महिला अधिकारों पर कांग्रेस का दोहरा चरित्र- अरविन्द सिसोदिया



महिला अधिकारों पर कांग्रेस का दोहरा चरित्र
- अरविन्द सिसोदिया 

भारतीय राजनीति में महिला सशक्तिकरण की बातें जितनी जोर-शोर से की जाती हैं, उतनी ही बार निर्णायक क्षणों पर उनका खोखलापन भी उजागर हो जाता है। हाल के घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि महिलाओं के अधिकार कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के लिए सिद्धांत नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार इस्तेमाल होने वाला राजनीतिक औजार भर हैं। अर्थात आज भी ये दल महिलाओं को मात्र वोट देनें तक सीमित रखना चाहते हैँ।

कांग्रेस का इतिहास इस संदर्भ में बार-बार सवालों के घेरे में रहा है। आलोचकों का मानना है कि औपनिवेशिक दौर में स्थापित यह दल लंबे समय तक सत्ता-संतुलन और राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देता रहा, न कि स्पष्ट और ठोस जनहित को। यही कारण है कि उस पर समय-समय पर भारतीय हितों की अपेक्षा राजनीतिक सुविधा और विदेशी हितों को तरजीह देने के आरोप लगते रहे हैं।

जहां तक भारतीय परंपरा का प्रश्न है, इस देश में नारी को सदैव सम्मान और बराबरी का स्थान दिया गया है। भारतीय संस्कृति व सभ्यता में ईश्वरीय व्यवस्था और देवगण वही नारी शक्ति को बराबरी का स्थान व सम्मान और समान्यतः पुरुष से अधिक आदरणीय मानता है। इसके विपरीत, विश्व के कई हिस्सों में महिलाओं को सीमित और आश्रित भूमिका में रखा गया। ऐसे में यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि भारत की राजनीति भी नारी सम्मान के इसी मूल भाव को प्रतिबिंबित करे। लेकिन जब राजनीतिक निर्णय इसके उलट जाते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

इतिहास के कई प्रसंग इस दोहरे चरित्र को उजागर करते हैं। आपातकाल के दौरान विजयाराजे सिंधिया और राजमाता गायत्री देवी जैसी प्रतिष्ठित महिलाओं को जेल में डालना केवल राजनीतिक कार्रवाई नहीं, बल्कि असहमति के दमन का प्रतीक बन गया। शाहबानो प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को पलटने के लिए कानून बनाना भी इस बात का उदाहरण माना जाता है कि राजनीतिक दबाव के आगे एक महिला के अधिकारों को पीछे कर दिया गया।

तीन तलाक जैसे मुद्दे पर दशकों तक निष्क्रियता भी इसी क्रम में देखी जाती है। जब करोड़ों महिलाएं असुरक्षा और अन्याय झेल रही थीं, तब निर्णायक कदम उठाने से बचना क्या दर्शाता है? यह सवाल आज भी प्रासंगिक है।

आलोचना यहीं तक सीमित नहीं रहती। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के आचरण को लेकर भी समय-समय पर प्रश्न उठते रहे हैं। एक महिला प्रधानमंत्री होने के बावजूद क्या वह संवेदनशीलता हर स्तर पर दिखाई दी, जिसकी समाज अपेक्षा करता है? इंदिरा गाँधी के दौर से जुड़े पारिवारिक विवादों को लेकर आलोचक अक्सर यह प्रश्न उठाते हैं कि क्या निजी और सार्वजनिक जीवन में समान मूल्यों का पालन हुआ। यह बहस आज भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई है।

इसके अलावा, कांग्रेस से जुड़े विभिन्न विवादों और घटनाओं में भी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। इन घटनाओं को भले ही अलग-अलग संदर्भों में देखा जाए, लेकिन सामूहिक रूप से वे एक ऐसी छवि प्रस्तुत करती हैं, जो महिला सशक्तिकरण के दावों से मेल नहीं खाती।

इसके विपरीत, हाल के वर्षों में महिला सशक्तिकरण को लेकर कई ठोस पहलें देखने को मिली हैं। उज्ज्वला योजना से लेकर जनधन खातों तक, और तीन तलाक विरोधी कानून से लेकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाले कार्यक्रमों तक—इन कदमों को समर्थक एक वास्तविक परिवर्तन के रूप में प्रस्तुत करते हैं। महिला आरक्षण का मुद्दा भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है, जिसे लंबे समय से लंबित रखा गया था।

आज की भारतीय महिला पहले से कहीं अधिक जागरूक है। वह केवल नारों और वादों से संतुष्ट नहीं होती, बल्कि निर्णयों और परिणामों को परखती है। यही कारण है कि अब राजनीति में भी जवाबदेही की मांग पहले से कहीं अधिक तेज हो गई है।

अंततः, महिला सशक्तिकरण का प्रश्न किसी एक दल या विचारधारा का नहीं, बल्कि देश के भविष्य का प्रश्न है। लेकिन यह भी उतना ही स्पष्ट है कि जो दल इस मुद्दे पर केवल दिखावा करेगा, उसे देश की महिलाएं समय आने पर राजनीतिक हाशिए पर धकेल देंगी। और जो वास्तविक रूप से अधिकार, सम्मान और अवसर देने का साहस दिखाएगा, वही आने वाले भारत की दिशा तय करेगा।

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

भारत रत्न बाबा साहब की बात कांग्रेस मानती तो भारत अखण्ड और तिब्बत स्वतंत्र रहता - अरविन्द सिसोदिया

क्रन्तिकारी तात्याटोपे को फांसी नहीं लगी थी

हमारा देश “भारतवर्ष” : जम्बू दीपे भरत खण्डे

Creation, Consciousness, and Reincarnation: An Integrated Philosophical-Scientific Hypothesis

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

हिन्दु भूमि की हम संतान नित्य करेंगे उसका ध्यान

भगवान विष्णु का वराह अवतार god vishnu god varah