माँ की स्तुति
माँ की स्तुति
ईश्वर से भी बड़ा जिसका है उपकार
ईश्वर से भी बड़ा जिसका है उपकार,
जो सब कुछ कर देती बच्चों पर बार ।
कैसे चुकाऊँ ऋण तेरा, हे जननी महान,
तेरे चरणों में बसता मेरा सारा जहान।
आँखें तेरी देन हैं, जिनसे जग को जाना,
कान तेरे वरदान, सुना हर मधुर तराना।
नाक से मिली साँस, जीवन का आधार,
तेरी ही कृपा से धड़कता ये संसार।
तन-मन, शिक्षा, संस्कार—सब तुझसे पाया,
मेरे हर गुण में बस तेरा ही साया।
नाम मेरा तुझसे, पहचान भी तेरी,
मेरी हर उपलब्धि में मेहनत है तेरी।
चलना सिखाया तूने, गिरकर फिर उठना,
अंधियारे में दीप बन, हर पल साथ रहना।
जब भी मैं डगमगाया, तूने राह दिखाई,
अपने आँचल में भर, हर पीड़ा मिटाई।
तेरी डाँट में भी छिपा स्नेह का उजियारा,
तेरे हर त्याग ने जीवन सँवारा।
रातों की नींद त्याग, मुझे चैन सुलाया,
अपने सुख भूल, मेरा हर दुःख मिटाया।
तेरे उपकारों का न कोई पार है,
तेरे बिना ये जीवन कितना बेकार है।
अहसान मानूँ तेरा, करूँ तेरा सम्मान,
तेरे चरणों में ही बसता मेरा सारा जहान।
हे नादान मन, समझ ले ये सच्चाई,
माँ एक बार गई तो फिर न लौट पाई।
वही सृजन की शक्ति, वही जीवन दानी,
वही पहली गुरु, वही जग की रानी।
तेरी ममता सागर सी, गहरी और विशाल,
तेरे आशीष से ही जीवन होता खुशहाल।
नमन तुझे बारंबार, हे माँ महान,
तेरे चरणों में सदा मेरा कोटि प्रणाम।
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कैसे चुकाऊँ ऋण तेरा, हे जननी अपार,
तेरी छाया में ही पाया जीवन का आकार।
आँखें तेरी देन हैं, जिनसे जग को जाना,
कान तेरे वरदान, सुना हर मधुर तराना।
नाक से ली साँस जो, तेरी ही है दाती,
वाणी में जो मधुरता, तेरी ही है थाती।
तन-मन, शिक्षा, संस्कार—सब तुझसे पाया,
मेरे हर गुण में बस तेरा ही साया।
नाम मेरा तुझसे है, पहचान भी तेरी,
हर छोटे से कर्म में झलकती छवि तेरी।
चलना सिखाया तूने, गिरकर फिर उठना,
अंधियारे में दीप बन, हर पल साथ रहना।
जब भी मैं डगमगाया, तूने राह दिखाई,
अपने आँचल में भर, हर पीड़ा मिटाई।
तेरी ममता की छाया, अमृत सी शीतल,
तेरे बिना ये जीवन लगता है निर्जल।
तेरी डाँट में भी छिपा स्नेह का उजियारा,
तेरे हर त्याग ने जीवन को सँवारा।
रातों की नींद त्याग, मुझे चैन सुलाया,
अपने सुख भूल, मेरा हर दुःख मिटाया।
तेरे उपकारों का न कोई पार है,
तेरे बिना ये जीवन कितना बेकार है।
अहसान मानूँ तेरा, करूँ तेरा सम्मान,
तेरे चरणों में ही बसता मेरा सारा जहान।
हे मूर्ख मन, समझ ले अब ये सच्चाई,
माँ एक बार गई तो फिर न लौट पाई।
वही सृजन की शक्ति, वही जीवन दानी,
वही पहली गुरु, वही जग की रानी।
तेरी हँसी में मेरी खुशियों का बसेरा,
तेरे आशीष से ही हर सवेरा सवेरा।
तेरे चरणों की धूल भी है मेरे लिए धाम,
तेरे बिना सूना हर उत्सव, हर नाम।
नमन तुझे बारंबार, हे माँ महान,
तेरे बिना अधूरा हर एक अरमान।
तेरी ममता सागर सी, गहरी और विशाल,
तेरे चरणों में सदा मेरा कोटि प्रणाम।
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