हनुमान ग्यारसा और हनुमान बीसा



🌺 हनुमान ग्यारसा (मंदिर पाठ भजन स्वरूप) 🌺

प्रारंभ की अर्चना...
हनुमानजी सिखाते हैँ हमको क्या करना है,
कैसे जीना है और कैसा बनना है।

(मुखड़ा, जिसे हर पद के बाद दोहराएँ)
हनुमान सा जीवन जीना, संकट में साहस दिखाना ।
पुण्य प्रताप जगाना, धर्म भाव प्रगटाना।।

1
गिरते का हाथ थाम लेना,
हर मन में ज्योति जलाना॥
सत्य मार्ग पर अडिग रहना,
धैर्य से आगे बढ़ते जाना॥
(मुखड़ा)

2
निर्बलजन का बल बनना,
चुनौतीयों से ना घबराना॥
भय को मन से दूर भगाना ,
आत्मबल को अपनाना॥
(मुखड़ा)

3
जैसे सागर लांघा उनने,
वैसे ही विजय को पाना॥
ईश्वर  का ध्यान लगाना,
हर क्षण बढ़ते जाना॥
(मुखड़ा)

4
ज्ञान, विनय और बल लेकर,
जीवन पथ को सजाना॥
क्रोध त्याग संयम अपनाकर,
मन को शांत बनाना॥
(मुखड़ा)

5
मित्रता में सच्चाई रखना,
हर संबंध निभाना॥
भटके जन को राह दिखाना ,
सत्य पथ पर लाना॥
(मुखड़ा)

6
सेवा को ही धर्म बनाकर,
जग में यश फैलाना॥
स्वस्थ तन और दृढ़ मन से,
हर संकट को हरते जाना॥
(मुखड़ा)

7
मोह के जंजाल से बचकर,
सत्य मार्ग अपनाना॥
माया से दूर रहकर,
जीवन सरल बनाना॥
(मुखड़ा)

8
कर्तव्य को सर्वोपरि मान,
हर कर्म को निभाना॥
भक्ति, धर्म और सत्य से,
जीवन को सफल बनाना॥
(मुखड़ा)

9
दीन-दुखी के सदा सहायक,
सबका भार उठाना॥
प्रेमदूत बन पस्नेह बढ़ाना ,
हर हृदय को जीत जाना॥
(मुखड़ा)

10
अडिग विश्वास हृदय में रखकर,
हर बाधा पार लगाना॥
हनुमत गुण जीवन में धरकर,
मानव धर्म निभाना॥
(मुखड़ा)

11 (समापन )
भक्ति, शक्ति, सेवा का, संदेश जग में फैलाएँ,
पवनसुत हनुमान जैसा बन धर्म ध्वजा लहरायें।.
बोलो पवनपुत्र हनुमानजी की, जय 
सीतावर रामचंद्र भगवान जी की,— जय 

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🌺 हनुमान बीसा (भजन शैली) 🌺

(मुखड़ा / दोहराव)

हनुमान सा जीवन जीना,
संकट में साथ निभाना।
परमार्थ से विजय पाना,
अन्याय का नाश करना॥
१.
गिरते को हाथ थाम लेना,
हर मन में दीप जलाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
२.
सत्य मार्ग पर अडिग रहना,
धैर्य से आगे बढ़ जाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
३.
निर्बल जन की बन आवाज़,
अन्याय से ना घबराना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
४.
भय को मन से दूर भगाकर,
आत्मबल को अपनाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
५.
ज्यों सागर लांघा तुमने,
वैसे लक्ष्य को पाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
६.
राम नाम का ध्यान लगाकर,
हर क्षण भक्ति में रम जाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
७.
ज्ञान, विनय और बल लेकर,
जीवन पथ को सजाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
८.
क्रोध त्याग संयम अपनाकर,
मन को शांत बनाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
९.
मित्रता में सच्चाई रखना,
हर रिश्ता सदा निभाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१०.
भटके जन को राह दिखाकर,
सत्य पथ पर लाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
११.
सेवा को ही धर्म बनाकर,
जग में नाम कमाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१२.
स्वस्थ तन और दृढ़ मन से,
हर संकट को हर जाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१३.
माया के इस जाल से बचकर,
सच्चा मार्ग अपनाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१४.
दिखावे से दूर रहकर,
सरल जीवन अपनाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१५.
कर्तव्य को सर्वोपरि मान,
हर कर्म को निभाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१६.
भक्ति, कर्म और सत्य से,
जीवन सफल बनाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१७.
दीन-दुखी के सदा सहायक,
सबका भार उठाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१८.
राम दूत बन प्रेम फैलाकर,
हर हृदय को जीत जाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
१९.
अडिग विश्वास हृदय में रखकर,
हर बाधा पार लगाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥
२०.
हनुमत गुण को जीवन में धर,
मानव धर्म निभाना॥
(दोहराव) हनुमान सा जीवन जीना…॥

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