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हिन्दुस्तान को मुगलिस्तान बनानें के सभी षडयंत्र विफल करनें होंगे - अरविन्द सिसौदिया

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    हिन्दुस्तान को मुगलिस्तान बनानें के सभी षडयंत्र विफल करनें होंगे - अरविन्द सिसौदिया भारत में मुगल हमलावर थे, उन्होने जबरिया धर्मान्तरण करके लाखों मुसलमान बनाये, गांवो शहरों के नाम बदले, मंदिरों मूर्तियों को तोडा , हिन्दू देवस्थानों पर अपने धर्मस्थल खडे किये। इतिहास इस बात का साक्षी है। अंग्रेज हकूमत ने निश्चित ही मुगल शासन को पराजित कर ब्रिटिश हकूमत खडी की , टुकडों टुकडों में बंटे भारत का एकीकरण किया , 1857 के स्वतंत्रता संग्राम जिसे तब गदर कहा गया । उसके बाद कुछ समय तक अंग्रेज मुसलमानों के खिलाफ भी रहे, मगर बाद में उन्होनें अघोषित संधी कर मुसलमानों का साथ दिया और साथ लिया। इसी रणनीति का हिस्सा बंग भंग था और बाद में देश विभाजन और पाकिस्तान निर्माण भी रहा। 1947 में हिन्दुओं को हिन्दुस्तान मिला था, किन्तु हिन्दुओं से लगातार धोका होता रहा, देश को मुगलिस्तान बनानें वाली ताकतें भारत के बाहर से और भारत के अन्दर , अघोषित एजेण्डे पर अपना काम करती रहीं हैं।  मुसलमानों का जनसंख्या विस्फोट भी इसी एजेण्डे का एक हिस्सा रहा है। बांगला देशी मुसलमनों को भारत में बसाये जानें का निरन्त...

जब होगा अपनी भाषा में ज्ञान और विज्ञान, तब विश्व बोलेगा जय हिन्दुस्तान

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    14 सितम्बर, हिन्दी दिवस के अवसर पर विशेष  (यह आलेख काफी पहले (2002 में ) लिखा गया था, कृपया इसे अपडेट करनें में मदद करें, सुझाव दें।) जब होगा अपनी भाषा में ज्ञान और विज्ञान, तब विश्व बोलेगा जय हिन्दुस्तान !     मैं देशी भाषाओं की उपेक्षा और नजरअंदाजी के कारण देश को होने वाली हानियों और विदेशियों द्वारा उठाये जाने वाले लाभ का वह सारगर्भित उदाहरण पेश करना चाहता हूं, जो संसद की कार्यवाही में आज से दस साल पहले 1997 में दर्ज हुआ था और इसके बाद भी खास ध्यान नहीं दिया गया।     वाक्या है देश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ का, तब इन्द्रकुमार गुजराल प्रधानमंत्री थे और इस महान अवसर पर स्वतंत्रता के बाद क्या पाया-क्या खोया, इसकी जांच पड़ताल सांसदों के द्वारा की गई थी। उसी कार्यवाही में भाग लेते हुए 30 अगस्त 1997 को हुगली के सांसद रूपचंद पाल ने कहा वह बहुत ही महत्वपूर्ण है:- रूपचंद पाल महोदय, हम जैव विधिता के क्षैत्र में अत्यंत सम्पन्न हैं और इससे 60- 70 बिलियन रूपया अर्जित किया जा सकता है। आज मैं केवल एक सप्ताह पहले की बात का उल्लेख कर रहा हूं। भारती...

धर्म और तत्वज्ञान में, कोई हम से बढ़कर नहीं - जवाहरलाल नेहरू

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नेहरु जी आध्यात्म  के आकाश में  - अरविन्द सीसोदिया     आजकी कांगेस जिस तरह की धर्म निरपेक्षता की बाट करती है .., वह सिर्फ हिंदुत्व का विरोध मात्र है .., जो कि एक सोचा समझा इसाई एजेंन्डा है.., सच यह है की कांग्रेस को यह समझना चाहिए की नेहरूजी भी भारतीय आध्यात्म और जीवन व्यवस्था का आदर करते थे ...! धर्म निरपेक्षता शब्द ही गलत है सही शब्द धर्म सापेक्षता होना चाहिए ..!   जवाहरलाल नेहरु यूं तो समाजवादी विचारधारा से सम्बन्ध रखते थे मगर वे साम्यवाद के बहुत ही अधिक निकट थे, उनके द्वारा हिंदुत्व के गुणगान की  सामान्यतः वन्दना  कम ही थी , जिस तरहे से गांधी जी अपने हिंदुत्व वादी चिंतन  में प्रखर थे , उस तरह से नेहरूजी कभी भी नहीं रहे , मगर उनका मन कहीं न कहीं से हिन्दू चिंतन को व्याकुल तो रहता ही था , इसके कुछ अंश मुझे उनकी जीवनीं में मिले जिन्हें में आपके साथ बाँटना  चाहता हूँ ..! यह ठीक है कि उन्होंने सीधे सीधे हिंदुत्व का नाम नहीं लिया मगर , तथ्यात्म बोध तो वही कहता है, जो है ..!! उन्होंने हिन्दू संस्कृती  को सम्मान भी दिय...