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अमरता के अमृत से परिपूर्ण अक्षय तृतिया का पवित्र पर्व

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अमरता के अमृत से परिपूर्ण अक्षय तृतिया  का पवित्र पर्व अक्षय तृतीया का महत्व  ****  अक्षय का अर्थ है जिसे कभी नष्ट न किया जा सके। कभी समाप्त न हो ।।  अक्षय तृतीया हिंदु धर्म में चार मुख्य तिथियों में से एक है। हिंदू धर्म में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, दशहरा और दीपावली पूर्व प्रदोष तिथि और अक्षय तृतीया को मुख्य तिथियां माना गया है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में उल्लेख है कि वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया था। अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था। *** दक्षिण भारत में परशुराम जयंती को विशेष महत्व दिया जाता है। बुंदेलखंड में अक्षय तृतीया पर कुंवारी कन्याएं अपने भाईए पिता तथा गांव में मौजूद घर और कुटुंब के लोगों को शगुन बांटती हैं और भक्तिमय लोकगीत गाती हैं। **** प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं। वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्र...