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कविता - जनमत रे तू जाग

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“ जनमत रे तू जाग ”  आसमान पर उगता सूरज कहता, जनमत रे तू जाग। सत्ता का मेला है, लोकतंत्र का खेला है, वादों की दुकानें, झूठ यहाँ पकवान । अधिकारों की थाली में परोसा जाता आसमान । गरीब की शवयात्रा बन गया, पूंजीवाद का शैतान। ===1=== नेता भाषण देता, लंबी लंबी बांहे फैलाये, उपदेशो के ग्रंथ लिए, उपकारों का शास्त्र पढ़ाये। भगवान से भी बढ़ कर अपने को बताये। पर सम्पन्नता के पहाड़ कहां से आये यह नहीं बताय। ===2=== कलम के सौदागर, खबरों का लगाएँ दाम, सच्चाई का गला घोंटें और कहलाएँ महान। कानून की आँखों पर चढ़ा भ्रष्टाचारी चश्मा, गरीब न नज़र आए, अमीर की चले दुकान । ===3=== नेता जी के भाषण में शब्दों की भरमार, सतकर्मों में खाली दफ्तर,आंकड़ों की सरकार। लोकतंत्र की कुर्सी पर बैठे पूंजीवादी परिवार , जनता चुनाव मे,कार्यकर्ता जिंदाबाद में,पर दलाल है खास। ===4=== नौकरशाही की गाड़ी में घूस का पेट्रोल भरा , बिना चढ़ाए तेल,न खिसके एक इंच कागज पड़ा । पूछ रहे कच्चे पक्के निर्माण,कब आएगा सुधार, टेंडरों में रिश्तेदारी, कमीशन ही है असली आधार। ===5=== अन्याय का न्याय मंदिर, तारीख़ों का भंडार, दोषी की मौज, प...

कविता - न्याय क्यों बाज़ार बन गया

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कविता - न्याय क्यों बाज़ार बन गया  (एक विद्रोही कविता-संग्रह में प्रमुख रचना) लेखक: अरविन्द सिंह सिसोदिया  उन सभी आवाज़ों के नाम, जो न्याय माँगते-माँगते ख़ामोश कर दी गईं। भूमिका (Preface) यह कविता उस सत्य की प्रतिध्वनि है जिसे अदालतों ने फाइलों में बंद कर दिया, और सत्ता के गलियारों ने पैसे की बोली में बेच दिया। यह रचना केवल शब्द नहीं — अन्याय के विरुद्ध खड़ी होती जनता की सांस है। कविता - न्याय क्यों बाज़ार बन गया  वह सोचता था, वहाँ न्याय होगा, पर वहाँ तो पग-पग पर पैसों का खेल है, टाइप से लेकर टाइम तक़ रेलमपेल है, झूठ का पहले से लिखा हुआ दस्तावेज है, अड़गों का, तारीखों का, उलझाने का अजीब खेल है। अन्याय का पोषण होता,  जानबूझकर न्याय से धोखा होता। छोटी-छोटी बातों और बकवासों की ओट लेकर, न्याय को अन्याय के साथ दसकों घसीटा जाता  कैसे कहें इसे न्याय का मंदिर, यहाँ तो न्याय को बली पर चढ़ा दिया जाता है। क्या कोई बताएगा,न्याय क्यों बाज़ार बन गया??? ===1=== कमियों का ज़िक्र तो करना पड़ेगा, अन्याय की जवाबदेही तो तय होगी, पर किस अदालत में? किस तारीख़ पर? यह कोई नही...

