जहरीली कांग्रेस, विभाजनकारी कांग्रेस, देश विरोधी कांग्रेस, जनता की नजर से उतर चुकी है - अरविन्द सिसोदिया

कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी,राहुल गाँधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा rss और भाजपा के नेताओं के विरुद्ध उकसावे वाले बयानों का ब्यौरा क्या है... 

 कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ दिए गए बयानों को भाजपा ने "उकसावे वाला", "विवादास्पद" और "हिंसा भड़काने वाला" करार दिया है।

 इन बयानों पर अक्सर राजनीतिक घमासान मचता रहा है।अप्रैल 2026 तक के ब्यौरों के अनुसार, मुख्य बयानों का विवरण इस प्रकार है:

1. मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष) के बयानRSS/BJP को 'जहरीला सांप' बताना (अप्रैल 2026): असम में एक चुनावी रैली (नीलमबाजार) के दौरान खरगे ने RSS और BJP की तुलना एक "जहरीले सांप" से की। उन्होंने कहा, "अगर आप सांप को मारना चाहते हैं, तो वह 'जहरीला सांप' है। अगर आप उसे छुएंगे, तो मर जाएंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के खतरों को 'नमाज' (प्रार्थना) के समय भी पहले निपटाया जाना चाहिए।RSS पर प्रतिबंध की मांग: खरगे ने RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि देश में कानून-व्यवस्था की अधिकांश गड़बड़ियों के लिए वही जिम्मेदार है। उन्होंने सरदार पटेल के उस पत्र का भी हवाला दिया जिसमें RSS द्वारा गांधीजी की मौत का जश्न मनाने का आरोप था।गांधी परिवार को डराने का आरोप: खड़गे ने भाजपा-आरएसएस पर नेशनल हेराल्ड केस के जरिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी को "डराने" और "परेशान" करने का आरोप लगाया है।

2. राहुल गांधी के बयानसंविधान पर हमले का आरोप: राहुल गांधी ने लगातार यह आरोप लगाया है कि भाजपा और RSS का एजेंडा भारत के संविधान को खत्म करना है और वे देश की संस्थाओं पर कब्जा कर रहे हैं।वैचारिक लड़ाई: उन्होंने कहा कि भारत में दो विचारधाराओं की लड़ाई है, और संघ/भाजपा देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं।संस्थाओं पर कब्जा: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद भी संघ अपने लोगों को सरकारी संस्थाओं में भर देगा, जो एक "गहरी साजिश" है।

3. सोनिया गांधी के बयानलोकतंत्र की हत्या का आरोप: सोनिया गांधी ने भाजपा सरकार पर मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है।मनुस्मृति का शासन: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा देश में संविधान के स्थान पर 'मनुस्मृति' का शासन लाना चाहती है।वक्फ संशोधन बिल: उन्होंने वक्फ संशोधन बिल को 'सांप्रदायिक ध्रुवीकरण' का प्रयास बताया और सरकार पर जबरन कानून पास कराने का आरोप लगाया।भाजपा की प्रतिक्रियाभाजपा ने इन बयानों को "मानसिक दिवालियापन" करार दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा सहित कई नेताओं ने कहा है कि कांग्रेस की "मोहब्बत की दुकान" में नफरत और हिंसा की राजनीति चल रही है। भाजपा ने खड़गे के 'जहरीले सांप' वाले बयान के बाद उन पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि ये बयान विशेष समुदाय को भाजपा/RSS के खिलाफ उकसाने के लिए दिए जा रहे हैं।

इन विषयों पर विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:-

## 1. सांप्रदायिक हिंसा प्रतिषेध विधेयक (Communal Violence Bill) 

सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) ने 2011 में 'सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम (न्याय और क्षतिपूर्ति तक पहुंच) विधेयक' का मसौदा तैयार किया था। 

* विवाद का मुख्य कारण: इस विधेयक में "समूह" (Group) की परिभाषा के तहत केवल धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यकों और SC/ST को ही पीड़ित माना गया था।

* आरोप: भाजपा और अन्य आलोचकों ने इसे "हिंदू विरोधी" करार दिया। उनका तर्क था कि यह कानून मानता है कि केवल बहुसंख्यक ही हिंसा करते हैं और अल्पसंख्यक हमेशा पीड़ित होते हैं। इसके तहत दंगों की स्थिति में बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ कार्रवाई करना आसान होता।
* परिणाम: राज्यों के अधिकारों के हनन और भारी विरोध के कारण यह विधेयक कभी कानून नहीं बन सका। 

## 2. CAA के खिलाफ प्रदर्शन और सोनिया गांधी की भूमिका
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के पारित होने के बाद सोनिया गांधी ने इसके खिलाफ मुखर रुख अपनाया था: 

* सड़कों पर उतरने का आह्वान: दिसंबर 2019 में एक वीडियो संदेश में सोनिया गांधी ने CAA को "विभेदकारी" और "भेदभावपूर्ण" बताया। उन्होंने भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है।

* धार्मिक विभाजन का आरोप: उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में कहा कि इस कानून का "नापाक मकसद" भारतीयों को धार्मिक आधार पर बांटना है।

* भाजपा का पलटवार: भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी के इन बयानों ने एक वर्ग विशेष को उकसाया, जिससे दिल्ली के शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन हुए और बाद में हिंसा भड़की। 

इन दोनों ही मुद्दों पर भाजपा का आरोप रहा है कि सोनिया गांधी और कांग्रेस ने 'तुष्टिकरण की राजनीति' के तहत एक विशेष समुदाय को खुश करने और बहुसंख्यक समाज के हितों के खिलाफ काम करने की कोशिश की है। 

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