कविता - पूरे ब्रह्माण्ड में एक अकेली, अपनी धरती माता है


कविता - पूरे ब्रह्माण्ड में एक अकेली, अपनी धरती माता है।

पूरे ब्रह्माण्ड में एक अकेली, अपनी धरती माता है,
जिस पर जीवन पलता, जन्म लेता भाग्य विधाता है।
अनंत आकाश के आँगन में, यह चंद्रिका सी छायी,
स्नेह-सुधा की धारा बनकर, हर प्राणी को भायी।
===1===
नील गगन का रेशमी आँचल, तारों के दीप सजे,
हरित धरा ने ओढ़ी चूनर, मानो नव वधू सजी है,
कुसुमों की सुरभित मुस्कानें, रंगों का मधु बरसाएँ,
मंद पवन के मृदु स्पर्श से, मन के तार झनकाएँ।
===2===
नदियाँ कल-कल गान सुनाएँ, जैसे वीणा के स्वर,
सागर की गहराई में छिपे, अनगिन प्रेम भरे असर।
पर्वत हिम के मुकुट पहनकर, अटल प्रणय निभाते,
वन-उपवन की छाया में, स्वप्न सजे मुस्काते।
===3===
सूरज की स्वर्णिम आभा, कंचन काया नहलाए,
चाँदनी की रजत रश्मियाँ, शीतल चुम्बन बरसाए।
ऋतुओं का श्रृंगार निराला, हर पल रूप बदलता,
धरती का हर एक कण जैसे, प्रेम-रस से छलकता।
===4===
अनंत गगन के विस्तार में, ऐसा रूप न दूजा,
जीवन का यह मधुर उपवन, अनुपम, अलभ्य, अनूठा ।
ममता, सौंदर्य, स्नेह की यह अमृतमयी व्याख्या है,
पूरे ब्रह्माण्ड में एक अकेली, अपनी धरती माता है।
=== समाप्त ===

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

संघ का विचार भारत के सत्य सनातन का विचार है – मुरलीधर

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

God Science: God as the Supreme Scientist — A Journey of Evolution

संघकार्य पवित्र ईश्वरीय कार्य है, जिसने बाधा खड़ी की वह स्वयं शून्य हो गया – अरविन्द सिसोदिया

God is within us and also beyond us — Arvind Sisodia

Sangh Work is a Sacred Divine Mission; Whoever Obstructed It Was Reduced to Naught – Arvind Sisodia

क्रांतिपुत्र अमर शहीद मंगल पाण्डे : मे सौ जन्मों तक भारतमाता के लिये अपना बलिदान करता रहूं