Justice Delayed Is Justice Denied. मृत्यु के बाद आया अंतिम फैसला, न्याय व्यवस्था पर सवाल

men terminated from job get justice after 34 year not alive to celebrate 1991 में नौकरी गई, 33 साल अदालतों के चक्कर काटने के बाद हुई मौत, 34वें साल 'न्याय' मिल गया साल 1991 में Dinesh Chandra Sharma को नौकरी से निकाला गया. उसी साल उन्होंने Labour Court का दरवाजा खटखटाया. लेबर कोर्ट से मामला High Court की सिंगल बेंच में गया, फिर डबल बेंच और उसके बाद Supreme Court के पास. सुप्रीम कोर्ट में न्याय मिलते मिलते उनकी जिंदगी खत्म हो गई. सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने में डीके शर्मा को 34 साल लग गए.  29 दिसंबर 2025 एक चर्चित कानूनी कहावत है- 'Justice Delayed Is Justice Denied.' इसका अर्थ है कि न्याय मिलने में बहुत देरी होना न्याय नहीं मिलने के बराबर है. यह कहावत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक हालिया फैसले पर सटीक बैठती है, जिसमें जिंदा रहते याचिकाकर्ता को न्याय नहीं मिला. 34 साल तक अदालतों का चक्कर काटते-काटते उसकी मौत हो गई. लेकिन मौत के साल भर बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला दे दिया. क्या था पूरा मामला? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1978 में दिनेश चंद...

कविता - चमचावाद के प्रभाव में

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कविता - चमचावाद के प्रभाव में  चमाचावाद के प्रभाव में, नैतिकता के अभाव में, जब-जब कोई संगठन चलेगा, पूछो न पूछो,  उसे डूबने से कौन रोकेगा... ? ===1=== जहाँ सच कहना अपराध बने, झूठ पहरेदार बनें, योग्यता को किनारे धकेल, चाटुकारिता की नाव चले, स्वार्थ के डंके बजें और सच्चाई की कोई न सुने, इस अनचार में, उसे डूबने से कौन रोकेगा ? ===2=== नेताओं के कानों को, सिर्फ़ अपने गुणगान चाहिए, जनता की आवाज़ें कौन सुने, दरवारी चाटुकार चाहिए, आँखों पर चढ़ गईं स्वप्रशंसा की पट्टी, सच कैसे दिखेगा, इस स्वघोषित अंधकार में, उसे डूबने से कौन रोकेगा ? ===3=== जहाँ प्रश्नों पर पहरा हो और विचारों पर लगें ताले, वहाँ पतन निश्चित होता है, फिर भी सब फरेब के मतवाले, स्वार्थ के चरणस्पर्श में,स्वाभिमान कहां टिकगा, झूठ की जाजम पर बैठे को, डूबने से कौन रोकेगा ? ===4=== व्यक्तिगत पूजा की आँधी में, लोकतंत्र खो गया, हक़ की आवाजें थम गईं,आनाचारमय व्यवस्था हो गईं, इतिहास लिखेगा परिणाम,असत्य ही जीत कर आया, अनीति के दृष्टिदोष जिसे ,उसे डूबने से कौन रोकेगा ? ===5=== चमाचावाद के प्रभाव में, नैतिकता के अभाव में,...

राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और आत्मविश्वास से भरा रहा 2025 - नरेन्द्र मोदी

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प्रधानमंत्री मोदीजी के द्वारा 28 दिसंबर 2025 को दिये गये संबोधन का पूरा पाठ भी नीचे दिया गया है, जो हमें बहुत सी महत्वपूर्ण बातों को बताता है...! राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और आत्मविश्वास से भरा रहा 2025 - नरेन्द्र मोदी 28 दिसंबर 2025 की "मन की बात" में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पूरे साल की उपलब्धियों, राष्ट्रीय सुरक्षा, खेल, विज्ञान, संस्कृति और युवाओं की भागीदारी पर बात की। उन्होंने "ऑपरेशन सिंदूर" को देश के आत्मसम्मान का प्रतीक बताया और कहा कि भारत अब अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करता। वहीं प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में 2026 के लिए नए संकल्पों का आह्वान भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मन की बात की शुरुआत देशवासियों का अभिवादन किया और कहा कि 2025 की कई यादें उनके मन में हैं, जिन पर हर भारतीय को गर्व है. उनके शब्दों में, "2025 ने हमें ऐसे कई पल दिए, जिन पर हर भारतीय को गर्व हुआ." PM Modi Mann Ki Baat: मन की बात के 129वें एपिसोड में क्या बोले PM मोदी ? राष्ट्रीय सुरक्षा पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ...

