स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर NSA लगाया जाये
सेवा में,
श्रीमान गृह मंत्री महोदय,
भारत सरकार, नई दिल्ली।
द्वारा –
जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट महोदय,
कोटा (राजस्थान)।
विषय: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा माननीय इंद्रेश कुमार जी के विरुद्ध लगाए गए भ्रामक, असत्य, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले एवं सांप्रदायिक वैमनस्य उत्पन्न करने वाले आरोपों के संबंध में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980’ एवं ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ के अंतर्गत विधिसम्मत कार्यवाही हेतु ज्ञापन।
महोदय,
हम, अधोहस्ताक्षरी, ‘भारत तिब्बत सहयोग मंच’ (चित्तौड़ प्रांत इकाई) के पदाधिकारी/सदस्य, इस ज्ञापन के माध्यम से आपका ध्यान एक अत्यंत गंभीर विषय की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द एवं महिलाओं की गरिमा से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है।
यह अवगत कराना है कि विगत दिनों ज्योतिष्पीठ से संबद्ध स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा एक सार्वजनिक मंच/माध्यम से माननीय इंद्रेश कुमार जी (वरिष्ठ प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के विरुद्ध यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने “10 लाख हिंदू लड़कियों का निकाह मुस्लिम परिवारों में कराया है।”
उक्त कथन प्रथम दृष्टया अत्यंत गंभीर, निराधार एवं तथ्यहीन प्रतीत होता है, जिसके समर्थन में कोई प्रमाण अथवा विशिष्ट विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस प्रकार का वक्तव्य न केवल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाता है, बल्कि विभिन्न समुदायों के मध्य वैमनस्य, अविश्वास एवं अशांति उत्पन्न करने की संभावना भी उत्पन्न करता है।
विशेष रूप से, बड़ी संख्या में “हिंदू लड़कियों/महिलाओं” के संदर्भ में इस प्रकार का कथन समस्त महिलाओं की गरिमा, सम्मान एवं सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाला है, जो विधि के अंतर्गत आपत्तिजनक एवं दंडनीय है।
इस संदर्भ में निम्नलिखित विधिक प्रावधान लागू होते हैं:-
धारा 196, भारतीय न्याय संहिता, 2023 – धर्म, जाति आदि के आधार पर विभिन्न वर्गों के मध्य वैमनस्य को बढ़ावा देना एवं सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना।
धारा 197, भारतीय न्याय संहिता, 2023 – राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल, घृणा या विद्वेष को प्रोत्साहित करने वाले कृत्य/वक्तव्य।
धारा 299, भारतीय न्याय संहिता, 2023 – मानहानि (Defamation)।
धारा 353, भारतीय न्याय संहिता, 2023 – लोक उपद्रव उत्पन्न करने हेतु मिथ्या सूचना/अफवाह का प्रसार।
धारा 79, भारतीय न्याय संहिता, 2023 – किसी महिला की मर्यादा/लज्जा का अपमान करने से संबंधित प्रावधान।
धारा 356, भारतीय न्याय संहिता, 2023 – महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले अपमानजनक कथन/कृत्य।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि संबंधित वक्तव्य न केवल असत्य एवं भ्रामक है, बल्कि यह सार्वजनिक व्यवस्था, सामाजिक समरसता एवं महिलाओं के सम्मान के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करने वाला है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि:-
प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980’ (NSA) के अंतर्गत निरोधात्मक कार्यवाही किए जाने पर विचार किया जाए।
‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ की उपर्युक्त धाराओं (धारा 196, 197, 299, 353, 79 एवं 356) के अंतर्गत तत्काल प्राथमिकी (FIR) पंजीबद्ध कर विधिसम्मत दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषी के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए।
भविष्य में इस प्रकार के भ्रामक, असत्य एवं सांप्रदायिक वैमनस्य उत्पन्न करने वाले वक्तव्यों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु आवश्यक वैधानिक कदम उठाए जाएं।
अतः आपसे निवेदन है कि राष्ट्रहित, सार्वजनिक शांति, सामाजिक समरसता एवं महिलाओं की गरिमा के संरक्षण हेतु इस अत्यंत गंभीर प्रकरण में शीघ्र, प्रभावी एवं कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करने की कृपा करें।
सादर,
भवदीय,
(अरविंद कौशल)
अध्यक्ष
भारत तिब्बत सहयोग मंच, चित्तौड़ प्रांत
(अरविंद सिसोदिया)
महामंत्री
भारत तिब्बत सहयोग मंच, चित्तौड़ प्रांत (राजस्थान)
प्रतिलिपि सूचनार्थ:
1- माननीय मुख्यमंत्री महोदय, उत्तरप्रदेश सरकार, लखनऊ यूपी
2- जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, कोटा (राजस्थान)
3- पुलिस अधीक्षक (SP), कोटा शहर
प्रेस विज्ञप्ति
संपूर्ण हिंदू समाज और मातृशक्ति की गरिमा पर हमला करने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की " राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून " में गिरफ्तारी की मांग
दिनांक:- 1 अप्रैल 2026
स्थान: कोटा (राजस्थान)
‘भारत तिब्बत सहयोग मंच’ (चित्तौड़ प्रांत इकाई) ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा दिए गए अत्यंत आपत्तिजनक, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले, भयंकरतम भ्रामक, समाज को विभाजित करने वाले एवं सांम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न करने वाले बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे संपूर्ण हिंदू समाज एवं मातृशक्ति की गरिमा पर सीधा हमला बताया है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि “10 लाख हिंदू लड़कियों” के संबंध में लगाया गया आरोप न केवल पूर्णतः निराधार और तथ्यहीन है, बल्कि यह करोड़ों हिंदू माताओं-बहनों के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला है। इस प्रकार के बयान समाज में भय, भ्रम एवं वैमनस्य फैलाने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि इस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना एवं भड़काऊ बयानबाजी किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और यह सीधे तौर पर समाज की एकता एवं कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती प्रस्तुत करती है।
‘भारत तिब्बत सहयोग मंच’ ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ के तहत तत्काल गिरफ्तारी की जाए तथा ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ की प्रासंगिक धाराओं में FIR दर्ज कर कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे भ्रामक एवं समाज को विभाजित करने वाले बयानों पर शीघ्र प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो यह प्रवृत्ति देश की सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष अरविंद कौशल, महामंत्री अरविंद सिसोदिया सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जारीकर्ता:
भारत तिब्बत सहयोग मंच
चित्तौड़ प्रांत (राजस्थान)
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