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SWAMI VIVEKANANDA : THE SAGES OF INDIA

SWAMI  VIVEKANANDA : THE SAGES OF INDIA http://www.ramakrishnavivekananda.info/vivekananda/volume_3/lectures_from_colombo_to_almora/the_sages_of_india.htm In speaking of the sages of India, my mind goes back to those periods of which history has no record, and tradition tries in vain to bring the secrets out of the gloom of the past. The sages of India have been almost innumerable, for what has the Hindu nation been doing for thousands of years except producing sages? I will take, therefore, the lives of a few of the most brilliant ones, the epoch-makers, and present them before you, that is to say, my study of them. In the first place, we have to understand a little about our scriptures. Two ideals of truth are in our scriptures; the one is, what we call the eternal, and the other is not so authoritative, yet binding under particular circumstances, times, and places. The eternal relations which deal with the nature of the soul, and of God, and the relations between souls and God

स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रेरणा-स्रोत : स्वामी विवेकानंद

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Daily Katha ब्लॉग से साभार http://katha.vkendra.org/2013/04/blog-post_22.html Monday, 22 April 2013 ॐ वीरेश्वराय विद्महे विवेकानन्दाय धीमहि । तन्नो वीर: प्रचोदयात् ।                            स्वामी विवेकानंद : स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रेरणा-स्रोत सन १८९२ में अपने भारत-भ्रमण के दौरान स्वामी विवेकानंद ने देखा कि ब्रिटिश शासन की शोषक नीतियों के कारण हमारे देश के किसानों और व्यापारियों की दशा दयनीय हो गई थी। जब वे पश्चिमी विश्व में गए, तो उन्हें यह अनुभव  हुआ कि भारत को ही पश्चिमी जगत का मार्गदर्शन करना है, क्योंकि, भले ही पश्चिम समृद्ध प्रतीत होता हो, किन्तु आध्यात्मिकता के अभाव में वह बिखरकर नष्ट हो जाएगा। स्वदेश लौटने पर उन्होंने भारत का आह्वान करते हुए कहा, “भारत जागो! विश्व जगाओ!!” स्वामी विवेकानंद जानते थे कि कोई भी राष्ट्र किसी गुलाम देश से शिक्षा ग्रहण नहीं करेगा। इसलिए नियति द्वारा भारत के लिए निर्धारित, मानवतावादी भूमिका को निभाने के लिए, ‘भारत की स्वतंत्रता’ एक आवश्यक चरण थी। भारत का राष्ट्रवाद ‘आध्यात्मिकता और सनातन धर्म’ ही है, जहां मनुष्य को संभावित दिव्य स्वरू

मोदी रैली की में गूंजा ‘ शेर आया, शेर आया '

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आज तक की रिपोर्ट रैली में गूंजा ‘ शेर आया, शेर आया आशीष मिश्रा [Edited By: अमर कुमार] | लखनऊ, 20 अक्टूबर 2013  http://aajtak.intoday.in/story/modi-revives-bjp-in-up-1-744995.html पिछले एक दशक के दौरान यूपी की राजनीति में हाशिए पर चली गई बीजेपी को 19 अक्टूबर को कानपुर के गौतमबद्घ पार्क में आयोजित पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की धमाकेदार रैली ने संजीवनी दे दी है. कानपुर में मोदी को सुनने उमड़ी करीब तीन लाख लोगों की भीड़ ने बीजेपी नेताओं के बीच मोदी नाम का डंका बजा दिया है. राममंदिर आंदोलन के बाद यह पहला मौका था जब यूपी में बीजेपी की रैली में इतनी बड़ी भीड़ जुटी हो. मोदी के साथ मंच में मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री और एटा से निर्दलीय सांसद कल्याण सिंह, कलराज मिश्र, ओमप्रकाश सिंह के साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बखूबी यह संदेश देने की कोशिश की कि यूपी में पार्टी के भीतर किसी प्रकार का अंतर्विरोध नहीं है और कार्याकर्ताओं के साथा पार्टी के सभी बड़े नेता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प कर चुके हैं. कानपुर की रैली में पार्टी नेताओं

अखंड सौभाग्य का व्रत : करवा चौथ

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अखंड सौभाग्य के लिए करवा चौथ व्रत - रश्मि शर्मा दैनिक भास्कर से साभार मंगलवार २२ अक्टूबर २०१३ को करवा चौथ है। यह व्रत कार्तिक कृष्ण की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को किया जाता है। यह पर्व दंपती के लिए एक?दूसरे के प्रति प्रेम, त्याग एवं उत्सर्ग की चेतना लेकर आता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां पूर्ण श्रृंगारित होकर भगवान गणेश एवं चंद्रमा से अपने अखंड सौभाग्यवती होने की प्रार्थना करती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं कुछ भी ग्रहण नहीं करती एवं अखंड रूप से भगवान से अपने पति की मंगल कामना करती है एवं पूर्ण निष्ठा से इस व्रत के पालन में तत्पर रहती है। इस दिन केवल चंद्र ही नहीं बल्कि शिव?पार्वती, कार्तिकेय का भी पूजन होता है। शिव?पार्वती का दांपत्य एक आदर्श दांपत्य है, इसलिए उनका पूजन किया जाता है। जैसे घोर तप कर पार्वतीजी ने अखंड सौभाग्य श्ंाकरजी के रूप में पाया था, वैसा ही सौभाग्य सभी को मिले इसलिए इस दिन गौरी पूजन होता है। महाभारत काल में द्रौपदी ने भी अर्जुन की सुरक्षा के लिए इस व्रत को भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर किया था एवं अर्जुन को वापस सुरक्षित पाया था। इस पूजन में एक कथा भी श्रवण