सनातन धर्म के प्रतीक चिन्ह sanatan

सनातन धर्म के प्रतीक चिन्ह   ​सनातन धर्म, जिसे विश्व की सबसे प्राचीन जीवन पद्धति माना जाता है, केवल विश्वासों का समूह नहीं बल्कि प्रतीकों और विज्ञान का एक गहरा समन्वय है। यहाँ 'प्रतीक' का अर्थ केवल एक चित्र नहीं, बल्कि 'ब्रह्म' को समझने का एक माध्यम है। उपनिषदों के अनुसार, "चिह्नं विना न पूज्यते" अर्थात् बिना प्रतीक के ध्यान या पूजा संभव नहीं है, क्योंकि निराकार ईश्वर को समझने के लिए मन को किसी आधार की आवश्यकता होती है। ​     ​1. ॐ (ओम्): ब्रह्मांड का अनाहत नाद ​'ॐ' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड की प्रतिध्वनि है। इसे 'अक्षर ब्रह्म' कहा जाता है। मांडुक्य उपनिषद में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है। ​आध्यात्मिक व्याख्या: 'ॐ' तीन ध्वनियों से बना है— अ, उ, और म। 'अ' सृष्टि (ब्रह्मा) का, 'उ' स्थिति (विष्णु) का, और 'म' लय या संहार (महेश) का प्रतीक है। इसके ऊपर स्थित चंद्र-बिंदु 'तुरीय' अवस्था को दर्शाता है, जो जन्म और मृत्यु के चक्र से परे मोक्ष की स्थिति है। ​वैज्ञानिक आधार: आधुनिक विज्ञान (Quantum Phy...

राहुल गांधी भारत-विरोधी वैश्विक शक्तियों के प्रवक्ता - सुधांशु त्रिवेदी

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राहुल गांधी भारत-विरोधी वैश्विक शक्तियों के प्रवक्ता - सुधांशु त्रिवेदी Salient points of press conference of BJP National Spokesperson Dr. Sudhanshu Trivedi (M.P.) द्वारा डॉ. सुधांशु त्रिवेदी - 27-12-2025 भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद डॉ सुधांशु त्रिवेदी की प्रेस वार्ता के मुख्य बिंदु सैम पित्रोदा द्वारा कांग्रेस के जॉर्ज सोरोस द्वारा फंडेड संगठनों की श्रृंखला से संबद्ध ग्लोबल प्रोग्रेसिव अलायंस (GPA) के सदस्य होने और राहुल गांधी के इस अलायंस की प्रेसीडियम के सदस्य होने के खुलासे से स्पष्ट हो गया है कि राहुल गांधी भारत-विरोधी वैश्विक शक्तियों के भारतीय राजनीति में स्थायी प्रतिनिधि व प्रवक्ता बन गए हैं। ******************** जब एक पत्रकार ने सैम पित्रोदा से राहुल गाँधी द्वारा विदेशी दौरों में भारत विरोधी लोगों से मिलने और सोरोस से फंड पाने वाली संस्थाओं के कार्यक्रम में शरीक होने को लेकर प्रश्न पूछा तो सैम पित्रोदा ने कहा कहा - We don’t care. तो फिर सैम पित्रोदा और कांग्रेस बताये कि Whom you care? Is he sitting abroad? ******************** कांग्रेस यह बत...

"मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम अनिवार्यतः जोड़े जाएँ, नागरिकहितों पर कोई लापरवाही बर्दास्त नहीं होनी चाहिए " – अरविन्द सिसोदिया

