कविता – ईश्वर से भी बड़ा जिसका उपकार है ( मां की स्तुति )


कविता – ईश्वर से भी बड़ा जिसका उपकार है

ईश्वर से भी बड़ा जिसका उपकार है,
जीवन और यह तन जिसका उपहार है,
संतान का सुख ही जिसका पूरा संसार है,
वह “माँ” ही है, जिसकी कृपा अपरंपार है।
===1===
ईश्वर नें भी तुझे ही माध्यम बनाया है,
पहली श्वास भी तेरी ही कृपा से आया है,
तेरी ही कोख से पाया यह अमूल्य उपहार है ,
इसलिए तो तुझसे भी बढ़कर तेरा यह प्यार है ।
===2===
आँखें तेरी देन हैं, जिनसे जग को जाना है,
कान तेरे वरदान, सुना हर मधुर तराना है,
नाक से मिली साँस, जीवन का आधार है,
तेरी ही कृपा से धड़कता ये जीवन संसार है।
===3===
तन-मन, शिक्षा, संस्कार—सब तुझसे पाया है,
मेरे हर गुण में बस तेरा ही साया है,
नाम मेरा तुझसे, पहचान भी तेरी है,
मेरी हर कोशिश को मिलता तेरा आशीर्वाद है।
===4===
चलना सिखाया तूने, गिरकर फिर उठना भी सिखाया,
अंधियारे में दीप बन, हर पल साथ उजाला दिखाया,
जब भी मैं डगमगाया, तूने थामा और फिरसे चलाया,
मैंने गुस्सा किया पर बदले में हमेशा तुमसे स्नेह पाया है।
===5===
तेरी डाँट में भी छिपा रहता अपनेपन का उजियारा,
अपने को कष्टदेकर कर तूने मेरा जीवन सँवारा है, 
रातों की नींद त्याग, मुझे चैन से सुलाया है,
अपने आपको भूल कर, मेरा हर दुःख मिटाया है।
===6===
ईश्वर तो कर्ता है पर तू सृजनकर्ता है,
तेरे उपकारों का न कोई पार है,
तेरे बिना ये जीवन कितना बेकार है,
सच में माँ, तुझसे ही मेरा हर व्यवहार है।
===7===
अहसान मानूँ तेरा, करूँ तेरा सम्मान,
तेरे चरणों में ही बसता मेरा सारा जहान।
हे नादान मन, समझ ले ये सच्चाई,
माँ एक बार गई तो फिर न लौट पाई।
===8===
वही सृजन की शक्ति, वही जीवन दानी,
वही पहली गुरु, वही जग की कल्याणी ।
ईश्वर की भी जननी उसका स्वाभिमान है,
माँ कैसी भी हो, ईश्वर से ऊपर उसका स्थान है।
===9===
तेरी ममता सागर सी, गहरी और विशाल,
तेरे आशीष से ही जीवन होता खुशहाल।
नमन तुझे बारंबार, हे माँ तू सबसे महान है,
तेरे चरणों में सदा मेरा कोटि कोटि प्रणामहै।
===समाप्त ===


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