‘राष्ट्र चिन्तन पर्व’ : 25 से 27 दिसम्बर
‘राष्ट्र चिन्तन पर्व’ स्वामी विवेकानन्द का राष्ट्र-ध्यान 25 से 27 दिसम्बर 1892 http://uttarapath.wordpress.com/2011 25 दिसम्बर 1892, स्वामी विवेकानन्द ने श्रीपाद शिला पर अपना ध्यान प्रारम्भ किया। मान्यता है कि उसी शिलापर देवी कन्याकुमारी ने स्वयं तपस्या की थी। तप तो हर जन्म की भाँति ही शिवजी को प्राप्त करने के लिये था। किन्तु इस अवतार में देवी का जीवनध्येय कुछ और था। बाणासुर के वध के लिये देवी का कुवांरी रहना आवश्यक था। नारदजी ने शिवजी के विवाह में विघ्न ड़ाला और शिवजी 8 मिल दूर सुचिन्द्रम् में रुक गये। माँ पार्वती को अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त हुआ। शिला पर माँ का पदचिह्न है। एक ही पाँव का है क्योकि कहते है माँ ने वृक्षासन में 7 साल तक तप किया था। इस पदचिह्न के कारण शिला को ‘श्रीपाद शिला’ के नाम से जाना जाता है। युवा स्वामी, केवल 29 वर्ष की आयु थी इस समय स्वामीजी की, 6 वर्षोंसे भारत का भ्रमण कर रहा है। कुछ खोज रहा है। अपने गुरु के सान्निध्य में योग की सर्वोच्च अनुभूति, निर्विकल्प समाधि को प्राप्त कर चुका है। उन्ही की कृपा से काली माता के साक्षात साकार दर...