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"मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम अनिवार्यतः जोड़े जाएँ, नागरिकहितों पर कोई लापरवाही बर्दास्त नहीं होनी चाहिए " – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 27 दिसंबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं भारत-तिब्बत सहयोग मंच के प्रांतीय महामंत्री अरविन्द सिसोदिया ने मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम छूटने की लगातार मिल रहीं शिकायतों को अत्यंत गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि " भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को मताधिकार प्रदान करता है। इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही अस्वीकार्य है। ऐसे मामलों पर तत्काल विभागीय कार्यवाही होनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि " प्रारूप के प्रकाशित हुये लंबा समय गुजर गया किन्तु, हटाए जाने वाले नामों के संबंध में नोटिस अभी तक लोगों तक नहीं पहुँचे हैं, जबकि जवाब देने की अंतिम तिथि भी निकट ही निर्धारित है। यह स्थिति नागरिकों के अधिकारों से खिलवाड़ है।" सिसोदिया ने आगे कहा “विशेष पुनरीक्षण के प्रथम पत्रक में दर्ज बूथ नंबर अब प्रारूप सू...

कविता - कार्यकर्ता तो ठगा जाता है

कविता - कार्यकर्ता तो ठगा जाता है  खूब भागा, खूब दौड़ा, अपनों को छोड़ भगवान भरोसे, नेताओं की जयकारों में रमता रहा, झूठे सपनों के पीछे भागता रहा। कार्यकर्ता था भूखा प्यासा डटा रहा। पर सच यही था कि वह ठगा गया। ===1=== चिल्लाते नारों में उसका जोश था, भीड़ में रहकर संख्या बढ़ाता रहा, तालियों की गड़गड़ाहट में खोता रहा, जीवन नेताओं के लिए पिरोता रहा। तब पता नहीं था कि वह ठगा गया। ===2=== पर दर्द में कोई साथ न आया , जब मुश्किल ने दरवाज़ा खटखटाया, न नेता था, न लेता था , न वादे थे न भाषण था, न राशन था, न आसन था। तब समझ आया कि वह ठगा गया। ===3=== वक्त के संग वे झूठे साबित हुए, साँसें बोझिल, राह अकेले हुये, आँखें जब सहारे को ढूंढें रहीं थीं, तब समझ आया जीवन का सार, कार्यकर्ता भ्रम में फंसा न समझा कि वह ठगा गया, ===4=== कुल मिला कर अब पार्टी नहीं, परिवार ही आधार है, दुःख दर्द में खडे होकर वे ही करते प्यार हैँ, नारे जयजयकारे नीति सिद्धांत तो सिर्फ बातें हैँ, जो पैसा कमा कर लाता है वही नेताजी को भाता है। कार्यकर्ता तो ठगा गया,कार्यकर्ता तो ठगा जाता है। ===समाप्त===

कविता - अखण्ड भारत का पूरा करो सपना

कविता - अखण्ड भारत का पूरा करो सपना देश अपना था, बाँट गये अंग्रेज! स्वतंत्रता के नाम पर, देश तोड़ गये अंग्रेज!! भागते भागते,सदियों लंबा क्लेश दे गये अंग्रेज!! किस बात की शाबासी दें तुम्हें, देश था अपना और तोड़ गये अंग्रेज!!! ===1=== देश अपना था, हमें वे बांटते रहे, नेता हमारे उनके आगे झुकते रहे, एकता की कोशिश करते रहे, वे इसे हमारी कमजोरी मानते रहे। हमारे नेताओं ने वफादारी भी की ,  पर गद्दारी कर देश तोड़ गये अंग्रेज । ===1=== स्वतंत्रता का सपना सबका था, पर कीमत चुकाई हमने। नेताओं ने हर तरह की मिन्नतें कीं, और जख़्म भी झेल  हमनें ॥ लकीर खींची गैरों ने काग़ज़ पर, खून बहाया गया सड़कों पर हमारा । ===2=== नफ़रत उनकी विरासत, पर क्यों मिली हमें, देश हमारा और सिर भी हमनें ही झुकाया॥ सदियों का क्लेश देकर वे चले अंग्रेज , मुठ्ठी भर थे वे और हम अपार थे, वे डरा कर जीत गये, हमें हरा कर चले गये अंग्रेज ¡ ===3=== आज भी जब दोष ढूँढते हैं हम, आईने से नज़र चुराते हैं। अंग्रेज गए, पर उनके छोड़े हुए विभाजन हम अब भी निभाते हैं॥ अब तो अंग्रेज नहीं हैँ,शौर्य जगाओ अपना  अखण्ड भारत का पूरा करो सपना।...

