कविता — “कौन ढूँढता है ईश्वर को ?”



कविता — “कौन ढूँढता है ईश्वर को ?”

मनोकामनापूर्ति के बाज़ार में
ईश्वर कहाँ मिलता है,
जहाँ हर दुआ की कीमत
इच्छाओं की सूची से लगाई जाती है।

वह जानता है
कि मुझे कोई नहीं ढूँढ रहा—
ढूँढ रहे हैं तो बस
अपनी थकी हुई अभिलाषाओं के
त्वरित समाधान।

सभी चाहते हैं
बिना मेहनत सपनों की पूर्ति,
बिना संघर्ष सुख का वरदान,
जैसे ईश्वर कोई व्यापारी हो
जो सौदे में खुशियाँ बाँट दे।

पर वह तो मौन में बैठा
बस देखता है—
कौन उसे पुकारता है
और कौन सिर्फ अपनी चाहतों को।

सच तो यह है—
ईश्वर मिल भी जाता है,
पर खोज करने वाले कम हैं;
माँगने वाले बहुत।


टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

भारतीय संस्कृति के अजर अमर अष्ट-चिरंजीवी

राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव,कैंसर का 'झाड़ा'

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए हिंदुत्व में विभाजन के षड्यंत्र — अरविन्द सिसोदिया

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

देश में पत्रकारिता के लिए एक ठोस नियामक ढांचा हो - हाईकोर्ट

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

हिन्दु भूमि की हम संतान नित्य करेंगे उसका ध्यान

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती koshish karne walon ki kabhi haar nahin hoti