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स्वामी विवेकानंद और भारतीय नवोत्थान – श्री मोहन राव जी भागवत Swami Vivekanand's

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स्वामी विवेकानंद और भारतीय नवोत्थान विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी  मेरा जीवन मेरे सुख के लिए नहीं, दरिद्र नारायण की सेवा व भारत को विश्वगुरू बनाने के लिए, यही विवेकानन्द का सन्देश – श्री मोहन राव जी भागवत  भोपाल, दिनांक २४ मार्च २०१३ // माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्व विद्यालय भोपाल द्वारा स्थानीय समन्वय भवन में स्वामी विवेकानंद और भारतीय नवोत्थान विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक श्री मोहन राव जी भागवत के उद्वोधन से हुआ | कार्यक्रम के प्रारम्भ में कांची काम कोटि पीठ के शंकराचार्य श्री जयंत सरस्वती जी ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि विवेक पूर्वक देश और समाज के लिए कार्य करने से ही आनंद प्राप्त होता है | यह कार्य भी प्रथक प्रथक करने के स्थान पर मिलकर करना अधिक फलदाई है | क्योंकि कलियुग मैं संगठन ही शक्ति है | उन्होंने जोर देकर कहा कि “संघे शक्ति कलौयुगे” |   कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक श्री मोहन राव जी भागवत ने अपने उद्वोधन के प्रारम्भ रोमा रोला द्वारा...