भजनलाल शर्मा सरकार की ठोस उपलब्धियों से राजस्थान वास्तविक विकास के अग्रपथ पर – अरविन्द सिसोदिया bjp rajasthan kota

भजनलाल शर्मा सरकार की ठोस उपलब्धियों से राजस्थान वास्तविक विकास के अग्रपथ पर – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 18 दिसंबर। भाजपा मीडिया विभाग के कोटा संभाग संयोजक एवं राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्याशी अरविन्द सिसोदिया नें कहा कि " राजस्थान में भाजपा की लोकप्रिय भजनलाल शर्मा सरकार ठोस उपलब्धियों के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। सरकार की नीतियां और निर्णय प्रदेश को स्थाई, समावेशी एवं दूरगामी विकास की दिशा में ले जा रहे हैं, जिससे राजस्थान वास्तविक विकास की राह पर अग्रसर हुआ है। " सिसोदिया नें कहा कि " राजस्थान–मध्यप्रदेश सिंचाई परियोजनाओं सहित सभी लघु एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं के माध्यम से प्रदेश को कृषि के लिए पर्याप्त पानी, औद्योगिक आवश्यकताओं हेतु जल और आमजन के लिए पेयजल की सुविधा में बहुअयामी वृद्धि  की व्यवस्था की जा रही है । यह परियोजनाएं राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ जल संकट का स्थायी समाधान प्रदान करेंगी और प्रदेश को दीर्घकालीन समृद्धि की ओर ले जाएंगी।" सिसोदिया ने बताया कि " सरकार ने पिछले दो सालों में कैनाल सिस्टम...

" प्रधानमंत्री मोदीजी की मृत्यु-कामना " वाली कांग्रेस की हिंसक मानसिकता अक्षम्य अपराध है — अरविंद सिसोदिया bjp rajasthan kota

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" प्रधानमंत्री मोदीजी की मृत्यु-कामना " वाली कांग्रेस की हिंसक मानसिकता अक्षम्य अपराध है — अरविंद सिसोदिया कोटा, 16 दिसंबर। भाजपा राजस्थान के मीडिया विभाग के कोटा संभाग संयोजक एवं राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्याशी अरविंद सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध प्रयोग की जा रही आपत्तिजनक एवं हिंसक भाषा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि " यह कांग्रेस की अराजकतावादी और लोकतंत्र विरोधी मानसिकता को दर्शाती है,जो पूर्णतः अक्षम्य अपराध है। " सिसोदिया ने कहा कि "लोकतांत्रिक प्रक्रिया से निर्वाचित प्रधानमंत्री के विरुद्ध मृत्यु-कामना, हिंसक शब्दावली और अमर्यादित बयानबाजी न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह समाज में घृणा, उकसावे और अस्थिरता फैलाने का कुत्सित प्रयास है। इस प्रकार की भाषा का भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में कोई स्थान नहीं है।"  उन्होंने कहा कि " कांग्रेस जनता द्वारा लगातार अस्वीकृत होने के कारण हताशा और निराशा में अराजकतावादी भाषा का प्रयोग कर रही है। उनकी यह रणनीति संवैधानिक व्यवस्था, लोकतंत्...

शानदार और जानदार भजनलाल शर्मा सरकार से कांग्रेस में भारी बौखलाहट – अरविन्द सिसोदिया bjp rajasthan kota

