कविता - सत्य सनातन हिंदू विश्व का कल्याण है
कविता - सत्य सनातन हिंदू विश्व का कल्याण है
अच्छा-अच्छा सोचता, यह तो सबसे महान है।
मंद-मंद बहती जैसे गंगा की निर्मल धारा है,
वैसे ही इसमें बहता प्रेम सुधा का उजियारा है।
वेदों की वाणी गूंजे, जैसे वीणा का मधुर गान है,
हर स्वर में बसता दिव्य ज्ञान का अनुपम सम्मान है।
करुणा, दया, दान और कृपा का विधान है,
हमेशा ही कृतज्ञता का भाव भरा सम्मान है।
हर हृदय में प्रेम का पावन संचार है,
इसी मधुर भावना से जीवन साकार है।
नारी में बसती शक्ति, सृजन का अनुपम मान है,
उसके बिना अधूरा हर युग, हर एक विधान है।
ममता, करुणा, धैर्य की वह मधुर पहचान है,
उससे ही सुशोभित होता जीवन और स्थान है।
गुरुजनों के चरणों में ज्ञान का उजियारा है,
उनके आदर से मिटता अज्ञान का अंधियारा है।
माता-पिता की सेवा में सुख का निवास है,
संस्कारों से महके जीवन का हर एक प्रयास है।
परिवार में बसता स्नेह, प्रेम का विस्तार है,
आदर और विनय से सजा हर एक द्वार है।
बंधन नहीं, यह तो अपनापन का संसार है,
जहाँ हर हृदय में बसता मधुर व्यवहार है।
अहिंसा की वाणी में करुणा का मधुर गान है,
हर प्राणी में दिखता एक ही भगवान है।
द्वेष मिटाकर प्रेम का जलता सदा दीपक है,
हर मन में बसता शुभता का निर्मल आलोक है।
“वसुधैव कुटुम्बकम्” का पावन संदेश है,
सारे जग को जोड़ता, मिटाता हर क्लेश है।
त्याग और सेवा में जीवन का सच्चा मान है,
इसी से खिलता है मानवता का सम्मान है।
सत्य सनातन दीप सदा देता उजियारा है,
अच्छा-अच्छा सोचता, यही इसका सहारा है।
मत सोचो छोटा इसे, यह अनंत ज्ञान है,
विश्व के कल्याण में ही इसका सम्मान है।
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