हिंदुत्व ही देश का राष्ट्रित्व है - बलिराम
अखिल भारतीय सामाजिक सद्भावना संयोजक
कोटा | आज दिनांक 07 अप्रैल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विवेकानंद नगर द्वारा प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन महावीर नगर प्रथम स्थित सनाडय सामुदायिक भवन में रखा गया| गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सामाजिक सद्भावना प्रमुख बलिराम जी उनके साथ मंच पर विवेकानंद संघ चालक सत्यनारायण काष्ट उपस्थित रहे |
गोष्ठी का प्रारंभ भारत माता चित्र के समक्ष दीप प्रज्व्वलं एवं पुष्पांजलि के उपरांत राष्ट्रगीत वन्देमातरम के साथ हुआ |
मुख्यवक्ता ने अपने उद्बोधन में बताया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निर्माण हिन्दू समाज को शक्ति संपन्न बनाने के लिए है | हिंदुस्तान हिन्दू राष्ट्र है | आज इसी को लेकर भ्रम है, भ्रांतियां है| इसका कारण है कि दुर्भाग्य के कारण हमने जो गुलामी झेलनी पड़ी | उस गुलामी के कारण ही अंग्रेजों ने हमारे गौरव पूर्ण इतिहास को ही विकृतकर दिया गया | जिसके कारण हमारे मन भ्रम पैदा किया गया हमारे धर्म को लेकर, हमारी संस्कृति को लेकर, हमारे राष्ट्र को लेकर और हमारे समाज को लेकर इन चारों बातों को लेकर इसने प्रकार के भ्रम पैदा किये गए की हम अपने आप की पहचान भूल गए | वास्तव में हम हिन्दू है विषय की स्पष्टता के लिए आज हम सभी इसलिए बैठे है | वर्त्तमान में जिस बात की चर्चा है उसे हम हिंदुत्व के नाम से जानते है | हिंदुत्व क्या है ? इस विषय में सभी प्रमुखजन को या अपनी अपनी श्रेणी के प्रमुख जनों को इस विषय की जानकारी होना आवश्यक है | वास्तव में हिदुत्व ही हमारे देश का राष्ट्रित्व है | भारत के सन्दर्भ में राष्ट्रीयता और हिंदुत्व एक है | राष्ट्रीयता दुनिया के देशों में अलग हो सकती है पर भारत के सन्दर्भ में राष्ट्रीय ही हिंदुत्व है और हिंदुत्व ही राष्ट्रीयता है | दुनिया में देश को नेशन के रूप में जाना जाता है पश्चिम के विचारों में इसे स्टेट थोयरी के रूप में जाना जाता है उसी को उन्होंने राष्ट्र या नेशन कहा | जबकि भारत के सम्बन्ध राष्ट्र की संकल्पना एक दम भिन्न है हमारे यहाँ राष्ट्र एक सांस्कृतिक चेतना है | जब दुनिया के देशों ने आखें भी नहीं खोली थी उस समय भी भारत में वेद पढ़े जाते थे | भारत संस्कृति ही राष्ट्र और राष्ट्र ही संस्कृति है | और भारत की संस्कृति में सभी प्रकार की पूजा पद्धतियाँ समाहित है | इस संस्कृति में ही नर से नारायण बनने की प्रकिया है | हिन्दू एवं हिंदुत्व हमारे यहाँ सांस्कृतिक वाचक है | जो मानव समूह इसको राष्ट्र मानेगा वह हिन्दू है और वही हिन्दू समाज है | इसका सम्बन्ध किसी जाति या धर्म विशेष से नहीं |
उन्होंने राष्ट्र व संस्कृति के बारे में विचार रखते हुए समाज को अपने खोये हुए गौरव को पुनः प्राप्त करने के स्व को जानने पर जोर दिया | सभी को पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन में योग दान करना चाहिए |
गोष्ठी के अतं में संघ चालक सत्यनारायण काष्ठ ने सभी प्रमुख जन एवं प्रबुद्ध जनों एवं मातृशक्ति का आभार व्यक्त किया | समाज से पधारे सभी लोगों ने हिंदुत्व के विचार को समाज में स्थापित करने के लिए सहयोग करने को कहा |
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें