कविता - मोदी हैं, जो कर दें हर नैय्या पार!

कविता - मोदी हैं, जो कर दें हर नैय्या पार!

हर संकट में बेड़ा पार करे जो खिवइय्या,
हनुमान-सा पराक्रमी, वह है मोदी भैय्या।
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चाहे आतंक का अंधकार, चाहे युद्ध की पुकार,
चाहे महामारी का संकट, चाहे टैरिफ की मार,
हर रण में डटकर खड़े, बनकर जन-आधार,
हर बार वही लेकर आए, विजय का उद्गार,
मोदी हैं, जो कर दें हर नैय्या पार !
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दुश्मन मिलकर रचते चाहे षड्यंत्रों के जाल,
अराजकता की आग भड़काएँ बारंबार,
हर साजिश टूटे आकर, हर चाल जाए हार,
मोदी के संकल्पों से, विफल होता हर अत्याचार !
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कितनी भी ऊँची हों दीवारें, कितनी भी गहरी खाई,
हिम्मत जिसने थामी हो, उसने राह नई बनाई।
आंधी हो या प्रचंड तूफ़ान, न डिगे जिसका मान,
मोदी अटल धैर्य की ज्योति लिए करता समाधान।
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“मोदी” नाम में गूँज रही परिवर्तन की हुंकार,
काम में दिखती सेवा, राष्ट्र रहे जिनका संसार।
चाय की साधारण खुशबू से उठा जनविश्वास महान,
मेहनत, निष्ठा, तप से रचा, नवभारत का स्वाभिमान ।
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जब-जब संकट घिर आया, जब डगमगाई नैया,
हौसलों की पतवार थामे, आगे बढ़े वो भैय्या।
जन-मन के विश्वास का दीप, अंधकार में प्रकाश,
सेवा को ही धर्म मान, निभाया हर एक प्रयास।
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हर योजना में दिखती सोच—उत्थान, विकास, सम्मान,
हर कदम पर साथ लिए, संपूर्ण भारत की पहचान।
स्वच्छता का गूंजा मंत्र, आत्मनिर्भरता का स्वर,
“मोदी” नाम के संग जुड़ा कर्मों का उज्ज्वल सफर।
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हनुमान-सा बल, अटल विश्वास, सेवा का विस्तार,
देशहित में हर एक कदम, बन जाता आधार।
कठिन राह, लंबा पथ हो, फिर भी न रुके अभियान,
भारत माँ के चरणों में अर्पित हर अरमान।
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कितनी भी बड़ी हो चुनौती—वह पार लगाना जानें,
संकल्पों के धनी, हर मुश्किल को पहचानें।
नाम और काम का संगम, जैसे गंगा की धारा,
“मोदी” में दिखता आज हमें, भारत का उजियारा।

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