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देवर्षि नारद के सुशासन मंत्र devrishi narad ji

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देवर्षि नारद के सवालों में हैं सुशासन के मंत्र by प्रो. बृजकिशोर कुठियाला नारद जयंती  पर विशेष प्रवक्ता डॉट कॉम से साभार आज की राजनीति की प्रेरणा बन सकता है यह संवाद -प्रो.बृज किशोर कुठियाला महाराजा युधिष्ठिर की अद्वितीय सभा में देवर्षि नारद धरमराज की जय-जयकार करते हुए पधारे। उचित स्वागत व सम्मान करके धर्मराज युधिष्ठिर ने नारद को आसन ग्रहण करवाया। प्रसन्न मन से नारद ने युधिष्ठिर को धर्म-अर्थ-काम का उपदेश दिया। यह उपदेश प्रश्नों के रूप में है और किसी भी राजा या शासक के कर्तव्यों की एक विस्तृत सूची है। नारद ने कुल 123 प्रश्न किये, जो अपने आप में एक पूर्ण व समृद्ध प्रशासनिक आचार संहिता है। यह प्रश्न जितने प्रासांगिक महाभारत काल में थे उतने या उससे भी अधिक आज भी हैं। महात्मा गांधी ने जिस रामराज्य की कल्पना की थी उसका व्यवहारिक प्रारूप इन प्रश्नों से स्पष्ट झलकता है। स्वभाविक है कि महाभारत और रामायणकाल की उत्कृष्ठ भारतीय संस्कृति में हर व्यक्ति के कर्तव्यों का दिशा बोध हो। यह कर्तव्य केवल ऐसे निर्देश नहीं थे जिनको करना नैतिक या वैधानिक रूप से अनिवार्य था परन्तु यह ऐसा मार्गद...

नारद मुनि जयंती : देवर्षि नारद

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* देवर्षि नारद * सहबद्धता हिन्दू देवता, देवर्षि, मुनि * मंत्र नारायण नारायण * शस्त्र वीणा * वाहन त्रैलोक्य * संवाद • सम्पादन           नारद मुनि, हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा के सात मानस पुत्रो मे से एक है। उन्होने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया है। वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों मे से एक माने जाते है। देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। शास्त्रों में इन्हें भगवान का मन कहा गया है। इसी कारण सभी युगों में, सब लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारदजी का सदा से प्रवेश रहा है। मात्र देवताओं ने ही नहीं, वरन् दानवों ने भी उन्हें सदैव आदर दिया है। समय-समय पर सभी ने उनसे परामर्श लिया है। श्रीमद्भगवद्गीता के दशम अध्याय के २६वें श्लोक में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इनकी महत्ता को स्वीकार करते हुए कहा है - देवर्षीणाम्चनारद:। देवर्षियों में मैं नारद हूं। श्रीमद्भागवत महापुराणका कथन है, सृष्टि में भगवान ने देवर्षि नारद के रूप में तीसरा अवतार ग्रहण किया और सात्वततंत्र का उपदेश दिया ज...

आदि पत्रकार : देवर्षि नारद जी

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- अरविन्द सिसोदिया  कोटा में सृष्टि के प्रथम पत्रकार देवर्षि नारद जी  की जयंती के अवसर पर , १९ मई गुरुवार को सायं ६ बजे मानव विकास भवन , विश्व हिन्दू परिषद् कार्यालय में राष्ट्र चेतना अभियान  समिति के द्वारा  सी  ए  डी रोड पर आयोजित की गई है | सभी व्यक्ती इस में आ सकते हैं |  देवर्षि नारद जी सिर्फ ब्रह्माण्ड की ईश्वरीय व्यवस्था के सूचना तंत्र मात्र ही नहीं थे बल्कि वे बहुत सी समस्याओं का निदान भी करवाते थे | कलयुग में दुःखी  प्राणियों के लिए श्रीमद भागवत के माध्यम से कष्टों के निवारण और भगवान की भक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाले  देवर्षि नारद जी ही हैं !  हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा के सात मानस पुत्रो मे से एक है। उन्होने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया है। वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों मे से एक माने जाते है। देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। शास्त्रों में इन्हें भगवान का मन कहा गया है। इसी कारण सभी युगों में, सब लोकों में, समस्त विद्याओं ...