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शानदार और जानदार भजनलाल शर्मा सरकार से कांग्रेस में भारी बौखलाहट – अरविन्द सिसोदिया " बाड़ेबंदी, लाल डायरी, सत्ता संघर्ष और कुर्सी की सौदेबाजी वाली कांग्रेस को " जनता सबक सिखा चुकी है " – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 14 दिसंबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्याशी एवं भाजपा राजस्थान के मीडिया संपर्क विभाग के सह-संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने भजनलाल शर्मा सरकार के ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरपूर , शानदार - जानदार और जनहितकारी दो वर्ष पूर्ण होने पर कांग्रेस नेताओं द्वारा की जा रही बौखलाहट भरी बयानबाजी पर करारा पलटवार करते हुए कहा कि “पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हों, गोविंद सिंह डोटासरा हों या कोई अन्य कांग्रेसी नेता, उन्हें कोई भी उपदेश देने से पहले यह याद रखना चाहिए कि राजस्थान की जनता ने केवल दो वर्ष पहले ही कांग्रेस को उसके कुशासन, भ्रष्टाचार, सत्ता लोभ, कुर्सी युद्ध और आपसी खींचतान की सजा देते हुये सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया है।” उन्होंने कहा कि “आज जब भजनलाल शर्मा सरकार पारदर्शिता, सुशासन और जनकल्याण के साथ मजबूती से काम कर रह...

कविता - भ्रष्टाचार की गंगा ऊपर से नीचे आती है

भ्रष्टाचार की गंगा भ्रष्टाचार की गंगा ऊपर से नीचे आती है, मैदानों में महानद बन,खेतों तक फैल जाती है! सेवा शुल्क, सुविधा शुल्क भी नाम है इसका, हर उल्टे काम की सीधी चाबी, यह कहलाती है। भ्रष्टाचार की गंगा ऊपर से नीचे आती है!! ===1=== सेवा के नाम पर सौदा, सुविधा का व्यापार है, फ़ाइल–फ़ाइल घूम रहा बस, रिश्वत अब अधिकार है। हर उल्टे काम की चाबी, यही सीधा हथियार है, न्याय भी आँखें मूँद लेता, बस पैसा असरदार है। ===2=== मैदानों में महानद बन, खेतों तक फैल जाती है, मेहनत की हरियाली पर, लूट की रेत बिछाती है। गरीब की सूनी थाली से, पहला निवाला जाती है, दलाल की तिजोरी में, चुपचाप जगह बनाती है। ===3=== आओ अब भ्रष्टाचार से लड़ें, ऊपर से नीचे तक सच की मशाल बनें , हर दरवाजे पर ईमान की पहरेदारी हो, जो इस पाप को रोके, उसकी भागेदारी हो। === समाप्त ===

कविता - चमचा पुराण

शीर्षक : चमचा पुराण  चमचों को छोड़ो, चमचे ही खाली करते हैं, राजनीति के रंगमंच पर,चमचे ही कालिख भरते हैं। ====1==== नेता तो बस मुखौटा है, असली खेल है चमचों का, सच बोले तो भारी उपेक्षा,चुगलखोर की मौज महान है , असली खेल हे चमचों का। ====2==== ये चमचे न विचार न प्रचार, बस स्वार्थ का सवाल, जिसकी दाल में घी ज़्यादा, उसकी जिंदाबाद का नारा, यही खेल हे चमचों का। ====3==== आज इधर, कल उधर,इनका न कोई झंडा न कोई ईमान, जहाँ दिखी मलाई,वहीं लार टपकाई,वहीं  वंदन वहीं अभिनन्दन, यही सच हे चमचों का। ====4==== सच को गाली, झूठ की जयकार,चमचों के स्वार्थधर्म का यही सार। जब नेता गिरता है,संभालते चमचे हैं!ज्योंहि नेता की चलती कम होती, सबसे पहले चमचा फरार। ====5==== ये साथ नहीं, बंटवारा है,ये भीमकाय माया है। नेता की कमजोरी, झूठी जय जयकार, हर साजिश में इनकी लीला अपार, जिस नेता के पास बैठे करता उसकी खाली है, चमचे की चाल निराली है। ====6==== चमचों की जब तक़ होती पहचान, तब तक़ रंगमच बन जाता शमशान, सच का उजाला जब आता सामने, तब तक़ तोता उड़ जाता आसमान में। ====7==== चमचों को छोड़ो, सत्य से स्वयं की जोड़ो, चमचे नेत...

