक बनकर भीतर से
उसका ही प्रकाश जगमगाएगा।

सुख में जिसका स्मरण न हो,
दुख में जिसे पुकारें हम,
उस दयालु की कृपा देखो,
हर क्षण वही साथ निभाएगा।

लोभ–मोह की लहरें चाहे
कितनी भी बड़ी क्यों न हों,
आस्था की नाव संभालकर
वह तट तक पहुँचाएगा।

इसलिए हर श्वास में उसका
नाम सदा बसाए रखना,
कर्म पथ पर चलते रहना,
भगवान ही राह दिखाएगा।

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

महाबलिदानी राजा मोरध्वज : जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का अभिमान तोड़ा

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

बूंदी रियासत के पराक्रमी शासक, Bundi State

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

कविता - हर मुश्किल के सामने साहस अभी से,

कविता - आओ एकजुट हो जाएंगे

हिन्दु भूमि की हम संतान नित्य करेंगे उसका ध्यान

हिंदू राजनीतिक आत्मविश्वास का सुदृढ़ीकरण ही मोदी युग है - अरविन्द सिसोदिया

श्री चांदमारी बालाजी मंदिर मार्ग कोटा की समस्या व समाधान Chandmari Balaji Kota