राहुल गांधी की अस्वीकार्यता छुपाने की नौटंकी मात्र है ‘वोट चोरी’ का सगूफ़ा — अरविन्द सिसोदिया



राहुल गांधी की अस्वीकार्यता छुपाने की नौटंकी मात्र है ‘वोट चोरी’ का सगूफ़ा — अरविन्द सिसोदिया

कोटा , 8 नवम्बर। कांग्रेस के सर्वेसर्वा राहुल गांधी द्वारा हाल में लगाए गए “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर भाजपा राजस्थान मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश सहसंयोजक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अरविन्द सिसोदिया ने इन आरोपों को सुनियोजित झूठ करार देते हुये कहा कि " वास्तविकता में "वोट चोरी का शगुफा" कांग्रेस और कांग्रेस राजकुमार राहुल गाँधी की जन अस्वीकार्यता को छुपाने की नौटंकी मात्र है। ” 

सिसोदिया नें कहा कि “ जब से विदेशी इटालियन अंग्रेज कांग्रेस के नेतृत्वकर्ता बने हैँ तभी से कांग्रेस भारत के लोगों में अस्वीकार्य होती चली गईं है। कांग्रेस को 1984 के बाद से आज तक़ कभी लोकसभा में बहुमत नहीं मिला है। गत तीन लोकसभा चुनावों से वह तीन अंकों में भी नहीं पहुंच रही है। " उन्होंने कहा कि " विशेषकर राहुल गांधी के नेतृत्व की जन अस्वीकृति को छिपाने के लिए और उन्हें जबरिया अग्रणी बनाये रखने के लिए दिगभ्रर्मित करने वाली मनगढ़न्त और अप्रमाणित कहानियाँ परोसी जा रहीं हैं। जो कुछ घंटे बाद ही काल्पनिक साबित होती हैँ। जिनका कोई जमीनी सत्य नहीं है।”

प्रत्येक बूथ पर राजनैतिक दल का प्रतिनिधि होता है 

सिसोदिया नें कहा कि " निर्वाचन आयोग की निर्वाचन प्रणाली में सभी चुनावी कार्य राज्य सरकारों के कर्मचारियों द्वारा ही संपादित किए जाते हैं। हर मतदान केंद्र पर राजनीतिक दलों को बूथ लेबील एजेंट नियुक्त करने का अधिकार होता है। जो सभी गतिविधियों का सझीदार और सहमतिकर्ता होता है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अधिकृत एजेंट नामांकन, मतदान, और मतगणना के हर चरण में शामिल रहते हैं। किसी भी अनियमितता पर वे तत्काल आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। किन्तु गांधी के किसी भी आरोप पर, स्थानीयस्तर के कोंग्रेसियों की कोई आपत्ति नहीं रही है। यह मात्र शगुफा है जो खुद की विफलता को छुपाने के उद्देश्य से कुटरचित है। "

राहुल खुद के संगठन की विफलता उजागर कर रहे हैँ 

अरविन्द सिसोदिया ने कहा “यदि राहुल गांधी के आरोप सही होते, तो उनके बूथ एजेंट उसी समय आपत्ति दर्ज करते। आपतियाँ कहीं भी दर्ज नहीं हैँ। इस तरह से तो यह साबित होता है कि पूरे पूरे प्रदेश में उनका संगठन नाकाबिल है, या अस्तित्व में ही नहीं है, जिसने आपत्तितक दर्ज नहीं कर वाई। और चुनाव खत्म होने के महीनों बाद राहुल गाँधी का टीवी कैमरों के सामने, अपनी विफलता को छुपाने के लिए फर्जी आरोप लगाना केवल राजनीतिक दिखावा है। खुद की विफलताओं से ध्यान भटकना है। ”

सिसोदिया नें आरोप लगाया कि " राहुल गांधी के आरोपों से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस पार्टी का संगठनिक ढाँचा धरातल पर बेहद कमजोर हो चुका है। जो काम स्थानीय बी एल ए -1 या बी एल ए -2 को अथवा उनके जिला स्तरीय पदाधिकारीयों को चुनाव से पहले और दौरान करना चाहिए था, वह राहुल गांधी स्वयं कई कई महीनों बाद कर रहे हैं। वह भी झूठा साबित हो रहा है अर्थात जो आरोप उन्होंने लगाये उसकी भी जमीनी सच्चाई उन्हें पता नहीं है। यदि गाँधी जमीनी हकीकत परखते तो इस तरह के मज़ाकिया आरोप ही नहीं लगाते। " 
चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को नकारा 

सिसोदिया नें कहा कि " निर्वाचन आयोग लगातार राहुल गांधी के आरोपों को “अप्रमाणित और निराधार” बता रहा है। किन्तु कांग्रेस ने एक भी आरोप प्रमाणित नहीं किया और न ही वै इस हेतु किसी अदालत में गये। जो स्वयं साबित करता है कि आरोपों की असत्यता से कांग्रेस भी परिचित है। " उन्होंने कहा कि " कांग्रेस की अस्वीकार्यता को छुपाने के लिए चुनाव आयोग की पवित्रता पर आक्रमण करना उसे धमकाना और संदिग्ध करना बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य राजनैतिक पतन है। आयोग को बली का बकरा बनाने के षड्यंत्र को देश कतई बर्दास्त नहीं करेगा । "

सिसोदिया नें कहा " चुनाव प्रणाली से जो जमीनीस्तर पर परिचित हैँ वै जानते हैँ कि त्रुटियां टाइपिंग गलतियाँ होती रहती हैँ और उन्हें ध्यानाकर्षण द्वारा निवारण करने की प्रक्रिया से ही संभव होता है। किन्तु तथ्य यही है कि कांग्रेस के किसी बूथ एजेंट ने चुनाव के दौरान कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। " 

कांग्रेस अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने में लगी है 

अरविन्द सिसोदिया के अनुसार, " राहुल गांधी की “वोट चोरी” की कहानी “स्वीकार्यता के संकट से जूझते नेता का विफलता से ध्यान हटाओ अभियान” मात्र है। " उन्होंने कहा कि “ तुष्टिकरण की अति के कारण कांग्रेस बार-बार चुनाव हार रही है, इन लगातार की हारों से उनका आत्मविश्वास टूट गया है। जनता ने जब से उन्हें नकार दिया, तब से ही वे चुनाव प्रक्रिया पर ही उंगली उठा रहे हैं। कभी ई व्ही एम पर प्रश्न उठाते हैँ तो अब वोट चोरी का शगुफा उठा रहे हैँ । ” 

उन्होंने कहा कि " लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठा कर केवल अपनी पराजयों को छिपाने का षड्यंत्र गलत तरीका है एक समय कांग्रेस भी लगातार 1947 से 1977 तक़ सत्ता में थी किन्तु तत्कालीन विपक्ष नें कभी हल्के आरोप नहीं लगाये थे। "

भवदीय 
अरविन्द सिसोदिया 
9414180151

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