कविता - भारत माँ शर्मिंदा है, राजनीति अब धंधा है।

कविता - भारत माँ शर्मिंदा है, राजनीति अब धंधा है। लोकतंत्र बदल गया, लूटतंत्र की माया है। कमीशन खोरी में पूरा प्रजातंत्र समाया है, भारत माँ शर्मिंदा है, राजनीति अब धंधा है। संविधान किताबों में, सड़कों पर सौदा है। न्याय अंधा नहीं अब, बस चुन चुन कर देता है। कुर्सी की हवस में अब सारे सिद्धांत तार-तार हुये , जनसेवा के मुखौटे रह गये, गिद्धों के व्यापार हुये । सच बोलो तो देशद्रोही, चुप रहो तो समझदार, सवाल पूछना गुनाह है, लूट को कहते उपकार। भूख को आँकड़ों में बाँधा, लाशें फाइल बन गईं, सेवा शुल्क के लालच में, सारी नैतिकता जल गई। कलम की स्याही बिक गई, मीडिया बना दलाल, चीख़ें टीआरपी में डूबीं, मरा ज़मीर बेहाल। शर्म भी अब शर्मिंदा है, आईना झुकने लगा, सत्ता के दरबारों में, सच फाँसी चढ़ने लगा। लेकिन अभी कहानी में, अंतिम अध्याय नहीं, हर ज़ुल्म की उम्र होती है, अंधेरा स्थायी नहीं। जिस दिन जनता जाग उठे, सिंहासन हिल जाएँगे, लूटतंत्र के महलों पर, सच के झंडे लहराएँगे। फिर राजनीति सेवा होगी, फिर बोलेगा संविधान, भारत माँ के माथे पर, लौटेगा फिर से सम्मान।

भजनलाल शर्मा सरकार राजस्थान के लिए गौरवशाली नवयुग साबित हो रही है – अरविन्द सिसोदिया

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भजनलाल शर्मा सरकार राजस्थान के लिए गौरवशाली नवयुग साबित हो रही है – अरविन्द सिसोदिया प्रतिपल राजस्थान की सेवा को समर्पित भजनलाल शर्मा सरकार के दो वर्ष अभिनंदनीय – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 12 दिसंबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन न्यासी एवं भाजपा राजस्थान के मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश सहसंयोजक अरविन्द सिसोदिया ने भाजपा सरकार के राजस्थान में दो वर्ष होने के अवसर पर कहा कि “मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में बनी राज्य सरकार ने केवल दो वर्षों में जनसेवा को केंद्र में रखकर सुशासन और विकास की नई मिसाल कायम की है। सरकार ने पारदर्शी एवं जनसमर्पित कार्यशैली से प्रशासन को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाया है। विकास और उत्थान हेतु किए गए भगीरथ प्रयासों से वे राजस्थान को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।” सिसोदिया ने भजनलाल शर्मा सरकार की जनसेवी प्रतिबद्धताओं की सराहना करते हुए कहा कि “पल-प्रतिपल जनसेवा को समर्पित भजनलाल शर्मा सरकार, राजस्थान में नया इतिहास लिख रही है। यह राजस्थान के मान, सम्मान और स्वाभिमान के साथ–साथ विकास के नवयुग का सशक्त निर्माण ...

भजनलाल शर्मा सरकार की उपलब्धियों को जन जन तक़ पहुंचाएँ – डॉ. अरुण चतुर्वेदी BJP RAJASTHN KOTA

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भजनलाल शर्मा सरकार के दो वर्ष पूर्ण होनें पर भाजपा मीडिया विभाग सक्रिय भूमिका निभायेगा  भजनलाल शर्मा सरकार की उपलब्धियों को जन जन तक़ पहुंचाएँ – डॉ. अरुण चतुर्वेदी कोटा, 12 दिसंबर। भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने राजस्थान भाजपा मीडिया विभाग के संभाग एवं जिला संयोजकों की वर्चुअल बैठक को शुक्रवार को सायंकाल में संबोधित किया। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश मीडिया संयोजक प्रमोद वशिष्ठ ने की। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार एवं भाजपा मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश संयोजक आनंद शर्मा तथा प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बैठक का संचालन आकाश शर्मा द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनीषा सिंह द्वारा किया गया। कोटा संभाग के मीडिया संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने बताया कि डॉ. अरुण चतुर्वेदी, जो लंबे समय से भाजपा मीडिया विभाग का मार्गदर्शन करते रहे हैं, उन्होंने वर्चुअल बैठक संबोधित करते हुये कहा है कि " राजस्थान में भाजपा सरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सफल ...

मोदीजी का अनंत धन्यवाद, “वन्दे मातरम्” की अद्भुत शौर्य शक्ति से नई पीढ़ी हुई अभिभूत – अरविन्द सिसोदिया

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मोदीजी का अनंत धन्यवाद, “वन्दे मातरम्” की अद्भुत शौर्य शक्ति से नई पीढ़ी हुई अभिभूत – अरविन्द सिसोदिया त्याग, तपस्या और बलिदान की महान प्रेरणा है वन्देमातरम - अरविन्द सिसोदिया  " वन्दे मातरम् " भारत की प्राण-शक्ति है, यह सदैव सर्वोच्च रहेगी – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 10 दिसंबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि “वन्दे मातरम् भारत की अमर प्राणशक्ति है। इसकी सर्वोच्चता को कभी कोई डिगा नहीं सकता । यह हमारी मातृभूमि की अमरता और अखंडता की दिव्य आत्मा है।” उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी को अनंत धन्यवाद है, जिन्होंने स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्रभावना के इस महामंत्र के अद्वितीय शौर्य से, भारत की नई पीढ़ी को, भारत के जन जन को परिचित करवाया। संसद में हुई बहसों से लेकर सार्वजनिक आयोजनों तक, ‘वन्दे मातरम्’ की अलौकिक शक्ति को नई पीढ़ी की चेतना के केंद्र में स्थापित किया और तुष्टिकरण की नापाक राजनीति करने वालों की सच्चाई को बेनक़ाब कर दिया।” सिसोदिया ने कहा कि “भारत की ओजस्विता, तेजस्विता और असीम ऊर्जा का स्रोत ‘वन्दे ...

कविता - अंग्रेजों की पार्टी कांग्रेस नें क्या क्या गुल खिलाये,

अंग्रेजों की पार्टी कांग्रेस नें, क्या क्या गुल खिलाया, बहादुर सुभाष भगाया, देश का विभाजन करवाया, आज़ाद भारत को भी अदृश्य इस्लामी नक़ाब पहनाया। शाही परिवार की खातिर सारा राष्ट्र दाव पर लाया। अंग्रेजों की पार्टी कांग्रेस नें क्या क्या गुल खिलाया। ===1=== लाठी से सत्याग्रह चलाया, जन जन को अखंडता पर भरमाया। राजतिलक के लालच में, अंग्रेजों की हर इच्छा के आगे शीश छुकाया । सत्ता की कुर्सी आते ही सबसे पहले गाँधी की सीखों को भुलाया , अंग्रेजों की पार्टी कांग्रेस नें क्या क्या गुल खिलाया। ===2=== नेहरू की भूलों से भारत का नक्सा घायल हुआ,  विभाजन की विभीषिका में नरसंहारी रुदन हुआ। हिन्दी चीनी भाई भाई का नारा भी घायल हुआ, पड़ोसियों नें आँखें दिखलाईं, देश नें नजरें झुकाई थीं। अंग्रेजों की पार्टी कांग्रेस नें क्या क्या गुल खिलाया। ===3=== सैनिक सीमा पर लहू बहाते, सत्ता ने शत्रु को मखमल फैलाया, हजारों कैदी सैनिक छोड़े उनके, पर अपनों को नहीं छुड़ाया। लोकतंत्र की बंदी बना कर क्या खूब आपातकाल लगाया। आज़ादी के रक्षक बनकर,भारत की आज़ादी को ही धमकाया, अंग्रेजों की पार्टी कांग्रेस नें क्या क्या गुल खिलाया।...